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स्मार्ट हो रही पुलिस, ऐप की मदद से कंट्रोल होगा क्राइम, जानें क्या है प्लान

लखनऊ कमिश्नरेट के पांचों जोन में पॉइंट चिन्हित किए जाएंगे। जहां सबसे ज्यादा चैन स्नैचिंग, लूट, स्ट्रीट क्राइम व चोरी के साथ-साथ एक्सीडेंट होते हैं। ऐसे पॉइंट चिन्हित कर केस स्टडी कर अपराध के तरीके व अपराधियों का डाटाबेस तैयार किया जाएगा। इसके तैयार होने पर ऐसे क्राइम से निपटने के लिए पुलिस उस तर्ज पर काम करेगी।

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लखनऊ

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Prashant Mishra

May 02, 2022

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लखनऊ. राजधानी की लखनऊ लगातार स्मार्ट हो रही है। अब राजधानी के अपराध को रोकने के लिए पुलिस एप की मदद लेगी। लखनऊ पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद की तर्ज पर क्राइम कंट्रोल करने की तैयारी की है। लखनऊ पुलिस क्राइम एंड एक्सीडेंट ऐप तैयार कर रही है। ऐप के जरिए वारदात व इससे संभावित स्थानों को चिन्हित किया जाएगा। इसके बाद वहां प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों को लगाकर क्राइम कंट्रोल किया जाएगा। ऐप में एक डाटाबेस बनेगा जिसकी मदद से क्राइम मैपिंग कर शहर में होने वाले सबसे अधिक वारदातों के तरीकों व अपराधियों का डाटा जुटाया जाएगा।

पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने कुछ दिनों पहले इस ऐप को बनाने की जिम्मेदारी एडीसीपी उत्तरी प्राची सिंह को दी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अपराध को रोकने पिछले अपराधों को सुलझाने यह संभावित अपराधियों और पीड़ितों की पहचान करने के लक्ष्य के साथ ऐप के जरिए विश्लेषणात्मक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इस ऐप के जरिए न केवल क्राइम कंट्रोल करने में मदद मिलेगी बल्कि ये लोगों के जीवन को भी प्रभावित करेगा। उदाहरण के लिए अगर किसी क्षेत्र में चैन स्नैचिंग होती है तो उस इलाके मैं सिर्फ इसी तर्ज पर पुलिसिंग होगी। इसी तरह अगर किसी क्षेत्र में बंद घरों में चोरी होती है तो वहां उसी के मुताबिक पुलिसिंग की जाएगी। ‌

चिन्हित किए जाएंगे प्वाइंट

लखनऊ कमिश्नरेट के पांचों जोन में पॉइंट चिन्हित किए जाएंगे। जहां सबसे ज्यादा चैन स्नैचिंग, लूट, स्ट्रीट क्राइम व चोरी के साथ-साथ एक्सीडेंट होते हैं। ऐसे पॉइंट चिन्हित कर केस स्टडी कर अपराध के तरीके व अपराधियों का डाटाबेस तैयार किया जाएगा। इसके तैयार होने पर ऐसे क्राइम से निपटने के लिए पुलिस उस तर्ज पर काम करेगी।

हर थाने में चार पुलिसकर्मी होंगे प्रशिक्षित

पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के मुताबिक जल्द ही पुलिस कर्मियों को विभिन्न डेटाबेस यूज करने के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया जाएगा। यह ट्रेनिंग प्रोग्राम पुलिस लाइन में आयोजित होगा और हर थाने में तैनात दो से चार पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें मुकदमों का डाटा, आपराधिक रिकॉर्ड, डाटा. सोशल मीडिया इनपुट, ऑनलाइन ऑफलाइन एप्लीकेशन, डाटा और सीसीटीएनएस डेटाबेस शामिल है। अपराधियों का पता लगाने के लिए पुलिस की नई यूनिट में डेटाबेस पहले ही लागू किया जा चुका है। अब नए तरीके की पुलिसिंग के लिए इसमें कई तकनीकी से जानकारियों को लैस किया जाएगा।