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Karva Chauth Sargi: जानिए करवा चौथ पर सरगी का क्या हैं विशेष महत्व

सरगी देने के पीछे भी यही मुख्य बात निहित है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Nov 03, 2020

सरगी देने के पीछे भी यही मुख्य बात निहित है।

सरगी देने के पीछे भी यही मुख्य बात निहित है।

लखनऊ, सरगी करवा चौथ के दिन दिया जाने वाला मुख्य भोजन होता है। सूर्योदय से पहले यानी लगभग 4-5 बजे सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। सरगी के साथ ही सास अपनी बहू को भरपूर आशीर्वाद भी देती है जिससे बहू अपना ये व्रत अच्छे से पूरा कर सके। इसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है और चंद्र उदय के बाद चंद्रमा की पूजा कर इसका समापन किया जाता है।

वस्तुत: देखा जाए तो सरगी शब्द *सरग* से बना है जो स्वर्ग का अपभ्रंश ही है। आम जन में स्वर्ग की प्राप्ति को लेकर विशेष आकर्षण सदा से रहा है। सुहागिन स्त्रियां अपना पतिव्रता धर्म भलीभांति निभाते हुए स्वर्ग जाना चाहती हैं और भी सुहागिन। इस सरगी देने के पीछे भी यही मुख्य बात निहित है।

करवा किस बात का प्रतिक है

करवाचौथ' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, 'करवा' यानी 'मिट्टी का बरतन' और 'चौथ' यानि 'चतुर्थी'। इस त्योहार पर मिट्टी के बरतन यानी करवे का विशेष महत्व माना गया है। मिट्टी का बर्तन अपने में सभी खनिज और औषधीय गुणों से भरपूर होता है साथ ही शीतल भी होता है। मिट्टी धैर्य और सृजन का भी प्रतीक है। इसके साथ ही मिट्टी का करवा सभी के लिए सुलभ होता है जिससे अमीर गरीब हर औरत इस व्रत को कर सकती है।