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गोवंश के लिए सीएम योगी ने किया ऐसा काम, 65 साल में कोई सीएम न कर सका

योगी का गौप्रेम-अवैध रूप से गोवंश को ले जाने वाले का नाम और फोटो होगी सार्वजनिक-गोवंश मारने पर 10 साल की जेल, 7 लाख का जुर्माना-गोवंश की जब्ती पर चारे का भी करना होगा इंतजाम-अब रुक सकेगीं यूपी में पूरी तरह से गोकशी की घटनाएं

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गोवंश के लिए सीएम योगी ने किया ऐसा काम, 65 साल में कोई सीएम न कर सका

गोवंश के लिए सीएम योगी ने किया ऐसा काम, 65 साल में कोई सीएम न कर सका

पत्रिका इन्डेप्थ स्टोरी
महेंद्र प्रताप सिंह

लखनऊ. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गौप्रेम जगजाहिर है। वे अपने भाषणों में गौहत्या रोकने की बात करते रहे हैं। 65 साल बाद उनकी सरकार ने गौहत्या को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने के लिए कड़े कानून की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं। यूपी में अब गोकशी या तस्करी पर 10 साल की जेल होगी। साथ ही 5 लाख तक का जुर्माना भी भरना होगा। दोबारा अपराध करने पर यह सजा दोगुनी हो जाएगी। इसके साथ ही गोवंश तस्करों की फोटो और नाम भी सार्वजनिक कर दिए जाएंगे। गोवंश से जुड़े अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे। इस तरह के कड़े प्रावधानों के लिए राज्य सरकार उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 लाएगी। कैबिनेट ने इसके मसौदे को मंजूरी दे दी है।

गोवंश संरक्षण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है। यही वजह है कि उनके कार्यभार को संभालते ही गोवध, अवैध बूचडख़ानों पर रोक ओर गो संरक्षण के लिए अनेेक कदम उठाए गए। इसके तहत कांजी हाउसों का निर्माण, गो आश्रयशालाओं के लिए भारी-भरकम बजट और कई अन्य तरह के प्रावधान किए गए। गोतस्करी पर रोक लगी तो आवारा गोवंश का मुद्दा भी उठा। राजनीतिक दलों ने इसे तूल देने की कोशिश भी की। लेकिन इन सबसे बेपरवाह योगी आदित्यनाथ गोवंश संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध दिखे। यही वजह यह कि राज्य सरकार अब प्रदेश के 65 साल पुराने गोवध निवारण एक्ट में व्यापक बदलाव करने जा रही है। इस कानून के लागू होने के बाद यूपी में गोकशी या तस्करी करने पर सख्त सजा मिलेगी।

गोवंश पर देश का सबसे सख्त कानून :- कैबिनेट ने जो मसौदा तैयार किया है उसे पहले दोनों सदनों में पास कराया जाएगा फिर इसे राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद यह कानून का रूप ले लेगा। अभी यूपी में गोवंश संरक्षण का जो कानून लागू है वह 1955 में बना था। तब से लेकर अब तक इस एक्ट में कई बदलाव हुए लेकिन फिर भी यूपी में गोकशी या तस्करी पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लग सका। राज्य सरकार ने इस एक्ट में जिन बदलावों पर ज्यााद जोर दिया है उनमे दंड और जुर्माने का बढ़ाया जाना प्रमुख है। अभी तक गोवंश को नुकसान पहुंचाने के लिए सजा का प्रावधान नहीं था लेकिन अब इसमें एक से सात साल की सजा का प्रावधान किया जा रहा है। इसके साथ ही यदि दोबारा अपराध होता है तो 10 साल तक की जेल हो सकेगी। इसके साथ ही 5 लाख जुर्माने का भी प्रावधान है। अध्यादेश के मुताबिक दोबारा दोषी पाए जाने पर दोगुनी सजा होगी। अभी तक यूपी गोवध निवारण अधिनियम में गोवंश के वध या इस नियत से तस्करी करने पर न्यूनतम सजा का प्रावधान नहीं था। लेकिन अब गोकशी पर अधिकतम 10 साल की जेल और पांच लाख जुर्माना होगा। गाय या गोवंश के अंगभंग करने पर भी न्यूनतम एक साल की जेल और एक लाख जुर्माना देना होगा।

