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लखनऊ की सर्दी ने कराया पहाड़ी इलाकों जैसा एहसास, गलन के मारे हालत खराब

अगले 4-5 दिनों तक मौसम के इस हांड़ कंपाते रवैये से राहत के आसार नहीं हैं।

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लखनऊ. गरम-गरम चाय और उसके साथ पकोड़े हों, तो मजा आ जाए। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते जा रहे हैं, वैसे-वैसे सर्दी अपने चरम सीमा पर चढ़ती जा रही है। कभी पारा 6 डि्ग्री, तो कभी 10 डिग्री है। लेकिन हद तो तब हो गयी जब पारा 3 डिग्री तक पहुंच गया। यहां राजधानी में पहाड़ी इलाकों जैसे ठंड पड़ रही है। ऐसा लगता है मानो हम पहाड़ी इलाकों में रह रहे हों। पहाड़ों से आती बर्फीली गलन भरी हवा से राजधानी का पारा धड़ाम से बढ़ा हुआ है।भीषण ठंड के अलावा धूप के दर्शन न के बराबर हो रहे हैं। हालांकि हल्की-हल्की धूप के नजारे देखने को जरूर मिल रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी गलन भरी सर्दी से राहत नहीं।मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अगले 4-5 दिनों तक मौसम के इस हांड़ कंपाते रवैये से राहत के आसार नहीं हैं।

लढ़कता पारा और बढ़ती ठंड

भारी भरकम गर्म कपड़ों को पहनने के बावजूद ठंड लगती है। एकदम से लुढ़के 3 डिग्री के पारे का असर घरों से लेकर दफ्तरों, बाजारों तक में दिखा। दोपहर में भले हल्की धूप से थोड़ी सी राहत मिलती हो लेकिन गलन से राहत नहीं। गलन इतनी कि दस्ताने पहने बिना राहत ही नहीं मिलती। कई जगह लोग अलाव जलाकर सर्दी से बचने का तरीका ढ़ूंढ़ते हैं। छत पर हों या बाजारों में, हर जगह अलाव जला कर लोग खुद को ठंड के प्रहार से बचा रहे हैं।

16 डिग्री से नीचे लुढ़के पारा, तो बनती है कोल्ड डे कंडीशन

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक तय मापदण्डों के अनुसार जब अधिकतम तापमान 16 डिग्री से भी नीचे चला जाता है, तब गजब की ठंडी पड़ती है।सर्दियों के अलावा बारिश के दिनों में घने बादल बने हुए हों और कई दिनों से बारिश का मौसम हो तब भी यह डवलप हो सकती है।

अभी नहीं मिलेगी राहत

इस बेदर्द सर्दी से अभी कुछ दिनों तक राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। पारे का तेवर तो कुछ दिनों तक ऐसे ही रहेगा। सुबह और रात में कोहरे के दर्शन भी होते रहेंगे।

ठंड इतनी ज्यादा है कि इस मौसम में कई लोग अपनी जान भी गवां चुके हैं। इसका कारण सिर्फ बढ़ती सर्दी है।