
बर्रा अपहरणकांड में अपहृत संजीत की हत्या, नाराज सीएम योगी ने एएसपी व सीओ को किया निलंबित, एडीजी को सौंपी जांच
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में अपराध की घटनाएं चरम पर पहुंच गई है। इन अपराधों को नियंत्रण में रखने में यूपी पुलिस पूरी तरह नाकाम हो रही है। जिस वजह से सीएम योगी की सरकार की काफी छीछालेदर हो रही है। विपक्ष रोजाना कानून व्यवस्था को लेकर ताने मार रहा है। कानपुर के बिकरू कांड, फिर लैब टेक्नीशियन की अपहरण-हत्या व गाजियाबाद में पत्रकार की हत्या मामले प्रदेश सहित पूरे देश में चर्चा में रहे। करीब एक माह बाद अचानक खुलासा हुआ कि बर्रा अपहरणकांड में अपहृत लैब टेक्नीशियन संजीत की हत्या कर दी गई है। हत्या उसके दोस्तों ने ही की थी। अभी तक उसका शव बरामद नहीं हुआ है। इसमें कानपुर पुलिस की भूमिका काफी संदिग्ध है। अपराध की इन बेलगाम घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी ने यूपी पुलिस विभाग से अपनी नाराजगी जाहिर की। नाराज सीएम योगी आदित्यनाथ ने सख्त कदम उठाते हुए आज अपर पुलिस अधीक्षक, दक्षिणी कानपुर नगर, आईपीएस अपर्णा गुप्ता और मनोज गुप्ता तत्कालीन सीओ को निलंबित कर दिया। इसके अलावा पूर्व प्रभारी निरीक्षक थाना बर्रा रणजीत राय और चौकी इंचार्ज राजेश कुमार को निलंबित कर दिया है। यही नहीं अपहरण की घटना में फिरौती के लिए पैसे दिए गए या नहीं? इस संबंध में एडीजी, पुलिस हेडक्वार्टर्स लखनऊ बीपी जोगदंड को तत्काल कानपुर पहुंचकर जांच के लिए निर्देश दिए गए है।
एएसपी व तत्कालीन सीओ निलंबित :- उत्तर प्रदेश में बिगड़ी कानून-व्यवस्था पर सीएम योगी आदित्यनाथ के तेवर आज सीएम आवास पर कोरोना वायरस की समीक्षा बैठक में ही दिख गए थे। पुलिस तथा अपराधियों की साठ-गांठ के कई मामले सामने आने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ का पारा चढ़ गया। सीएम योगी के कानपुर मामले में लिए गए एक्शन के बाद उनके तेवर देखकर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि सूबे के पुलिस महकमे में एक बड़ा फेरबदल जल्दी होगा। साथ ही कई जिलों लापरवाही बरतने के दोषी पुलिसवालों पर बड़ी कार्रवाई तय है। शुक्रवार को सीएम योगी ने कानपुर बर्रा कांड में एएसपी अपर्णा गुप्ता और तत्कालीन सीओ मनोज गुप्ता निलंबित कर दिया। एडीजी पीएचक्यू बीपी जोगदंड को जांच सौंपी गई।
बर्रा अपहरणकांड में अपहृत संजीत की हत्या :- करीब एक माह की छानबीन के बाद बर्रा अपहरणकांड में अपहृत लैब टेक्नीशियन संजीत की हत्या का खुलासा हुआ है। अभी तक उसका शव बरामद नहीं हुआ है। यह हत्या उसके दोस्तों ने ही की थी। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अपहरण के चार दिन बाद हत्याकर शव पांडु नदी में फेंक दिया। फिर अपहरणकर्ताओं ने परिजनों से फिरौती मांगी। पुलिस टीम शव की तलाश कर रही है। पुलिस इस मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है। और पूछताछ जारी है। मौत की सूचना के बाद परिजनों का बुरा हाल है।
शव की तलाश के लिए टीम गठित :- एसएसपी दिनेश कुमार ने बताया कि बर्रा थाना पर 23 जून को अपहरण की शिकायत दर्ज हुई थी, 26 को एफआईआर दर्ज की गई थी। अपहरणकर्ताओं ने 29 जून को फिरौती के लिए परिजनों को फोन किया। इसक बाद टीम गठित की गई, इस टीम ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया, जिसमें उसके दोस्त और संजीत के साथ दूसरी पैथोलॉजी में काम कर चुके लोग शामिल हैं। एसएसपी ने बताया कि इन आरोपियों ने स्वीकारा की उन्होंने ही संजीत की 26 या 27 जून को हत्या कर दी थी, और पांडु नदी में शव को बहा दिया। शव की तलाश के लिए टीम गठित कर दी गई है। मोबाइल और मोटरसाइकिल की बरामदगी के लिए भी जानकारी की जा रही है। बर्रा मामले में कानपुर पुलिस पर आरोप भी लगे हैं कि उसने अपहृत युवक के परिजनों से अपहरणकर्ताओं को 30 लाख रुपए भी दिलवाए हैं।
