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इन्हें लड़कों ने दिखाया था तेजाब का डर, जाने कैसे किया मुकाबला

महिला दिवस यानी कि महिलाओं के सम्मान का दिन। ये सिर्फ महज कुछ शब्द नहीं हैं, बल्कि महिलाओँ के अभिमान को भी व्यक्त करता है  

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tejaswini singh

लखनऊ. महिला दिवस यानी कि महिलाओं के सम्मान का दिन। ये सिर्फ महज कुछ शब्द नहीं हैं, बल्कि महिलाओँ के अभिमान को भी व्यक्त करता है। महिला दिवस की खास पेशकश में हम बात करेंगे उस सशक्त महिला की जो मॉर्डन तो है लेकिन अपनी जड़ों से आज भी जुड़ी हुई है। इनकी कहानी हर महिला की आम जिंदगी से जुड़ी है। हम बात कर रहे हैं मिसेज इंडिया इंटरनेशनल का खिताब जीत कर लखनऊ का नाम रौशन करने वालीं तेजस्विनी सिंह की।

तेजस्विनी आज ग्लैमर जगत का हिस्सा बनने की कवायद रखती हैं। लेकिन इसके लिए उनका संघर्ष कम नहीं था। यहां बात हम तेजस्विनी के इस फील्ड में आने के संघर्ष की सिर्फ बात नहीं कर रहे हैं। बल्कि शुरूआत से लेकर जिंदगी के हर मोड़ पर संघर्ष किया है। न सिर्फ संघर्ष किया बल्कि जिंदगी में आई हर छोटी बड़ी मुसीबत से लड़ीं और उनका डटकर सामना किया। जाहिर है हर लड़की अपनी जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पर ईव टीजिंग का शिकार हुई होगी। लेकिन इस मुद्दे को उसने कैसे उठाया या इस तरह की परेशानियों से वो कैसे लड़ी, ये बात मायने रखती है।

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सबसे पहले आपको बता दें कि तेजस्विनी पेशे से जर्नलिस्ट और हर्बल प्रोडक्ट की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। इनकी कंपनी का नाम है ऑर्गैनिक ग्रीन्स एंड फ्लोरा एक्जॉटिका (Organic Greens and Flora Exotica)। इसके अलावा उन्होंने डिजाइनर के रूप में भी खुद को बखूबी स्थापित किया है। उन्हें सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव ने महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) का अवॉर्ड दिया है।

कुछ ऐसी है इनकी कहानी

बात 2003 की है जब तेजस्विनी 10th में थीं। बोर्ड परीक्षा सिर पर और तैयारी खूब सारी बची। उस समय वह कोचिंग करती थीं जो उनके घर से काफी दूर थी। कोचिंग जाते वक्त रास्ते में कुछ लड़के उन्हें परेशान करते थे। इसमें से एक ने तो उनका पीछा तक करना शुरू कर दिया था। पीछा करने वाला ये शख्स एक वकील का बेटा था। ये सिलसिला करीब एक महीने तक चलता गया। पहले तो तेजस्विनी ने कुछ नहीं कहा लेकिन जब पानी सर से ऊपर निकल आया, तब उन्होंने आवाज उठायी।

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दोस्तों ने नहीं दिया साथ

महीनों भर तक चलने वाला ये सिलसिला जब तेजस्विनी के बर्दाश्त के बाहर हो गया, तो उन्होंने सरेआम उस लड़के से कहा कि अगर तुमने मेरा पीछा करना बंद नहीं किया, तो मैं यहीं पर तुमको मारूंगी और कोई रोकने नहीं आएगा। शायद उनका इतना कहना काफी नहीं था इसलिए गुंडई करते उस लड़के को कोई फर्क नहीं पड़ा। इसलिए जब दी गयी इस चेतावनी को एक कान से सुन कर दूसरे कान से निकाल दिया गया, तो तेजस्विनी ने बगल में खड़े उसके रिश्तेदार को जड़ दिया जोर दार थप्पड़। तेजस्विनी के इस एक्शन से जहां हर किसी को उनकी तारीफ करनी चाहिए थी, वहीं लड़कियों ने पीठ पीछे बुराई करना शुरू कर दिया। शायद हर किसी को इस बात की शिकायत थी कि जिसे थप्पड़ मारा गया है, वो राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखता है। इसलिए तेजस्विनी के खिलाफ कोई बड़ी बात हो सकती है, जिसकी वजह से उनकी कोचिंग का नाम खराब हो सकता है और उन पर भी बात आ सकती है।

तेजाब से डराया

ये वो परिस्थिति होती है जब कोई कुछ भी कहे लेकिन आपकी महिला दोस्त और परिवार वाले आपकी हिम्मत की सराहना करने की बजाय आपको ऐसा करने से रोकते हैं, तो बेशक बुरा लगता है। इस चक्कर में उनकी दोस्तों ने दोस्ती तोड़ दी थी ये सोचकर कि इससे उनकी जान पर भी बात बन आ सकती है। लेकिन तेजस्विनी ने हार नहीं मानी और निडर होकर इस मुसीबत का अकेले सामना किया। जब पीछा करने से मन नहीं भरा, तो उस लड़के ने तेजाब दिखा कर तेजस्विनी को डराना चाहा। घर वालों ने भी कोचिंग न जाने की सलाह दी। उन्हें डर था कि कहीं उनकी बच्ची के साथ कुछ गलत न हो जाए।

इतनी मुसीबतों के बाद और बिना किसी सपोर्ट के तेजस्विनी ने न तो कोचिंग जाना बंद किया और न ही किसी से डरीं। उन्ही लड़कियों के बीच में बैठ कर उन्होंने अपनी कोचिंग क्लासेस पूरी कीं क्योंकि बात यहां हिम्मत से ज्यादा सम्मान की आती है। महिलाओं को अपने लिए खड़ा होना चाहिए और बिना किसी से डरे खुलकर गलत के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। उस घटना से ये सबक सीखकर तेजस्विनी ने बिना किसी के डर के आगे झुके चलती चलीं और आज की महिला पीढ़ी को भी वह यही सीख देती हैं।