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Lucknow Metro Fact File: 35 प्रतिशत पेड़ों को बचाने के लिए बदला प्रोजेक्ट का डिज़ाइन

Lucknow Metro जितनी हाईटेक उतनी ही इको फ्रिन्ड्ली भी

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लखनऊ

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Dikshant Sharma

Aug 30, 2017

Lucknow Metro

Lucknow Metro

लखनऊ। राजधानीवासियों को पांच दिन बाद मेट्रो की सौगात मिलने वाली है। मेट्रो में सफर न ही केवल आपकी यातायात और जाम की समस्या को हल करेगा बल्कि आपको एक मेट्रोपोलिटन सिटी होने का एहसास भी करायेगा। तेज़ी से हुए इस डेवलपमेंट में इस बात का ख़याल भी रखा गया कि प्राकृतिक सुंदरता न ख़राब हो और न ही इसे नुक्सान पहुंचे। इसके लिए एलएमआरसी की ओर से ख़ास 'ग्रीन इनिशिएटिव' अपनाया जा रहा है। इस इनिशिएटिव के तहत लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन लोगों के साथ साथ शहर की आबो हवा का भी खासा ख्याल रख रही है।

ग्रीन इनिशिएटिव
मेट्रो कंस्ट्रक्शन के दौरान लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन ने 'ग्रीन इनिशिएटिव' के अंतर्गत वनीकरण, ऊर्जा प्रबंधन, खतरनाक वेस्ट का प्रबंधन, वायु प्रदुषण नियंत्रण, ध्वनि और कम्पन नियंत्रण उपाय और रेन वाटर हार्वेस्टिंग का प्रयोग किया गया है। इसके साथ मेटो के निर्माण और ध्वस्तीकरण के दौरान निकला मलबा/कचरा निपटाने और रीसाइक्लिंग के लिए भी खास योजनाओं पर काम किया गया है।

35 प्रतिशत पेड़ों को बचाने के लिए बदला प्रोजेक्ट का डिज़ाइन
मेट्रो द्वारा निर्माण के दौरान 35% पेड़ों को बचाने के लिए प्रोजेक्ट के डिजाइन में बदलाव किया गया है। इसके साथ ही 5000 पौधों को मेट्रो के पुलों के नीचे और डिपो में लगाया गया हैं। मेट्रो हर्ब गार्डन भी तैयार कर रहा है जहां मेडिसिनल पौधे लगाए गए हैं। कई जगह पेड़ों को जड़ से मिटटी सहित उठा कर उन्हें दूसरी जगह लगाया गया है। हाल ही में हज़रतगंज से मुंशीपुलाई के बीच लगे 8 पेड़ शिफ्ट किये गए हैं।

मिट्टी बचाने के लिए जो भी मिटटी कंस्ट्रक्शन के दौरान निकाली गयी उसको कास्टिंग यार्ड में चिन्हित स्थानों पर इखट्टा करा गया। अब इन जगहों पर घास और अन्य धूल को उड़ने से बचाने वाले पौधों को लगाया गया है।

हवा में प्रदूषण की मॉनिटरिंग
इसे के साथ वायु और जल प्रदुषण को रोकने के लिए भी उचित प्रबंध किये गए हैं। बैचिंग प्लांट पर डस्ट कलेक्शन सिस्टम लगाया गया है। इससे हवा में से छोटे छोटे कण पदार्थों को निकलाजाता है। ताकि आस पास की हवा में सुधार कर सांस लेने योग बनाए रखा जा सके। इसी के साथ निर्माण स्थल पर नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैण्डर्ड 2009 के मुताबिक़ हवा में प्रदूषण की मात्रा पर नज़र रखी जाती थी। जिस वक़्त स्थल के आस पास प्रदूषण की मात्रा हवा में ज़्यादा होती है तो कार्य को कुछ देर के लिए रोक दिया जाता है।

बीएस 3 और 4 के वाहनों का प्रयोग
मेट्रो द्वारा केवल उन्ही वाहनों का उपयोग किया गया है जो कम प्रदूषण करें। तय मानकों के तहत बीएस 3 और 4 के वाहनों का प्रयोग किया गया है। धूल को उड़ने से रोकने के लिए ट्रीटेड पानी का छिड़काव किया जाता है। जिन कार्यों में बड़ी मशीनों का प्रयोग होता है उन्हें रात में किया जाता है। हर महीने क्षेत्र की आवाज़ की मॉनिटरिंग भी की जाती है।

प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने कहा कि ग्रीन इनिशिएटिव का मकसद था कि प्रकृति को नुक्सान न पहुंचाया जाए। मेट्रो के निर्माण में बेहतर टेक्नोलॉजी का प्रयोग हुआ है और साथ ही पूरा प्रयास किया गया है कि वातावरण को भी नुक्सान न पहुंचे। हम जनता का भी मेट्रो के इस इनिशिएटिव के प्रति सहयोग चाहते हैं।