एक नया गुंडाराज आया है : प्रियंका गांधी
उत्तर प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था पर सीएम योगी को आइना दिखते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने शुक्रवार को अपने ट्विट में लिखा कि उप्र में कानून व्यवस्था दम तोड़ चुकी है। आम लोगों की जान लेकर अब इसकी मुनादी की जा रही है। घर हो, सड़क हो, ऑफिस हो कोई भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करता। प्रियंका गांधी ने अपने ट्विट में आगे लिखा कि, विक्रम जोशी के बाद अब कानपुर में अपहृत संजीत यादव की हत्या। खबरों के मुताबिक पुलिस ने किडनैपर्स को पैसे भी दिलवाए और अब उनकी हत्या कर दी गई। एक नया गुंडाराज आया है। इस जंगलराज में कानून-व्यवस्था गुंडों के सामने सरेंडर कर चुकी है।
बीएसपी की मांग, तुरंत हरकत में आए सरकार : मायावती
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने ट्विट पर लिखा कि, यूपी में जारी जंगलराज के दौरान एक और घटना में कानपुर में अपहरणकर्ताओं द्वारा संजीत यादव की हत्या करके शव को नदी में फेंक दिया गया जो अति-दुःखद व निन्दनीय। प्रदेश सरकार खासकर अपराध-नियंत्रण व कानून-व्यव्स्था के मामले में तुरन्त हरकत में आए, बीएसपी की यह मांग है।
अपहरण भाजपाराज के शर्मनाक क्षरण का प्रतीक : अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को अपने ट्विट पर लिखा कि कानपुर से अपहृत युवक का अब तक कोई पता नहीं चला है, उप्र का शासन एवं पुलिस प्रशासन दोनों इस मामले में पूरी तरह से निष्क्रिय क्यों हैं? आशा है युवक सही सलामत अपने परिवार तक पहुँच पायेगा। ये अपहरण भाजपा के राज के शर्मनाक क्षरण का प्रतीक है।
बहन बोली- अपहर्ताओं तक नहीं पहुंचे 30 लाख तो पुलिस खा गई होगी
कानपुर. लैब असिस्टेंट संजीत यादव का अपहरण करने वालों ने 30 लाख रुपये की मांग की थी। पुलिस के भरोसे पर परिवार गहने-जेवर बेचकर 30 लाख की फिरौती जुटाया और फिरौती दे दी गयी। लेकिन पुलिस अगवा युवक को नहीं बचा पायी। संजीत यादव की बहन ने कहा कि पुलिस शुरुआत से लापरवाही कर रही थी। अब तक पुलिस को संजीत का बैग नहीं मिला है। अभी तक हमें उसकी लाश नहीं मिली है। हमें बॉडी तो दिखा दो, आखिरी बार उसकी कलाई पर राखी तो बांध लूं। संजीत यादव की बहन ने कहा कि पहले बर्रा के थाना इंचार्ज रणजीत राय ने कहा, फिर मैं साउथ मैडम के पास गई थी, तो मैडम ने कहा कि जाइए पैसे की व्यवस्था कीजिए, पैसा नहीं जाएगा और बच्चा वापस आ जाएगाञ उनके कहने पर हमने फिरौती की रकम दी थी। संजीत यादव की बहन ने कहा कि पुलिस की लापरवाही के कारण भाई की हत्या हुई है। आईजी, डीआईजी सबके संज्ञान में मामला था, लेकिन सबने लापरवाही की। पुलिस अधिकारियों के लिए यह छोटी सी बात थी। मेरे मां-बाप के लिए इकलौता सहारा था। उन सब लोगों के लिए यह छोटी सी बात थी।
चार पुलिस अफसरों के निलंबन पर संजीत यादव की बहन ने कहा कि इन लोगों के निलंबन से कुछ नहीं होने वाला है। आज इन्होंने मेरे साथ ऐसा किया, लेकिन किसी और के साथ करेंगे, कल कोई और बहन रोएगी। सभी पुलिसकर्मियों को जेल भेजा जाए। मेरे भाई के हत्यारों को फांसी दी जाए। संजीत यादव की बहन ने कहा कि सरकार से अपील है कि मेरे सामने मेरे भाई के दोषियों को फांसी दी जाए। मेरे भाई का कोई दोष नहीं था। मैंने अपहरणकर्ताओं से पूछा था कि तुमने मेरे भाई को क्यों मारा, तो उन्होंने कहा कि मेरा भाई उन्हें पहचान गया था, इसलिए मार दिया।
Published on:
24 Jul 2020 05:03 pm
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