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Sahara Shahar: सहारा प्रमुख की पत्नी सपना राय को मकान खाली करने का आदेश, नगर निगम बोला- नहीं माने तो सील करेंगे घर

Sahara City Property Case:    लखनऊ नगर निगम और सहारा समूह की जंग नए मोड़ पर आ गई है। सहारा प्रमुख स्व. सुब्रत राय की पत्नी सपना राय को नगर निगम ने सहारा शहर स्थित उनका आलीशान मकान खाली करने का आदेश दिया है। तय समय में मकान न खाली करने पर प्रशासन सीलिंग की कार्रवाई करेगा।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Sep 29, 2025

खाली करना होगा सहारा शहर का आलीशान मकान, नगर निगम ने दी चेतावनी (फोटो सोर्स : Whatsapp )

खाली करना होगा सहारा शहर का आलीशान मकान, नगर निगम ने दी चेतावनी (फोटो सोर्स : Whatsapp )

Sahara Shahar Latest Update: लखनऊ नगर निगम और सहारा समूह के बीच लंबे समय से चली आ रही कानूनी जंग अब एक नए मोड़ पर पहुँच गई है। सहारा प्रमुख सुब्रत राय की पत्नी सपना राय को नगर निगम ने आदेश दिया है कि वे सहारा शहर स्थित अपने आलीशान मकान को खाली कर दें। नगर निगम का कहना है कि यदि समय सीमा में मकान खाली नहीं किया गया तो उसे सील कर दिया जाएगा।

नगर निगम की कार्रवाई

लखनऊ नगर निगम ने 11 सितंबर को सपना राय को औपचारिक नोटिस जारी किया था। नोटिस में स्पष्ट कहा गया कि सहारा शहर की जमीन का स्वामित्व नगर निगम के अधीन है, और सहारा इंडिया ने आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया है। शनिवार को नगर निगम ने इस कार्रवाई को एक कदम आगे बढ़ाते हुए सहारा शहर की जमीन पर अपना बोर्ड लगाकर कब्जा ले लिया और अब घर खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है।

1994 में नगर निगम ने सहारा इंडिया हाउसिंग लिमिटेड कंपनी को 170 एकड़ की जमीन आवासीय कॉलोनी विकसित करने के लिए दी थी। उद्देश्य था कि कंपनी इस जमीन पर प्लॉट, मकान और आधुनिक आवासीय योजना तैयार करेगी। लेकिन, आरोप है कि सहारा ने शर्तों का पालन नहीं किया और जमीन का प्रयोग तय उद्देश्य के अनुसार नहीं किया गया। इसी कारण 1997 में नगर निगम ने लाइसेंस और लीज डीड निरस्त करने का नोटिस जारी किया था।

कानूनी विवाद और लंबा संघर्ष

सहारा शहर की 170 एकड़ जमीन को लेकर 1997 से लगातार कानूनी लड़ाई चल रही है। सहारा समूह का तर्क रहा है कि नगर निगम की कार्रवाई अनुचित है और कॉलोनी विकसित करने का काम नियमानुसार किया गया। वहीं नगर निगम का दावा है कि जमीन का उपयोग समझौते के अनुसार नहीं किया गया और कई शर्तों का उल्लंघन हुआ है। इसी विवाद के बीच अब मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंचा है। नगर निगम ने अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए सहारा शहर पर कब्जा कर लिया है और सपना राय को आवास छोड़ने का आदेश दिया है।

सपना राय को समय सीमा, फिर सीलिंग की तैयारी

हालांकि नगर निगम ने सपना राय को आलीशान मकान खाली करने के लिए कुछ समय दिया है। यह समय सीमा कितनी होगी, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन नगर निगम ने साफ कर दिया है कि समय सीमा खत्म होने पर मकान को सील करने की कार्रवाई होगी।

नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सहारा इंडिया को यह जमीन 1994 में दी गई थी। शर्तों का पालन नहीं करने और अवैध कब्जे के चलते लाइसेंस व लीज डीड रद्द की गई थी। अब नगर निगम इस संपत्ति पर अपना नियंत्रण स्थापित कर रहा है। सपनों का मकान चाहे कितना भी आलीशान हो, कानून से ऊपर कोई नहीं।”

सहारा समूह की मुश्किलें

सहारा समूह पहले से ही वित्तीय संकट और कानूनी कार्रवाइयों से जूझ रहा है। सुब्रत राय के जीवनकाल में कई बार समूह को भारी विवादों और अदालतों के शिकंजे का सामना करना पड़ा। अब उनके निधन के बाद उनकी पत्नी सपना राय और अन्य परिवारजन समूह की विरासत संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम की ताजा कार्रवाई ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सहारा शहर का यह प्रकरण नगर निगम के पक्ष में निर्णायक रूप से खत्म होता है, तो सहारा समूह को न केवल अपनी साख का नुकसान उठाना पड़ेगा बल्कि वित्तीय संकट और गहराएगा।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

सहारा शहर, जिसे कभी आधुनिक आवासीय योजना का मॉडल बताया जाता था, अब विवादों और कानूनी लड़ाई का केंद्र बन चुका है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे वर्षों से अनिश्चितता में जी रहे हैं। एक निवासी ने कहा, “हमने यहां शांति और सुरक्षित आवास के सपने के साथ मकान लिया था। लेकिन हर बार विवाद और कानूनी लड़ाई की खबरें आती रहती हैं। अब नगर निगम का बुलडोज़र किसी भी दिन चल सकता है, जिससे हम असमंजस में हैं।”

नगर निगम की सख्त कार्रवाई से साफ है कि प्रशासन सहारा शहर मामले में अब कोई नरमी नहीं बरतेगा। अगर सपना राय मकान खाली नहीं करतीं, तो सीलिंग की कार्रवाई तय है। यह कदम न केवल सहारा समूह के लिए बड़ा झटका होगा बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में भी एक मिसाल के रूप में देखा जाएगा कि बड़ी कंपनियां भी नियमों और कानूनों से ऊपर नहीं हैं। कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में सहारा समूह को न्यायालयों में फिर से लड़ाई लड़नी होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालतें नगर निगम की इस कार्रवाई को बरकरार रखती हैं या सहारा समूह को कोई राहत देती हैं।