तस्करी के लिए गोवंश जब्ती पर देना होगा भरण पोषण:- प्रस्तावित कानून में यह भी प्रावधान किया जा रहा है कि अगर तस्करी के लिए ले जाया जा रहा गोवंश जब्त किया जाता है तो एक साल तक उसके भरण पोषण के खर्च की वसूली भी अभियुक्त से ही की जाएगी। यही नहीं गाय के बछड़े या बछिया को भी भरण पोषण का खर्च देना होगा। साथ ही गोवंश या मांस को ढोने वाले वाहन, उनके मालिक और चालक भी तब तक दोषी माने जाएंगे जब तक वे यह साबित न कर दें कि उन्हें प्रतिबंधित मांस की जानकारी नहीं थी।

65 साल पहले बना था कानून :- उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम, 1955 में बना था। लेकिन, इसको 6 जनवरी, 1956 को पहली बार प्रदेश में लागू किया गया था। इसी इसकी नियमावली बनायी गयी। फिर 1958, 1961, 1979 और 2002 में इस अधिनियम में संशोधन किया गया। नियमावली में भी 1964 और 1979 में संशोधन हुआ था। लेकिन, इसके बाद भी अधिनियम में कुछ ऐसी कमियां थीं जिनका लाभ उठाकर गोवंश तस्कर अवैध रूप से बूचडख़ानों को इन्हें बेचते रहे। अवैध गोवध और गोवंशीय पशुओं के अनियमित परिवहन की शिकायतों के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस एक्ट में व्यापक बदलाव किया।

अब आसानी ने नहीं मिलेगी जमानत :- उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम, 1955 (यथासंशोधित) की धारा-8 में गोकशी की घटनाओं पर अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान है। लेकिन, इस तरह की घटनाओं में सम्मिलित लोगों की जमानत आसानी से हो जाने के कारण मामले बढ़ रहे थे। लेकिन अब प्रस्तावित कानून में जमानत के नियम भी बहुत कठोर किए जा रहे हैं। अब तो गायों तथा उसके गोवंश के भरण-पोषण पर व्यय की वसूली भी अभियुक्त से एक वर्ष की अवधि तक अथवा गाय या गोवंश को निर्मुक्त किए जाने तक जो भी पहले हो, स्वामी के पक्ष में ही की जाएगी।

यूपी प्रिवेंशन ऑफ काऊ स्लाटर एक्ट 1955 में क्या बदलाव हुआ
सेक्शन 5 ए
-गोवंश को ले जाने संबंधी परिवहन नियम के सेक्शन 5 ए में परिवर्तन।
-अब ड्राइवर,आपरेटर या फिर वाहन स्वामी अवैध परिवहन के जिम्मेदार होंगे।
-जिस वाहन में अवैध रूप से गोवंश को परिवहन कर ले जाया जाएगा उसे जब्त कर लिया जाएगा।
-जब्त गाय और उसके बछड़े,बछिया के एक साल के चारे-पानी का खर्च ड्राइवर से वसूला जाएगा।

सेक्शन 5 बी
-अवैध गोवंश का परिवहन करते पकड़े जाने पर एक से सात साल की जेल होगी।
-एक से 3 लाख तक का जुर्माना वसूला जाएगा यदि परिवहन के दौरान गोवंश घायल हो गया या भूख से बेहाल हो गया।

सेक्शन 7 ए
-गोवंश के अवैध परिवहन में जेल भेजे गए व्यक्ति की जमानत तभी होगी जब स्पेशल पब्लिक प्रोसीक्यूटर विरोध न करे।

सेक्शन 8
-गोवंश के अवैध परिवहन के दौरान गाय के जीवन को जोखिम में डालने के लिए तीन से पांच लाख का जुर्माना होगा।
-इसके साथ ही कम से कम सात साल की जेल होगी।
-दोबारा अवैध रूप से ले जाने का दोषी पाए जाने पर जुर्माना डबल हो जाएगा।
-गोवंश का अवैध परिवहन करने वालों का नाम और फोटो सार्वजनिक किया जाएगा।

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