
एक शादी के लिए दुल्हा और दुल्हन सबसे जरूरी इन्ग्रीडियंट्स हैं। ऐसा आपको लगता होगा, लेकिन गे मैरेज और लेस्बियन मैरिज ने इस बात को गलत साबित कर दिया है। यानी शादी के लिए महिलाओं को अब पुरुषों की जरूरत नहीं और पुरुषों को महिलाओं की नहीं।
आज हम यूपी की कुछ ऐसी ही लड़कियों की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने एक दूसरे से शादी कर ली। आइये जानते हैं यूपी की ऐसी ही तीन शादियों और शादी के बाद आई चुनौतियों के बारे में ।
लेस्बियन लव पर बात करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि गुरुवार को केरल में एक मुस्लिम लेस्बियन कपल ने शादी की है। इस शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हैं और खूब चर्चा हो रही है। इस कपल को जुदा करने की काफी कोशिशें की गई थीं लेकिन केरल कोर्ट ने इनके पक्ष में फैसला दिया।
पहली कहानी
कहानी यूपी के कोमल और पिंकी की है। ये दोनों ही बदला हुआ नाम है। दोनों ने साल 2018 में शादी की, लेकिन दोनों को अपने परिवार वालों से ही खतरा हो गया। इस जोड़े ने 2019 में पुलिस से सुरक्षा मांगी। पुलिस ने दोनों का साथ दिया , कोमल और पिंकी फिल्हाल साथ रह रही हैं।
दूसरी कहानी
दूसरी कहानी उन्नाव के अजगैन की है। साल 2018 में उन्नाव की रिया मुंबई चली गई। ये एक बदला हुआ नाम है। रिया ने मुंबई में अपनी मासी से शादी कर ली। परिवार वालों को जब ये पता चला तो मुंबई में रहने वाले अपने बेटों को इसकी खबर दी। भाई अपनी बहन पर रिश्ता खत्म करने का दबाव बनाने लगे। दोनों लड़कियों ने इसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इस बीच पिता ने अजगैन पुलिस को तहरीर दी।
पुलिस ने मुंबई पुलिस से जानकारी ली जिसमें ये पता चला कि दोनों लड़कियाें बालिग हैं। ऐसे में अजगैन पुलिस ने भी कोई भी कार्रवाई करने से मना कर दिया।
हमीरपुर मुख्यालय के रजिस्ट्रार कार्यालय में दोनों लड़कियों ने सबके सामने एक-दूसरे से शादी कर ली। दोनों ने अपनी शादी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया।
तीसरी कहानी
बुंदेलखंड की ये कहानी साल 2019 की है। दोनों को कॉलेज के टाइम में एक दूसरे से प्यार हो गया, लेकिन दोनों के परिवार वालों ने उनकी शादी कहीं और करा दी।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शादी के छह साल बाद दोनों ने अपने पति को तलाक दे दिया है। दोनों अभी साथ रहने के लिए कानूनी लड़ाई भी रह रही हैं।
ऊपर बताई गई कहानियों से ये पता चलता है कि लेसबियन कपल को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना अपने ही परिवार वालों से करना पड़ रहा है।
अपने ही घर में क्यों लड़ाई लड़ रही हैं लेस्बियन कपल
आज युवा समलैंगिकता को स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन घर और परिवार के लोग ऐसे रिशते को नहीं मानते हैं। शहरी इलाकों में सोशल मीडिया और कई कॉर्पोरेट पहलों ने एलजीबीटी अधिकारों के बारे में जागरुकता तो फैलाई है। ग्रामीण इलाकों के परिवार वाले LGBT रिशतों को अपने नजरिए से ही देखते हैं। कई कुछ इलाकों में ऐसे रिश्तों की वजह से ऑनर किलिंग जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी है।
वैजयंती वसंत मोगली, एक ट्रांसवुमन हैं, LGBT एक्टिविस्ट हैं और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, हैदराबाद में पब्लिक पॉलिसी स्कॉलर हैं। वैजयंती वसंत मोगली ने मिंट को बताया कि मां बाप अपनी एलजीबीटी संतानों को स्वीकार नहीं करती है। उनका बच्चा जैसे ही समलैंगिक की तरह बर्ताव करना शुरू करता है वो अपने ही मां बाप को नापंसद आने लगता है।
2009 में समलैंगिक संबध लीगल बनाया गया
धारा 377 को खत्म करने के साल 2009 में नाज़ फाउंडेशन ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक मुकदना दायर किया। नाज फाउडेंशन ने सहमति से एक साथ रहने वाले लेसबियन या गे के संबधों को वैध बनाने की मांग की। फाउंडेशन की मांग पर दिल्ली कोर्ट ने SAME SEX SECTOION 377 को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया।
2018 में समलैगिकता को पूरी तरह से मिली मान्यता
6 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में ये कहा कि 377 असंवैधानिक है।
आईपीसी की धारा 377 के तहत समलैंगिकता अपराध
आईपीसी की धारा 377 के तहत अंग्रेजी शासन के दौरान साल 1861 में समलैंगिकता को अपराध घोषित किया गया था। इसे अप्राकृतिक अपराध करार दिया गया और कहा गया कि जो भी अपनी मर्जी से किसी पुरुष, महिला या जानवर से प्रकृति के नियमों के खिलाफ जाकर शारीरिक संबंध बनाएगा, उसे आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी। दशकों तक इसे अपराध माना गया और इस वजह से समलैंगिक समाज अपनी भावनाओं का गला घोंटता रहा।
यूपी की ये लेसबियन कपल तो अपनी लड़ाई लड़ रही हैं, कुछ ने शादी भी कर ली है। इनका जीवन कितने सुकून से बीत रहा है ये एक अहम सवाल है। जिसका जवाब हम सबको तलाशने की जरूरत है।
Published on:
01 Dec 2022 07:40 pm
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