
उत्तराखंड वन विकास निगम में 650 कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ गई है
उत्तराखंड वन विकास निगम में वर्षों से नौकरी कर रहे करीब साढ़े छह सौ आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी 31 मार्च को समाप्त हो जाएगी। वन निगम इनके रिन्यूअल के लिए शासन को प्रस्ताव भेज रहा है, लेकिन चुनाव आचार संहिता के चलते रिन्यूअल की अनुमति मिलना मिलनी कठिन है। अगर अनुमति मिल भी जाती है, तब भी करीब दौ सौ कर्मचारियों का हटना तय माना जा रहा है। दरअसल, वन निगम में आउटसोर्स कर्मचारी जरूरत से ज्यादा हैं। दूसरी ओर, स्थायी कर्मचारियों में इसे लेकर भी आक्रोश है। वन निगम के एमडी डॉ. एसपी सुबुद्धि के मुताबिक समिति की रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। आउटसोर्स कर्मचारियों का अनुबंध 31 मार्च को खत्म होगा। शासन से रिन्यूअल की अनुमति मांगी जा रही है।
वन निगम में पिछले कुछ वर्षों में नेता-अफसरों के चहेतों को आउटसोर्स करने के आरोप लगते रहे हैं। तब न तो शैक्षिक योग्यता देखी गई और न ही पदों की संख्या। पिछले साल शासन ने आउटसोर्स की भर्ती पर रोक लगा दी। साथ ही, यह भी निर्देश दिए कि कर्मचारियों की संख्या और मौजूदा जरूरत का सर्वे कराया जाए।
वन निगम ने पिछले साल कर्मचारियों का सर्वे कराया था। एमडी एसपी सुबुद्धि ने आरएम कुमाऊं एवं गढ़वाल की कमेटी बनाकर सर्वे करवाया। अब इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट एमडी को सौंप दी है। चुनावी माहौल में कर्मचारियों की छंटनी को लेकर वन निगम में काफी चर्चाएं हो रही हैं।
बताया जा रहा है कि इस कमेटी की रिपोर्ट में दो सौ कर्मचारियों को अतिरिक्त बताया गया है। इसके अलावा कमेटी ने यह भी कहा है कि जो भी कर्मचारी आउटसोर्स पर रखे जाएं, वो उस पद के सापेक्ष शैक्षिक योग्यता रखते हों।
Published on:
24 Mar 2024 09:18 am
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