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चंद्रशेखर आज़ाद रावण भी मायावती की तरह मानते हैं कांशीराम को अपना राजनीतिक गुरु, जानें आज़ाद के बारे में

मायावती के राजनीतिक गुरु 'कांसीराम' को अपना गुरु मानते हैं भीम आर्मी के सह-संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद रावण| 2014 में बनी भीम आर्मी भारत में शिक्षा के माध्यम से दलितों की मुक्ति के लिए काम करता है।

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लखनऊ

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Mahima Soni

Sep 14, 2021

चंद्रशेखर आज़ाद रावण भी मायावती की तरह मानते हैं कांशीराम को अपना राजनीतिक गुरु, जानें आज़ाद के बारे में

चंद्रशेखर आज़ाद रावण भी मायावती की तरह मानते हैं कांशीराम को अपना राजनीतिक गुरु, जानें आज़ाद के बारे में

लखनऊ. ChandraShekhar Azad 'Ravan': चंद्रशेखर आजाद 'अम्बेडकरवादी' विचारधारा के साथ भीम आर्मी के सह-संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पार्टी की अधिकांश लोकप्रियता दलित और अनुसूचित जनजातियों से आती है| 2020 में होने वाले यूपी में चुनाव के लिए पार्टी ने अपनी तैयारियां जोर शोर से शुरू कर दी हैं|

चंद्रशेखर आजाद
सहारनपुर, यूपी में जन्में चंद्रशेखर आजाद 'अम्बेडकरवादी' विचारधारा के साथ भीम आर्मी के सह-संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पेशे से यह एक वकील और दलित-बहुजन अधिकार कार्यकर्ता हैं। फरवरी 2021 में, टाइम पत्रिका ने उन्हें 'भविष्य को आकार देने वाले 100 उभरते नेताओं' की अपनी वार्षिक सूची में शामिल किया है| वैसे चंद्रशेखर आजाद की कोई राजनीतिक विरासत नहीं रही है|

संगठन- भीम आर्मी
राजनीतिक दल- आजाद समाज पार्टी

आज़ाद ने अपने नाम के साथ 'रावण' जोड़े जाने पर क्या कहा
अपने नाम के साथ 'रावण' का संबोधन क‍िए जाने के सवाल पर भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने कहा क‍ि वे नहीं चाहते कि कोई भी उन्हें रावण कहकर बुलाए। व्‍यक्‍त‍ि का नाम नहीं उसका चरित्र मायने रखता है। वे मानते हैं कि सिर्फ और सिर्फ मेहनत और ईमानदारी के दम पर ही राजनीति में लंबा सफर तय किया जा सकता है।

आज़ाद पार्टी की सक्रियता
आजाद ने खुद को दलित आइकन के रूप में स्थापित किया है और वह अपनी इसी शैली के लिए जाने जाते हैं। आजाद और उनके समर्थकों ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में विरोध प्रदर्शन किया, जहां यूपी के हाथरस की एक 19 वर्षीय महिला की सामूहिक बलात्कार के बाद मौत हो गई थी जिसके लिए दोषियों को मौत की सजा देने की मांग की। फिर
आजाद अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ दिल्ली-गाजीपुर सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों में शामिल हो गए और मांग की कि नए कृषि कानूनों को तुरंत वापस लिया जाए।

भीम आर्मी की स्थापना
2014 में भीम आर्मी की स्थापना आजाद, सतीश कुमार और विनय रतन सिंह ने की, जो एक ऐसा संगठन है जो भारत में शिक्षा के माध्यम से दलितों की मुक्ति के लिए काम करता है। पार्टी की अधिकांश लोकप्रियता दलित और अनुसूचित जनजातियों से आती है| यह पश्चिमी यूपी में दलितों के लिए मुफ्त स्कूल चलाता है। 2019 के चुनाव में मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ने की योजना बनाई, लेकिन बाद में सपा / बसपा गठबंधन को समर्थन देने और निर्वाचन क्षेत्र में दलित वोट के बंटवारे को रोकने के अपने प्रस्ताव को वापस ले लिया।

2020 बिहार विधानसभा चुनाव में भूमिका
आज़ाद ने अपना करियर भीम आर्मी के नेता के रूप में शुरू किया जो यूपी में स्थित एक संगठन है लेकिन बाद में चुनावी राजनीति में भाग लेने के लिए आज़ाद समाज पार्टी का गठन किया। पार्टी ने 2020 के बिहार विधान सभा चुनाव में बिहार की हर सीट पर चुनाव लड़ने की योजना बनाई। चंद्रशेखर आजाद रावण ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 लड़ने के लिए अन्य क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के साथ राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के नेतृत्व वाले प्रगतिशील जनतांत्रिक गठबंधन (पीडीए) में शामिल होने की घोषणा की।


आजाद समाज पार्टी में शामिल हुए अन्य दलों के नेता
समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस और आरएलडी के 98 नेताओं और कई पूर्व मंत्रियों 'आजाद समाज पार्टी' में शामिल हुए|

यूपी में क‍िसके साथ करेंगे गठबंधन
यूपी व‍िधानसभा चुनाव में गठबंधन के सवाल पर चंद्रशेखर आजाद ने कहा क‍ि अगर समाजवादी पार्टी उनके साथ चुनाव लड़ना चाहती है तो उन्हें (एसपी) बड़ा दिल दिखाना होगा। उन्‍होंने कहा क‍ि आजाद समाज पार्टी जिस किसी के साथ गठबंधन करेगी तो वो कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर होगा। भीम आर्मी प्रमुख ने कहा क‍ि प्रदेश में दलित की आबादी 30 प्रत‍िशत है। ऐसे में जो पार्टी हमें सही रिप्रेंजेटेशन देगी हम उसके साथ जाएंगे।

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