
लखनऊ. पीएचडी का सपना देख रहे राजधानी के छात्रों के लिए अच्छी खबर है। लखनऊ यूनिवर्सिटी से संबद्ध डिग्री कॉलेजों के प्रोफेसर्स की लंबे समय से पीएचडी कराने की मांग को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हरी झंडी दे दी गई है। अब डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर्स भी अपने अंडर स्टूडेंट्स को पीएचडी करा सकते हैं। इस मुद्दे को लेकर प्रोफेसर एमपी सिंह की अध्यक्षता में बनाई गई यूनिवर्सिटी की कमेटी द्वारा अप्रूवल दे दिया गया है। अब ऐसे डिग्री कॉलेज जहां पर पीजी कोर्सेस पढ़ाए जाते हों और वह प्रोफेसर्स जो रेगुलर हों और जिनके जर्नल प्रकाशित होते हों, उन्हें पीएचडी कराने का मौका मिलेगा।
छात्रों को होगा लाभ
लुआक्टा के अध्यक्ष प्रो. मनोज पांडे ने यह मुद्दा उठाया था। उनका कहना है कि लुआक्टा की मेहनत आखिरकार रंग लाई है। अब केवल गवर्नर का अप्रूवल बाकी है।यूनिवर्सिटी के इस निर्णय से एलयू के एफिलिएटेड कॉलेजों के करीब 150 से अधिक प्रोफेसर्स को लाभ मिलेगा। डिग्री कॉलेजों के प्रोफेसर्स को दो स्टूडेंट्स को पीएचडी कराने का मौका मिलेगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि पीएचडी के एडमिशन का अधिकार एलयू के पास ही रहेगा। एलयू के माध्यम से जो पीएचडी का एंट्रेंस एग्जाम कराया जाता है, उसी में डिग्री कॉलेजों की सीटें भी शामिल कर ली जाएंगी।
जानकारी के मुताबिक, पीएचडी से पहले छह महीने का कोर्स वर्क भी एलयू में ही होगा। कोर्स वर्क को जो पास कर लेंगे, उनके गाइड के तौर डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा। ज्ञात हो कि डिग्री कॉलेजों के प्रोफेसर्स लम्बे समय से पीएचडी कराने की मांग कर रहे थे। यूजीसी से नियम के अनुसार प्रमोशन में लागू एपीआई में इनका होना अनिवार्य होता था।
पिछले साल ही बना था प्रस्ताव
एलयू ने पिछले साल से पीएचडी में एडमिशन के लिए नया ऑर्डिनेंस लागू करने के लिए प्रो। विभूति राय की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी, जिसने नया ऑर्डिनेंस तैयार किया था। जिसमें यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड डिग्री कॉलेजों के प्रोफेसर्स को पहली बार यूनिवर्सिटी की निगरानी में पीएचडी कराने का मौका दिए जाने, साथ ही गवर्नमेंट इम्प्लाई को बिना रिटेन एग्जाम दिए डायरेक्ट इंटरव्यू में बैठने की मंजूरी दी गई थी।
बिना मानक जांच ही कॉलेजों को मिलेगा पीएचडी की एनओसी
47 कुल एडेड कॉलेज
- 2500 कुल यूजी शिक्षक
- यूजी के शिक्षकों को पीएचडी कराने के लिए किया गया खेल की आशंका है।किसी भी कॉलेज में साइंस फैकेल्टी में मानक अनुरूप लैब नहीं है। वहीं एलयू प्रशासन ने बिना जांच बता दिया रिसर्च के अनुरूप है लैब। नैक में केकेसी और आईआईटी को ए ग्रेड मिलने के बाद भी लैब की हालत खस्ता
Updated on:
31 Aug 2017 08:46 pm
Published on:
31 Aug 2017 08:39 pm
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