
विभोर राणा समेत छह आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट, विदेश में बैठे मास्टरमाइंड की तलाश तेज (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
Lucknow Cough Syrup Syndicate Case: लखनऊ में अवैध कोडीन युक्त कफ सिरप कारोबार के खिलाफ चल रही कार्रवाई में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से जांच कर रही एसटीएफ ने कफ सिरप सिंडिकेट से जुड़े छह आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इनमें सिंडिकेट से जुड़े सुपर डिस्ट्रीब्यूटर और नेटवर्क संचालित करने वाले प्रमुख आरोपी शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल जेल में बंद हैं।
एसटीएफ ने करीब छह महीने तक चली गहन विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ मजबूत और पुख्ता साक्ष्य जुटाए। जांच एजेंसी का दावा है कि पूरे नेटवर्क, पैसों के लेन-देन, सप्लाई चैन और विदेश तक फैले संपर्कों की विस्तृत जानकारी हासिल कर ली गई है।
इस हाईप्रोफाइल मामले में विभोर राणा समेत छह लोगों को आरोपी बनाया गया है। वहीं विदेश में बैठे सिंडिकेट के कथित सरगना शुभम जायसवाल और उसके सहयोगियों को भारत लाने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। एजेंसियां उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और प्रत्यर्पण की दिशा में काम कर रही हैं।
कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार का यह मामला पिछले साल उस समय सामने आया था जब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और एसटीएफ ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था।
जांच में सामने आया कि मेडिकल उपयोग के लिए बनाए जाने वाले कोडीन युक्त कफ सिरप का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया जा रहा था। इसे नशे के रूप में विभिन्न राज्यों में सप्लाई किया जा रहा था। जांच एजेंसियों ने जब नेटवर्क की तह तक पहुंचना शुरू किया तो कई बड़े नाम सामने आए। बताया गया कि यह सिंडिकेट सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क कई राज्यों और विदेशों तक फैला हुआ था। गिरोह संगठित तरीके से दवाओं की खरीद, फर्जी बिलिंग, स्टॉक ट्रांसफर और सप्लाई का काम कर रहा था।
एसटीएफ ने इस मामले की विवेचना बेहद गोपनीय और तकनीकी तरीके से की। अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजेक्शन, डिजिटल रिकॉर्ड, फर्जी दस्तावेज और सप्लाई नेटवर्क की बारीकी से जांच की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहे थे। मेडिकल सप्लाई की आड़ में अवैध कारोबार को संचालित किया जा रहा था। कई स्थानों पर फर्जी कंपनियों और एजेंसियों के माध्यम से दवाओं की खरीद-बिक्री दिखाई जाती थी। एसटीएफ ने आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की। इसके आधार पर पूरे सिंडिकेट की ट्रेल तैयार की गई। सूत्रों के अनुसार एजेंसी को ऐसे कई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिले हैं जो आरोपियों की भूमिका को मजबूत करते हैं। इन्हीं सबूतों के आधार पर अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई है।
चार्जशीट में जिन लोगों के नाम शामिल किए गए हैं उनमें विभोर राणा समेत सिंडिकेट के प्रमुख डिस्ट्रीब्यूटर और नेटवर्क ऑपरेटर बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये आरोपी कोडीन युक्त कफ सिरप की सप्लाई और वितरण में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
बताया जा रहा है कि आरोपी अलग-अलग राज्यों में दवाओं की अवैध सप्लाई कर रहे थे। कई जगहों पर मेडिकल लाइसेंस और बिलिंग सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया गया। एसटीएफ का दावा है कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जिसके आधार पर अदालत में मजबूत पैरवी की जाएगी।
मामले का सबसे बड़ा पहलू यह है कि इस सिंडिकेट का कथित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल विदेश में बैठकर पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। जांच एजेंसियों ने उसकी गतिविधियों और संपर्कों की जानकारी जुटा ली है।
एसटीएफ और अन्य एजेंसियां उसे भारत लाने की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि आरोपी विदेश में छिपा हुआ है तो उसके खिलाफ इंटरपोल और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद भी ली जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि एजेंसियां शुभम जायसवाल के आर्थिक लेन-देन और विदेशी संपर्कों की भी जांच कर रही हैं। संभावना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार कोडीन युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल तेजी से नशे के रूप में बढ़ रहा था। खासकर युवाओं के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही थी। कफ सिरप में मौजूद कोडीन का सेवन अधिक मात्रा में करने पर नशे जैसा प्रभाव होता है। इसी कारण कई गिरोह अवैध तरीके से इसकी सप्लाई कर रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सिंडिकेट समाज और युवाओं के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसलिए इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।
इस पूरे मामले ने दवा वितरण प्रणाली और मेडिकल सप्लाई नेटवर्क पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया कि कुछ स्थानों पर नियमों की अनदेखी कर दवाओं की सप्लाई की जा रही थी। स्वास्थ्य विभाग और औषधि प्रशासन अब दवा वितरण व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी में हैं। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी।
इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश करने और मजबूत चार्जशीट दाखिल करने को लेकर एसटीएफ की कार्रवाई की सराहना की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि संगठित अपराध और नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। एसटीएफ के अनुसार यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
Updated on:
07 May 2026 10:24 am
Published on:
07 May 2026 10:24 am
