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लखीमपुर कांड में खुलासा- ‘अंकित से बोला था आशीष चलो सबक सिखाते हैं,’ किस होटल में 2 दिन तक रुके? CCTV जब्त, स्टाफ से भी पूछताछ

लखीमपुर हिंसा मामले में पुलिस गिरफ्तार हो चुके आशीष मिश्रा और अंकित दास से पूछताछ कर रही है। जिसमें अंकित दास से जुड़ी बातों के आधार पर शुक्रवार को कई खुलासे हुए। वहीं अंकित दास के फ्लैट पर पिस्टल और रिपीटर गन भी बरामद हुई है। पुलिस से जुड़े सूत्रों के अनुसार अंकित दास ने बताया कि घटना के दौरान आशीष से क्या क्या बातचीत हुई। कब पहुंचे होटल। उसी आधार पर छापेमारी करते हुए कई महत्वपूर्ण तथ्य जुटाए गए हैं।

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लखनऊ

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Dinesh Mishra

Oct 15, 2021

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. लखीमपुर हिंसा के आरोपी अंकित दास के फ्लैट से पुलिस ने एक पिस्टल और रिपीटर गन बरामद की है। पिस्टल का लाइसेंस अंकित दास के नाम पर है, वहीं रिपीटर गन का लाइसेंस उसके बॉडीगार्ड लतीफ उर्फ काले के नाम पर है। घटना के बाद वो दो दिन तक जिस होटल में रुका था। वहाँ उससे कौन कौन मिलने आया। किससे क्या बात हुई इस पर बी एसआईटी ने गहन पूछताछ की। आवास की तलाशी और बरमदगी के बाद एसआईटी होटल सागर पहुंची। जहां अंकित दो दिनों तक ठहरा हुआ था। वहीं एसआईटी को उम्मीद है कि होटल से उसे काफी सुराग मिलेंगे। इसलिए उसने ‘होटल सागर सोना’ के सीसीटीवी और डीवीआर को जब्त कर लिया है। साथ ही होटल के स्टाफ को पूछताछ के लिए अलग से बुलवाया गया है।

अंकित से बोला था आशीष चलो सबक सिखाते हैं

अंकित ने पूछताछ के दौरान बताया था कि वारदात के पहले वो आशीष मिश्रा से मिला था। प्रदर्शनकारी किसानों के बारे में बताने पर आशीष ने कहा था कि चलो उन्हें सबक सिखाते हैं। अंकित दास ने एसआईटी से बताया कि थार के पीछे मैं काली फाच्र्यूनर में था जिसे शेखर भारती चला रहा था। उसने बताया कि आगे चल रही जीप किसानों को कुचलते हुए आगे निकल गई।

किसानों पर की थी फायरिंग

वहीं, पूछताछ के दौरान काले ने बताया था कि आगे चल रही थार गाड़ी को हरिओम चला रहा था और उसके पायदान पर दो लोग खड़े थे. वहीं जिस गाड़ी में अंकित था उसे शेखर भारती चला रहा था। काले ने ये भी बताया था कि किसानों के घिरने पर उसने उन पर फायरिंग की थी।

एसआईटी ने जुटाए 39 वीडियो

वहीं इस मामले में पुलिस की विवेचना अब तेज हो गयी है। पुलिस ने अब तक 39 वीडियो साक्ष्य एकत्र किए हैं। इनमें घटनास्थल के वीडियो से लेकर सीसीटीवी फुटेज भी शामिल हैं। पुलिस अभी भी इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों के संकलन में तेजी से लगी है। डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल की अगुवाई में बनी जांच कमेटी हर बिंदु पर जांच करने में जुटी है। इलेक्ट्रानिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक/बैलिस्टिक जांच रिपोर्ट का अलग-अलग मिलान किया जा रहा है।

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