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बस थोड़ा इंतजार कीजिए, ओबीसी आरक्षण पर सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट शीघ्र : सुरेश खन्ना

- यूपी विधानमंडल मानसून सत्र के दूसरे दिन उठा सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट रिलीज करने का मुद्दा

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बस थोड़ा इंतजार कीजिए, ओबीसी आरक्षण पर सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट शीघ्र : सुरेश खन्ना

बस थोड़ा इंतजार कीजिए, ओबीसी आरक्षण पर सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट शीघ्र : सुरेश खन्ना

लखनऊ. संसद ने 127वें संविधान संशोधन को मंजूरी देकर राज्यों को अपने स्तर पर ओबीसी आरक्षण के लिए जातियों की सूची तैयार करने का अधिकार करीब-करीब दे ही दिया है। इसके बाद से यूपी में ओबीसी आरक्षण पर गरमाहट बढ़ गई है। यूपी विधानमंडल मानसून सत्र के दूसरे दिन यूपी सरकार ने विपक्ष को आश्वासन दिया कि, सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट का परीक्षण चल रहा है, इसके परिणाम इसी विधानसभा सत्र में देखने को मिलेंगे।

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ओमप्रकाश राजभर ने उठाई आवाज :- सुभासपा सुप्रीमो ओमप्रकाश राजभर ने कहाकि, सामाजिक न्याय समिति वर्ष 2018 में ही अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया। नेता विपक्ष राम गोविंद चौधरी ने इसे जातीय जनगणना कराने से जोड़ दिया। साथ ही आरक्षण की सीमा 50 फीसद से ज्यादा करने की मांग की।

कमी की गुंजाइश न रह जाए :- इस का जवाब देते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अनिल राजभर ने कहाकि, योगी सरकार नहीं चाहती कि किसी कमी की गुंजाइश रह जाए और किसी को न्यायालय आदि जाने का मौका मिले। इसी वजह से रिपोर्ट का अच्छी तरह परीक्षण किया जा रहा है। इस पर ओमप्रकाश राजभर ने प्रतिप्रश्न किया कि दो वर्ष से अधिक हो गया। आखिर कितने दिन में परीक्षण हो पाएगा?

शीघ्र जारी होगी रिपोर्ट :- इस पर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने जवाब दिया कि पिछड़ा वर्ग आयोग को सांविधानिक मान्यता भाजपा सरकार ने दी। मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में पिछड़ों को आरक्षण दिया। इससे सरकार की नीति और नीयत पता चलती है कि वह पिछड़ों की हितैषी है। खन्ना ने आश्वस्त किया कि रिपोर्ट का परीक्षण होने के बाद इसी विधानसभा में उसका परिणाम आएगा।

ओबीसी की सूची में जुड़ेंगी 39 नई जातियां :- उत्तर प्रदेश सरकार ने 39 नई जातियों को ओबीसी की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है। राज्य में फिलहाल 79 जातियां ओबीसी आरक्षण के दायरे में आती हैं।

27 फीसदी आरक्षण तीन बांटने की तैयारी :- सरकार पिछड़े वर्ग को मिलने वाले 27 फीसदी आरक्षण को तीन हिस्से में बांटने जा रही है। पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा और सर्वाधिक पिछड़ा। पिछड़ी जातियों में यादव, अहीर, जाट, कुर्मी, सोनार, चौरसिया सरीखी जातियों को 7 फीसदी, अति पिछड़ा वर्ग की 65 जातियों को 11 प्रतिशत और सर्वाधिक पिछड़ा मल्लाह, केवट, निषाद, राई, गद्दी, घोसी, राजभर जैसी 95 जातियों को 9 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की गई है।