इस मंदिर में मंगल आरती से शुरू होगा कान्हा का जन्मदिन
शहीद पथ के पास बने इस भव्य मंदिर में श्री कृष्ण के जन्मदिन की शुरुआत मंगल आरती से की जाएगी इसके बाद पूरे दिन रंगारंग कार्यक्रम वहां पधारे भक्तों को मंत्रमुग्ध करेंगे।
लखनऊ. पूरा देश जहां माखन चोर नटखट गोपाल के 5,243 वें जन्म दिन को बेहद खास ढंग से मनाने की तैयारी में जुटा है। वहीं इस्कॉन मंदिर लखनऊ में कान्हा के जन्मोत्सव की तैयारियां कुछ अलग ढंग से ही की जा रही हैं। शहीद पथ के पास बने इस भव्य मंदिर में श्री कृष्ण के जन्मदिन की शुरुआत मंगल आरती से की जाएगी इसके बाद पूरे दिन रंगारंग कार्यक्रम वहां पधारे भक्तों को मंत्रमुग्ध करेंगे।
इस्कॉन मंदिर लखनऊ के अध्यक्ष अपरिमेय श्यामदास और चेयरमैन आनंद स्वरूप अग्रवाल ने बताया हर साल की तरह इस साल भी सम्पूर्ण विश्व में 'अन्तर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ' (इस्कॉन) कन्हैया के जन्मदिन को धूमधाम से मना रहा है। लखनऊ स्थित मंदिर में जन्मोत्सव वाले दिन सुबह 4:30 बजे तड़के सबसे पहले मंगल आरती इसके बाद तुलसी आरती, अविरल भजन, संग कीर्तन, संध्या आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम राधारमण बिहारी का अभिषेक, महाआरती होगी इसके बाद छप्पन भोग लगाने के बाद कार्यक्रम संम्पन्न होंगे।
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उन्होंने बताया इस्कॉन मन्दिर वृन्दावन के आधुनिक मन्दिरों में से एक भव्य मन्दिर है। 26 अगस्त को मंदिर परिसर में गोविंदा रेस्टोरेंट का शुभारम्भ, नन्द उत्सव, गुरु पूजा, श्रील प्रभूपाद अभिषेक, श्रद्धांजलि, पुष्पांजलि व प्रसाद वितरण एवं भंडारे का कार्यक्रम होगा। उन्होंने बताया पूरी दुनिया में स्थापित इस्कॉन मंदिर की योजना झांसी में बनाई गई थी। दुनिया भर में इस्कॉन के 550 प्रमुख केंद्र हैं, जबकि 1000 से ज्यादा मंदिर हैं। इस भव्य कार्यक्रम में लाखों भक्तों के आने की सम्भावना है। यह भी पढ़ें- श्रीकृष्ण जन्म अष्टिमी पर 52 साल बाद बन रहा त्रिगुण संयोग, यह है शुभ पूजा का समय janmashtami 2016" title="images of Krishna Janmashtami 2016" src="http://img.patrika.com/upload/images/2016/08/20/Krishna-Janmashtami4-1471674899.jpg" align="middle" border="0"> यह है व्रत के नियम जन्माष्टमी उपवास के दौरान एकादशी उपवास के दौरान पालन किये जाने वाले सभी नियम पालन किये जाने चाहिये। जन्माष्टमी के व्रत के दौरान किसी भी प्रकार के अन्न का ग्रहण नहीं करना चाहिये। जन्माष्टमी का व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद एक निश्चित समय पर तोड़ा जाता है जिसे जन्माष्टमी के पारण समय से जाना जाता है। यदि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में से कोई भी सूर्यास्त तक समाप्त नहीं होता तब जन्माष्टमी का व्रत दिन के समय नहीं तोड़ा जा सकता। यह भी पढ़ें- डेंगू के डंक से भगवान भी डरे, जन्म के बाद मच्छरदानी में रखे जायेंगे श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पारण सूर्योदय के पश्चात अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होने के बाद किया जाना चाहिये। यदि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र सूर्यास्त तक समाप्त नहीं होते तो पारण किसी एक के समाप्त होने के पश्चात किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में व्रती को किसी एक के समाप्त होने के बाद ही व्रत तोड़ना चाहिये। हिन्दु ग्रन्थ धर्मसिन्धु के अनुसार, जो श्रद्धालु-जन लगातार दो दिनों तक व्रत करने में समर्थ नहीं है, वो जन्माष्टमी के अगले दिन ही सूर्योदय के पश्चात व्रत को तोड़ सकते हैं। यह भी पढ़ें- इस मंदिर में मंगल आरती से शुरू होगा कान्हा का जन्मदिन जन्माष्टमी के दिन, श्री कृष्ण पूजा निशीथ समय पर की जाती है। वैदिक समय गणना के अनुसार निशीथ मध्यरात्रि का समय होता है। निशीथ समय पर भक्त लोग श्री बालकृष्ण की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। विस्तृत विधि-विधान पूजा में षोडशोपचार पूजा के सभी सोलह (16) चरण सम्मिलित होते हैं। जन्माष्टमी की विस्तृत पूजा विधि, वैदिक मन्त्रों के साथ जन्माष्टमी पूजा विधि पृष्ठ पर उपलब्ध है। यह है पूजा का समय -भगवान श्रीकृष्ण का 5243वाँ जन्मोत्सव, -अष्टमी तिथि प्रारम्भ24/अगस्त/2016 को 22:17 बजे, अष्टमी तिथि समाप्त- 25/अगस्त/2016 को 20:07 बजे -निशिता पूजा का समय 24:00+ से 24:45+ अवधि = 0घण्टे 44 मिनट्स -मध्यरात्रि का क्षण 24:23+26th को, पारण का समय-10:52 के बाद पारण के दिन अष्टमी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो -पारण के दिन रोहिणी नक्षत्र का समाप्ति समय 10:52, दही हाण्डी - 26 अगस्त