
अमीनाबाद के अजीत ज्वेलरी शोरूम की सील खुलवाने में कथित अनियमितता का मामला, पेशकार और वरिष्ठ लिपिक पर भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )
LDA Action : लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में एक सीलबंद शोरूम को खोलने से जुड़े आदेश में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। अमीनाबाद स्थित बड़े कारोबारी के अजीत ज्वेलरी शोरूम की सील खुलवाने की प्रक्रिया में आदेश के साथ कथित तौर पर फर्जी तरीके से छेड़छाड़ किए जाने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद LDA उपाध्यक्ष एवं आईएएस अधिकारी प्रथमेश कुमार ने नाराजगी जताते हुए विशेष कार्याधिकारी (OSD) एवं पीसीएस अधिकारी विपिन कुमार शिवहरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए नियुक्ति विभाग को भी रिपोर्ट भेजी गई है। इसके साथ ही संबंधित अधिकारी के पेशकार और वरिष्ठ लिपिक मनीराम मौर्या के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी उप सचिव माधवेश कुमार को सौंपी गई है।
अमीनाबाद क्षेत्र में स्थित अजीत ज्वेलरी शोरूम की सील खोलने से जुड़ा मामला अब LDA के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। सामने आई जानकारी के अनुसार, प्राधिकरण के आदेश में कथित रूप से हेरफेर कर सील खोलने की प्रक्रिया पूरी कराए जाने की आशंका जताई गई है। इस मामले में यह जांच का विषय है कि आदेश किस स्तर पर तैयार हुआ, उसमें क्या बदलाव किए गए और संबंधित कार्रवाई के लिए किस अधिकारी की अनुमति ली गई थी। किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान को सील करने या उसकी सील खोलने की प्रक्रिया प्राधिकरण के नियमों और सक्षम अधिकारी के आदेश के तहत पूरी की जाती है। ऐसे में आदेश की प्रमाणिकता, उसकी मूल प्रति और उस पर दर्ज तारीखों का मिलान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, कथित फर्जीवाड़े के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही सामने आएगा।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने पीसीएस अधिकारी विपिन कुमार शिवहरे से जवाब तलब किया है। उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि शोरूम की सील खोलने से संबंधित प्रक्रिया में कथित अनियमितता कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
कारण बताओ नोटिस प्रशासनिक प्रक्रिया का वह हिस्सा होता है, जिसके माध्यम से संबंधित अधिकारी से किसी कार्रवाई या कथित चूक के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जाता है। नोटिस जारी होने का अर्थ अपने आप में आरोपों का अंतिम रूप से प्रमाणित होना नहीं है। संबंधित अधिकारी के जवाब, दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है। इस मामले में भी अब निगाहें पीसीएस अधिकारी के जवाब और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं। यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित अनियमितता जानबूझकर की गई या फिर आदेश तैयार करने और उसे लागू करने की प्रक्रिया में प्रशासनिक चूक हुई।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, LDA उपाध्यक्ष ने मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए नियुक्ति विभाग को रिपोर्ट भेजी है। इस कदम से प्रकरण का दायरा केवल प्राधिकरण के आंतरिक प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संबंधित अधिकारी की जवाबदेही का पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है।
सरकारी अधिकारियों के कामकाज में आदेशों की शुद्धता, अभिलेखों का रखरखाव और निर्धारित प्रक्रिया का पालन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। खासकर किसी प्रतिष्ठान को सील करने या उसकी सील खोलने जैसे मामलों में दस्तावेजों की प्रमाणिकता और सक्षम स्तर से स्वीकृति की पुष्टि जरूरी होती है। यदि जांच में आदेश से छेड़छाड़ या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, नियुक्ति विभाग को भेजी गई रिपोर्ट और संबंधित अधिकारी से मांगे गए स्पष्टीकरण के आधार पर आगे की प्रक्रिया क्या होगी, यह जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
इस प्रकरण में कार्रवाई का दायरा केवल पीसीएस अधिकारी तक सीमित नहीं रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, संबंधित अधिकारी के पेशकार और वरिष्ठ लिपिक मनीराम मौर्या के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी कार्यालयों में पेशकार और लिपिकीय कर्मचारियों की भूमिका पत्रावलियों के रखरखाव, आदेशों के संकलन, दस्तावेजों के आवागमन और प्रशासनिक प्रक्रिया में सहायता से जुड़ी होती है।
ऐसे में यदि किसी आदेश में अनियमितता की आशंका सामने आती है, तो यह जांचना जरूरी होता है कि संबंधित फाइल किस-किस स्तर से गुजरी और दस्तावेजों में बदलाव की जिम्मेदारी किसकी थी। जांच में यह भी देखा जा सकता है कि आदेश की मूल प्रति क्या कहती है, संबंधित पत्रावली पर किसके हस्ताक्षर हैं और सील खोलने की कार्रवाई किस प्रक्रिया के तहत की गई। इन बिंदुओं से कथित गड़बड़ी की वास्तविक प्रकृति और जिम्मेदारियों का निर्धारण करने में मदद मिल सकती है।
मामले की विस्तृत जांच के लिए LDA उप सचिव माधवेश कुमार को नामित किया गया है। उन्हें पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच के दौरान आदेश से जुड़े दस्तावेजों, पत्रावली की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल किए जाने की अपेक्षा है। जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि शोरूम की सील खोलने का आदेश किस आधार पर जारी हुआ, कथित अनियमितता किस स्तर पर हुई और क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया था। इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष निष्कर्ष निकाला जाए।
अमीनाबाद के अजीत ज्वेलरी शोरूम से जुड़ा यह मामला LDA में आदेशोंियान्वयन और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर अहम सवाल खड़े करता है। फिलहाल कारण बताओ नोटिस, नियुक्ति विभाग को भेजी गई रिपोर्ट और विभागीय जांच के निर्देश इस प्रकरण के प्रमुख घटनाक्रम हैं। अब सबकी निगाहें उप सचिव माधवेश कुमार की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को कथित अनियमितता का दोषी मानना उचित नहीं होगा। मामले में अंतिम स्थिति आधिकारिक दस्तावेजों, संबंधित पक्षों के जवाब और जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।
Updated on:
24 Oct 2026, 11:55 AM IST
Published on:
24 Oct 2026, 11:55 AM IST
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