
देश-दुनिया में बनारस कई चीजों के लिए मशहूर है। उन्हीं में एक है आम की प्रजाति बनारसी लंगड़ा। यह प्रसिद्ध किस्म कभी वाराणसी जिले में छह हजार हेक्टेयर तक फैली थी लेकिन समय के साथ इसकी उपज सिमटती गई। फिलहाल तकरीबन 1700 हेक्टेयर में बनारसी लंगड़ा की उपज होती है।

मीठी-मीठी सुंगध, हरे रंग का लंगड़ा आम मई से अगस्त तक उपलब्ध होता है। इसकी सबसे ज्यादा पैजावार बनारस के चिरईगांव में होती है। आराजीलाइन, काशी विद्यापीठ, हरहुआ, बड़ागांव, सेवापुरी सहित आठों ब्लॉकों में इसके बगान हैं।

लंगड़ा आम का इतिहास 250-300 साल पुराना है। ऐसा माना जाता है कि बनारस में एक लंगड़ा आदमी रहता था जो तरह-तरह के आम खाता था और बीज को अपने घर के पीछे बो देता था। आमों की पैदावार खूब हुई, बाजार में इसे बिक्री के लिए भेजा जाने लगा। आम का स्वाद लोगों को खूब पंसद आया। धीरे-धीरे ये आम लंगड़ा आम के नाम से मशहूर हो गया।