
Lucknow Metro
लखनऊ। 6 सितम्बर से लखनऊ मेट्रो का कमर्शियल रन जनता के लिए शुरू हुआ था। तब से लगभग 12 बार लखनऊ मेट्रो के संचालन में अचानक ब्रेक लग चुका है। इसके पीछे ओवर हेड वायर में शार्ट सर्किट होने का हवाला दिया गया था। समस्या के बरकारार रहने के बाद मेट्रो अधिकारियों को कानून सहारा लेने पड़ा और अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराइ।
दरअसल तार लगी पतंगों के चलते लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन (एलएमआरसी) को आए दिन मेट्रो के संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीते गुरुवार को एक तार लगी पतंग से मेट्रो का संचालन प्रभावित होने से एलएमआरसी ने इस मामले को लेकर थाने में एफआईआर करा दी। 6 इंच के कांटेदार लंबा स्टील का तार गिरा मेट्रो की लाइन पर गिरा जिससे 25 हजार वोल्ट ओएचई लाइन में शार्ट सर्किट हो गया। जानकारों का कहना है कि चाईनीज मांझा के विकल्प के रूप में 2 मीटर लंबा और नुकीला स्टील का तार चलन में आया है। एलएमआरसी लोगों से मेट्रो रूट के आस-पास पतंग ना उड़ाने की अपील लगातार कर रहा है।
बंदरों से भी है मेट्रो को खतरा
चारबाग से मवैया जाने वाले मेट्रो रुट पर दोनों ही तरफ खासी हरियाली है। चारबाग स्टेशन पर भी बन्दर बड़ी संख्या में मौजूद हैं। अब बंदरों को मेट्रो ट्रैक भी लुभाने लगा है। ट्रैक के कोने में बंदर घात लगाए बैठे नज़र आते हैं। खुद मेट्रो के फारेस्ट अफसर मोहन तिवारी मानते हैं कि यदि ट्रैक पर बंदर दिखते हैं तो मेट्रो को रोक दिया जाएगा। साथ ही अगर काफी संख्या में बंदर ट्रैक के साइड में है तो मेट्रो की गति भी धीमी की जाती है। 6 सितम्बर को जो मेट्रो खराब हुई थी उस दिन भी ट्रैक पर बंदर मौजूद थे।
हालंकि अधिकारी इसे खतरा नहीं मानते। उनका कहना है कि बंदर अक्सर वहीँ इखट्टा होते हैं जहां उन्हें खाने पीने की वयवस्था मिलती है। क्यूंकि मेट्रो में खाना पीना वर्जित है और ट्रैन से बहार सामान भी नहीं फेका जा सकता ऐसे में बंदर अधिक समय मेट्रो ट्रैक पर नहीं रहेंगे।
एलएमआरसी डायरेक्टर रोलिंग स्टॉक ने कहा कि बीते गुरुवार को एक तार लगी पतंग मेट्रो के ऊपर बने ओएचई (ओवर हेड इलेक्ट्रिक) लाइन संपर्क में आई, जिसके चलते पावर सप्लाई ट्रिप हो गई। मेट्रो के संचालन में एलएमआरसी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ये सबसे अधिक चारबाग और दुर्गापुरी मेट्रो स्टेशन के बीच स्ट्रेच पर है। बंदरों की संख्या से फिलहाल मेट्रो को कोई खतरा नहीं है।
बैन के बाद भी बिक रहे हैं मांझे
एलएमआरसी के डायरेक्टर रोलिंग स्टॉक ने बताया कि पतंग उड़ाने के लिए चाइनीज मांझे का प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही पतंग में लगभग दो मीटर लंबा और नुकीला स्टील का तार बांधे जा रहे हैं। जबकि इलाहाबाद न्यायिक उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में नवंबर 2015 में चाइनीज मांझे की बिक्री के साथ पतंगबाजी में तारों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था।
Published on:
30 Sept 2017 01:10 pm
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