
पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में जीका वायरस का पहला मरीज मिला है। केरल के बाद देश में कानपुर दूसरा शहर है जहां जीका वायरस पाया गया है। जीका वायरस इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि इसका इलाज़ दुनियाभर में अभी तक कहीं भी नहीं है। इसलिए लोगों को इसके प्रति जागरूक रहने से ही बचा जा सकता है। पत्रिका आपको सरल शब्दों में बता रहा है क्या है जीका वाइरस और इससे कैसे पहचाने?
डबल्यूएचओ के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार जीका वायरस भी उसी मच्छर की प्रजाति से फैलता है जिससे डेंगू फैलता है, यानी एडीस मच्छर से ही जीका वायरस फैलता है। डेंगू से बचा जा सकता है लेकिन जीका का कोई इलाज या टीका न होने की वजह से लोगो की जान जानें आ खतरा ज्यादा होता है।
जीका वायरस सलाइवा यानी लार और सीमेन यानी मूत्र भाग से निकले लिक्विड पदार्थ किसी पॉज़िटिव व्यक्ती के संपर्क में आने से हो सकता है। अथवा शरीर से निकलने वाले किसी भी तरल पदार्थ के पॉज़िटिव व्यक्ति के द्वारा आदान-प्रदान से हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, जीका वायरस के संपर्क में आने 3 से 14 दिन के भीतर जीका वायरस की बीमारी के लक्षण व संकेत दिखने लगते हैं. जो कि 2 दिन से लेकर 7 दिन तक दिख सकते हैं. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, जीका वायरस के अधिकतर मामलों में कोई लक्षण नहीं देखे जाते हैं. ये बुखार के तीसरे या चौथे दिन डायरेक्ट अटैक कर सकता है।
इसमें
1 हल्का बुखार
2 रैशेज
3 आंख आना
4 मांसपेशी में दर्द
5 जोड़ों में दर्द
6 सिरदर्द
7 बेचैनी होना इत्यादि प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे ही लक्षणों व संकेतों और ट्रेवल हिस्ट्री के आधार पर ही जीका वायरस के मामले की पुष्टि की जाती है. वहीं, बड़े बच्चों और वयस्कों को जीका वायरस संक्रमण होने पर गुलियन-बेरी सिंड्रोम, न्यूरोपैथी और मायलाइटिस जैसी तंत्रिका संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं.
Updated on:
24 Oct 2021 01:38 am
Published on:
24 Oct 2021 01:32 am

बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
