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पूनम सिन्हा ने सपा ज्वाइन करते ही दिया बयान, राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने पर सपा ने कहा यहा

शत्रुघ्न सिन्हा के कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद उनकी पत्नी पूनम सिन्हा के सपा के टिकट पर लखनऊ से भाजपा प्रत्याशी राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

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लखनऊ

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Abhishek Gupta

Apr 16, 2019

Rajnath Poonam

Rajnath Poonam

लखनऊ. सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। और कहा जा रहा है कि वो भाजपा प्रत्याशी राजनाथ सिंह के खिलाफ सपा के टिकट पर लखनऊ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी। हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा होना अभी बाकी है, लेकिन उनका लखनऊ से चुनाव लड़ना लगभग तय है। शत्रुघ्न सिन्हा के हाल ही में भाजपा से कांग्रेस में शामिल होने के बाद यह तय हो गया था कि उनकी पत्नी पूनम सपा ज्वाइन करेंगी और लखनऊ से चुनाव लड़ेंगी। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी शत्रुघ्न सिन्हा से इस सिलसिले में संपर्क में थे। जिसमें यह तय किया जा रहा था कि कांग्रेस इस सीट पर सपा का समर्थन देगी। पूनम सिन्हा ने सपा ज्वाइन करते ही अपने मंसूबे भी साफ किए हैं।

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पूनम सिन्हा ने कहा यह-

पूनम सिन्हा ने सपा ज्वाइन करते हुए मंगलवार को कहा कि चुनाव लड़ने पर पार्टी से बातचीत हो रही है। मजबूती की साथ ही चुनाव लड़ा जाएगा। आपको बता दें पूनम सिन्हा ने अपने करियर की शुरुआत 70 के दशक में माॅडलिंग से की थी। 1968 में मिस यंग इंडिया का खिताब जीतने के बाद उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा था। उसके बाद वे बॉलीवुड में आ गईं।

सपा नेता ने कहा- 18 अप्रैल को करेंगी नामांकन

पूर्व मंत्री व समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मेहरोत्रा ने तो यह तक साफ कर दिया कि वो 18 अप्रैल को नामांकन दाखिल करेंगी, जिससे पहले राजनाथ सिंह से भी बड़ा रोड शो होगा। उन्होंने साथ ही यह भी दावा किया कि पूनम भाजपो को हरा देंगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से अपील की गई है कि वह लखनऊ से कोई प्रत्याशी ने उतारे।

लखनऊ है भाजपा का गढ़-

लखनऊ भाजपा का मज़बूत गढ़ माना जाता है और यहां से दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी सांसद रहे हैं। भाजपा लगातार लखनऊ सीट पर काबिज रही है और हर चुनाव में पार्टी ने विरोधी दलों के दांत खट्टे किए हैं। इसी कारण सपा-बसपा, कांग्रेस के लिए इस बार भी कड़ी चुनौती है कि वह किसे लखनऊ से चुनावी मैदान में खड़ा करे। ब्राह्मण चेहरे के रूप में राजनाथ सिंह ने बीते चुनाव में प्रतिद्वंदियों को बड़े अंतर से हराया था। 2014 में उन्हें यहां पर 5.5 लाख से अधिक वोट मिले थे। वहीं दूसरे स्थान पर कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी रही थीं जिन्हें 2, 88,357 वोट मिले थे। इस बार उनके खिलाफ कांग्रेस ने अपने ब्राह्मण चेहरे जितिन प्रसाद को चुनाव लड़ाने का ऐलान कर दिया था, लेकिन जितिन ने आलाकमान को मना कर अपनी पूर्व की संसदीय सीट धौरहरा को वापस मांग लिया।

पूनम सिन्हा हैं सिंधी-

शत्रुघ्न सिन्हा कायस्थ हैं वहीं पूनम सिन्हा सिंधी हैं। लखनऊ में तीन लाख से अधिक कायस्थ वोटर हैं और 1.3 लाख सिंधी वोटर्स हैं। इसके अलावा 3.5 लाख मुस्लिम वोटर्स हैं। ऐसे में पूनम सिन्हा को कमजोर नहीं माना जा सकता। हालांकि बीजेपी नेताओं का कहना है कि लखनऊ भाजपा का गढ़ रहा है और यह आगे भी रहेगा। बाहर से लाया गया किसी भी उम्मीदवार का लखनऊ के वोटरों पर कोई असर नहीं पाड़ने वाला है। लेकिन जातीय समीकरण की बात करें तो पासा पलट सकता है।

लखनऊ में यह है जातिय समीकरण-

लखनऊ का जातीय समीकरण देखा जाए तो यहां अनुसूचित जाति की आबादी 14.3% तो वहीं अनुसूचित जनजाति 0.2% है। ब्राह्मण और राजपूत की कुल आबादी करीब 18 प्रतिशत है। ओबीसी 28 फीसदी तो वहीं मुस्लिम मतदाता- 18 फ़ीसदी है।