
illegal colonies in UP
लखनऊ. अनाधिकृत कालोनियां को नियमित होने की आस जगी है। मुख्य सचिव राजीव कुमार के निर्णय आने के बाद अनाधिकृत विकसित कॉलोनियों को संजीवनी मिलने का रास्ता साफ हो गया है। नियमितीकरण के लिए लाभार्थियों को विकास शुल्क, शमन शुल्क एवं आवश्यक होने पर भू उपयोग परिवर्तन शुल्क मानचित्र स्वीकृत के समय एकमुश्त देने होंगे। प्रदेश के विभिन्न प्राधिकरण क्षेत्रों में अनुमानन 2067 अनाधिकृत कालोनियां चिन्हित की गईं हैं। हालांकि नियमितीकरण के मानक कठिन होने से कुछ नहीं हो पा रहा था। मानक के अनुसार सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम, सीवर, पार्क व अन्य सुविधाएं होने पर ही कालोनियों को नियमित किया जा सकता है। इनके नियमितीकरण सबंधी गाइड लाइन्स के क्रियान्वयन में कठिनाइंयां हैं।
आठ सदस्यीय समिति देगी संस्तृति
आवास विभाग ने गाइड लाइन्स को सरलीकृत एवं व्यवहारिक बनाते हुए इसमें संशोधन किए हैं। पुरानी नीति व्यवहारिक न होने पर समस्या आ रही थी। इसीलिए अब पुरानी नीति में कुछ बदलाव किए गए हैं। ले आउट प्लान का परीक्षण के लिए आठ सदस्यीय समिति अपनी संस्तृति देगी। जिसे विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की सहमति से बोर्ड के अनुमोदन के बाद मंजूरी दी जाएगी। समिति में सचिव विकास प्राधिकरण अध्यक्ष, मुख्य अभियंता अथवा प्रभारी अभियंत्रण सदस्य संयोजक, मुख्य नगर नियोजक, स्थानीय निकाय का प्रतिनिधि, जिलाधिकारी का प्रतिनिधि, जल निगम, जल संस्थान का प्रतिनिधि, पावर कॉरपोरेशन का प्रतिनिधि तथा अग्निशमन विभाग का प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होंगे।
राजधानी में लगभग 600 कॉलोनियां अवैध
जानकारी के अनुसार, शहर के अंदर करीब 645 अनाधिकृत कालोनियां हैं। महायोजना 2021 में 241 अवैध कालोनियों दर्ज की गई हैं, जबकि महायोजना 2031 में अनाधिकृत कॉलोनियों का आंकड़ा 345 हो गया है। अगर दोनों आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो करीब 586 कॉलोनियां अनाधिकृत हैं. हालांकि कई ऐसे भी कॉलोनियां हैं, जो अनाधिकृत तो हैं लेकिन रजिस्टर्ड नहीं हैं. इसकी वजह से आंकड़ा 600 के आसपास माना जा रहा है।
इस दशा में ही होगी नियमितीकरण की प्रक्रिया
-महायोजना के अंतर्गत वर्तमान अथवा प्रस्तावित रेलवे लाइन, सड़कें, पार्क एवं ग्रीन लैंड तथा अन्य अवस्थापना एवं जन सुविधाओं के लिए आरक्षित भूमि पर न हों।
-केंद्र व राज्य सरकार अथवा सार्वजनिक अभिकरण के स्वामित्व की भूमि पर स्थित न हों। लेकिन सबंधित विभाग से एनओसी मिलने पर पात्र होंगी।
-वन क्षेत्र, पर्यावरण एवं परिस्थितिकी को लेकर संवेदनशील क्षेत्र के अंतर्गत स्थित न हों।
-जलमग्न क्षेत्र, नदी नाले के प्रवाह क्षेत्र, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र, तालाब व पोखर आदि तथा अन्य असुरक्षित स्थलों के अंतर्गत न हों।
-भारतीय पुरातात्विक विभाग तथा राज्य पुरातात्विक विभाग से सबंधित स्मारकों के निषिद्घ क्षेत्र की सीमा में न हों।
-विवादित स्वामित्व की भूमि पर स्थित न हों।
अभी भी हर सुविधा लेकिन फिर भी अनाधिकृत
शहर के अंदर कई ऐसी कॉलोनियां भी हैं, जहां जनता से जुड़ी सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। रवींद्रपल्ली, मारूतिपुरम, द्रौपदी विहार, ब्रह्मïकुंज समेत कई कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां सीवर और पेयजल लाइन तक बिछ चुकी हैं। इसके बावजूद ये कॉलोनियां अनाधिकृत की श्रेणी में हैं. वहीं फैजुल्लागंज, कल्याणपुर, हरदोई रोड पर कई कॉलोनियां हैं, जो अनाधिकृत हैं। यहां भी सुविधाएं ठीक ठाक हैं, बावजूद इसके इन कॉलोनियों को अभी तक वैध नहीं किया जा सका है।
Published on:
24 Apr 2018 08:12 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
