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अयोध्या के राम मंदिर के डिजाइन-वास्तुकला को अंतिम रूप देने में मदद करेंगी लखनऊ की यह मशहूर ऑर्किटेक, नाम तो जानते ही हैं आप

राजधानी लखनऊ के लिए बड़ी खुशखबरी है। जानी-मानी वास्तुकार व ऑर्किटेक कॉलेज लखनऊ की प्रिंसिपल वंदना सहगल को अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर के डिजाइन और वास्तुकला को अंतिम रूप देने के लिए निर्णायक मंडल में एक सदस्य के रूप में नामित किया गया है।

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अयोध्या के राम मंदिर के डिजाइन-वास्तुकला को अंतिम रूप देने में मदद करेंगी लखनऊ की यह मशहूर ऑर्किटेक, नाम तो जानते ही हैं आप

अयोध्या के राम मंदिर के डिजाइन-वास्तुकला को अंतिम रूप देने में मदद करेंगी लखनऊ की यह मशहूर ऑर्किटेक, नाम तो जानते ही हैं आप

लखनऊ. राजधानी लखनऊ के लिए बड़ी खुशखबरी है। जानी-मानी वास्तुकार व ऑर्किटेक कॉलेज लखनऊ की प्रिंसिपल वंदना सहगल को अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर के डिजाइन और वास्तुकला को अंतिम रूप देने के लिए निर्णायक मंडल में एक सदस्य के रूप में नामित किया गया है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई के पहले सप्ताह में राम मंदिर का शिलान्यास करेंगे। जिस वजह से राज्य सरकार मुस्तैद हो गई है।

ऑर्किटेक कॉलेज लखनऊ की प्रिंसिपल वंदना सहगल ने कहा कि हां, मुझे सदस्य जूरी नियुक्त किया गया था, पर मंदिर निर्माण योजनाओं को साझा करने से साफ-साफ इनकार कर दिया। लॉकडाउन के दौरान, वंदना सहगल पहली ऐसी वास्तुकार है जिन्होंने कलाकृतियों की आभासी प्रदर्शनी शुरू की और दुनियाभर से वाहवाही लूटी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर केंद्र सरकार की बनाई संस्था श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को जूरी वास्तुकारों के चयन के साथ राममंदिर को अंतिम रूप देने में मदद करेगा। केंद्र ने मंदिर के डिजाइन और वास्तुकला को अंतिम रूप देने के लिए वंदना सहगल को एक जूरी सदस्य के रूप में नामित किया है। वंदना सहगल मंदिर के लिए वास्तुकारों का भी चयन करेगी।

आर्किटेक्चर कॉलेज की जिम्मेदारी निभाने के साथ वंदना सहगल वास्तुकला परिषद की सदस्य हैं, इसके अतिरिक्त वास्तुकला से जुड़े कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संस्थानों के साथ जुड़ी हुईं हैं। सरकार ने चार जूरी सदस्यों की टीम बनाई है, जिसमें से वंदना सहगल को स्वतंत्र सदस्य के रूप में नामित किया गया है। जबकि अन्य सभी सदस्य सरकार की ओर से हैं।