
ओपी राजभर का दावा, I-PAC को हो रही थी फंडिंग, PC-ANI
समाजवादी पार्टी राजनीतिक कैंपेंन करने वाली कंपनी I-PAC से नाता तोड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इसे फंडिंग की कमी बताई। लेकिन, फंडिंग की कमी कहां से आई इस पर ओम प्रकाश राजभर ने पूरा काला चिट्ठा खोल दिया। उन्होंने X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि क्या है पूरा मामला।
ओपी राजभर ने X पर लिखा, 'आज बताता हूं, अखिलेश यादव की I-PAC को हटाने की कहानी। ममता दीदी ने I-PAC नाम की एक पॉलिटिकल स्ट्रैटजी कंपनी हायर की। उस कंपनी को काम देने के साथ ही ममता दीदी ने यूपी में सपा के लिए कॉम्प्लीमेंट्री काम करने का निर्देश दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार I-PAC की पूरी फंडिंग पश्चिम बंगला में ममता बनर्जी की सरकार में हुए 2700 करोड़ से ज्यादा के कोयला घोटाले से हो रही थी।
तमाम जांचों में यह बात सामने आई है कि हवाला के जरिए I-PAC को फंडिंग हो रही थी और ब्लैक मनी को व्हाइट किया जा रहा था। पश्चिम बंगाल के कोयला घोटाले का यही फंड हवाला के जरिए I-PAC की यूपी विंग को आना था, जो सपा के लिए चुनावी जमीन तैयार करता। अखिलेश जी के लिए दुखद घटना यह हो गई कि पश्चिम बंगाल में ममता दीदी हार गई। अब घोटाले का फंड यूपी कैसे आ सकता है, जब सरकार ही नहीं बची?
यही वजह रही कि ढाई महीने I-PAC से काम कराने के बाद अखिलेश जी ने I-PAC को नमस्ते कर दिया। जवाब दीजिए अखिलेश?
समाजवादी पार्टी (SP) ने चुनावी रणनीतियां बनाने वाली मशहूर संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के साथ अपना पेशेवर सफर आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया है। बुधवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस हाई-प्रोफाइल सहयोग के अंत की घोषणा की। इस फैसले को भारतीय राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।
मीडिया से मुखातिब होते हुए अखिलेश यादव ने उन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें इस अलगाव को राजनीतिक नाराजगी बताया जा रहा था। अखिलेश ने साफ किया कि अनुबंध (Contract) खत्म करने का फैसला पूरी तरह वित्तीय मजबूरियों के कारण लिया गया है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, एक बड़े पैमाने पर डेटा-आधारित कंसल्टेंसी को बनाए रखने के लिए भारी पूंजी की आवश्यकता होती है। पार्टी ने अब इस फंड को जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में लगाने का निर्णय लिया है।
पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की खदानों (खासकर कुनुस्तोरिया और कजोरा क्षेत्र) से अवैध कोयला खनन और चोरी का यह बड़ा घोटाला सामने आया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, अनूप मांझी उर्फ लाला के नेतृत्व वाले सिंडिकेट ने रेलवे, CISF और स्थानीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत से ECL की लीज क्षेत्रों से लाखों टन कोयला अवैध रूप से निकाला और तस्करी कर बेचा।
CBI की 2020 की FIR और ED की जांच में खुलासा हुआ कि दिसंबर 2017 से अक्टूबर 2020 के बीच इस रैकेट से लगभग ₹2,742 करोड़ के प्रॉसीड्स ऑफ क्राइम (Proceeds of Crime) उत्पन्न हुए। अवैध कोयले को पश्चिम बंगाल और झारखंड के विभिन्न स्टील और पावर प्लांट्स में बेचा गया। सिंडिकेट ने हवाला, फर्जी कंपनियों और नकद लेन-देन के जरिए काली कमाई को वैध बनाने का नेटवर्क चलाया।
ED ने अब तक इस मामले में ₹482 करोड़ से अधिक की संपत्तियां कुर्क की हैं, जिसमें हालिया ₹159.51 करोड़ की कुर्की शामिल है। अनूप मांझी समेत कई आरोपियों पर CBI और ED की जांच जारी है।
Published on:
07 May 2026 10:57 am
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