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1962 से चल रहा है राजा महमूदाबाद की संपत्ति का विवाद, तीस हजार करोड़ है कीमत?

7 जनवरी 2016 को फिर नया अध्यादेश आया। राजा महमूदाबाद ने इस अध्यादेश को भी चुनौती दी।  
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1962 से चल रहा है राजा महमूदाबाद की संपत्ति का विवाद, तीस हजार करोड़ है कीमत?

लखनऊ. राजा महमूदाबाद की संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। महमूदाबाद के राजा मोहम्मद आमिर अहमद खान थे। महमूदाबाद सीतापुर जिले का एक कस्बा है। जब भारत का विभाजन हुआ तब वह ईराक में रह रहे थे। 1957 में राजा मोहम्मद आमिर खान ने भारत की नागरिकता छोडकऱ पाकिस्तान की नागरिकता ले ली। लेकिन, इनका परिवार भारत में ही रह गया। इसके बाद भारत छोडकऱ पाकिस्तान जाकर बसे लोगों की संपत्तियोंं के लिए भारत के रक्षा नियम (डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स) 1962 के तहत इनकी संपतियां भारत सरकार ने अपने संरक्षण में ले लीं। इन शत्रु संपत्तियों का राज्य सरकार ने अक्टूबर 2006 में आकलन कराया था। तब इनकी कीमत 30 हजार करोड़ रुपये आंकी गई थीं।
हालांकि, महमूदाबाद के किले को छोडकऱ किसी भी संपत्ति को सील नहीं किया गया। महमूदाबाद किले के एक छोटे-से हिस्से में राजा का भी परिवार रहता था, लेकिन,1966 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किले को पूरी तरह खोल दिया गया और राजा महमूदाबाद के भाई को उसकी देखरेख के लिए कस्टोडियन बना दिया गया। भारत सरकार ने 1968 में शत्रु संपत्ति अधिनियम बनाया। इसके बाद किले में रहने वाले राजा की पत्नी और बेटे को संपत्ति का मेंटेनेंस अलाउंस देने का काम कस्टोडियन को सौंपा गया।

1977 में लंदन में मौत हो गई
1973 में राजा महमूदाबाद की लंदन में मौत हो गई। तब उनके बेटे मोहम्मद आमिर मोहम्मद खान कैंब्रिज में पढ़ रहे थे। भारत आने पर उन्होंने अपने पिता की संपत्ति पर उत्तराधिकार का दावा पेश किया। काफी लंबे समय बाद 1981 में इंदिरा गांधी सरकार ने उनकी 25 प्रतिशत संपत्ति लौटाने की बात कही। लेकिन वे नहीं माने और लखनऊ सिविल कोर्ट चले गए। कोर्ट ने उन्हें संपत्ति का कानूनन वारिस माना, लेकिन भारत सरकार ने कहा कि वह अब 25 प्रतिशत संपत्ति या 25 लाख रुपये जो भी कम हो वही दिया जाएगा। 1997 में उन्होंने मुंबई हाईकोर्ट में भी याचिका लगाई। 2001 में वह मुकदमा जीत गए। लेकिन 2002 में सरकार ने अपील कर दी। 2005 में सरकार की अपील खारिज हो गई। तब सुप्रीम कोर्ट ने कस्टोडियन की आलोचना की और आठ हफ्ते के अंदर राजा महमूदाबाद को संपत्ति देने के आदेश दिया। इसके बाद जिन संपत्तियों पर किरायेदार नहीं थे उसका उन्हें कब्जा मिल गया, लेकिन, किरायेदार सुप्रीम कोर्ट चले गए।

फिर सभी संपत्तियां कस्टोडियन के कब्जे में चली गईं
2010 में सरकार ने शत्रु संपत्ति अधिनियम में संशोधन कर नया अध्यादेश लाया। इसके बाद फिर राजा की सभी संपत्तियां कस्टोडियन के कब्जे में चली गईं। 2010 में ही अध्यादेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। 2011 में उत्तराखंड हाईकोर्ट में भी अपील की गई। सितंबर 2015 में मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 7 जनवरी 2016 को फिर नया अध्यादेश आया। राजा महमूदाबाद ने इस अध्यादेश को भी चुनौती दी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने राजा महमूदाबाद की संपत्ति बेचने पर रोक लगा दी है। इस बीच लोकसभा में इस अध्यादेश को पेश करके सरकार ने इसे पास करा लिया है।

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