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UP Politics: जयंत ने एनडीए में शामिल होने के दिए सियासी संकेत, बोले- ‘क्या मैं नया सूट सिलवा लूं’

जयन्त चौधरी के एनडीए में शामिल होने के बाद बीजेपी को पश्चिम यूपी, राजस्थान और हरियाणा में जाट और किसान वोटरों का फायदा मिलेगा। वहीं अगर बीजेपी से रालोद के रिश्ते खिले तो जयंत चौधरी को बड़ा सियासी छलांग भी मिलेगा।

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लखनऊ

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Anand Shukla

Jul 06, 2023

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रालोद मुखिया जयंत चौधरी

UP Politics: आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दल तैयारियों में जुट गए हैं। इसके साथ ही अपने हिसाब से गठबंधन की करने की कवायद में हैं। वहीं, पश्चिमी यूपी में जयंत चौधरी नए चुनावी रणनीति बना रहे हैं। चर्चा है कि रालोद अध्यक्ष जयन्त चौधरी 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन के साथ जा सकते हैं।

दरअसल, तीन दिन पहले जंयत चौधरी ने बागपत के पुरा महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने पहुंचे थे। यहां पर उन्होंने मीडिया से बात करते समय बीजेपी पर कुछ कहने से परहेज किया। हल्के-फुल्के मूड में लोगों से यह भी पूछा कि ‘क्या आप चाहते हैं कि मैं नया सूट सिलवा लूं’। इसे उनके मोदी कैबिनेट से जुड़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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रामदास आठवले पहले ही कर चुके भविष्यवाणी
मोदी सरकार के कैबिनेट मंत्री रामदास आठवले और राज्य सरकार के मंत्री डा. संजय निषाद ने पहले ही कह चुके हैं कि चौधरी एनडीए में शामिल होंगे। वहीं, राजनीतिक पंडितों का कहना है कि नई दिल्ली में इस गठबंधन की नींव भी रखी जा चुकी है। अगर बीजेपी और आरएलडी के बीच गठबंधन होता है तो जयंत को भी सियासी फायदा मिलेगा। वहीं, बीजेपी राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में मजबूत होगी।


मोदी फैक्टर के बावजूद जाट वोटरों में जयंत लोकप्रिय
पश्चिम उप्र की राजनीति में जाट फैक्टर काफी अहम है। मोदी लहर की मदद से बीजेपी ने 2014, 2017 और 2019 लोकसभा चुनाव में रालोद मुखिया अजित सिंह और जयंत को मात दी, लेकिन जाट वोटरों में उनके प्रति आकर्षण बना रहा। मोदी और योगी की करिश्माई जोड़ी के बीच वर्ष 2018 कैराना लोकसभा उपचुनाव एवं 2023 खतौली विधानसभा उपचुनाव में रालोद ने भाजपा को हराकर साफ कर दिया कि अभी चौधराहट खत्म नहीं हुई है।

इससे पहले 2022 विधानसभा चुनाव में जयन्त चौधरी ने सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ गठबंधन कर पश्चिम यूपी में आठ सीटें जीत ली। जयन्त राज्यसभा सदस्य हैं जबकि रालोद के पास यूपी में आठ व राजस्थान में एक विधायक है। रालोद मुखिया जयन्त चौधरी कई बार कह चुके हैं कि वो भाजपा विरोधी गठबंधन के साथ रहेंगे लेकिन जिस तरह से राजनीतिक परिस्थितियां बदल रही हैं, वह एक नई कहानी बयां कर रही हैं।


विपक्षी एकता मीटिंग में नहीं गए थे जयंत
इसी महीने बिहार की राजधानी पटना में विपक्षी एकता की मीटिंग हुई लेकिन जयंत चौधरी यहां नहीं पहुंचे। इसके बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि सपा और रालोद के बीच सबकुछ अच्छा नहीं है। हाल में जयन्त की नई दिल्ली में भाजपा के शार्ष नेता से दो घंटे लंबी मुलाकात ने राजनीतिक पारा गरमा दिया। इसके बाद से कयाल लगाए जा रहे हैं कि वह जल्द ही एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं।