
तो क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा के एंग्लो इंडियन समुदाय के आखिरी नामित सदस्य होंगे डेंजिल जे गोडिन,तो क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा के एंग्लो इंडियन समुदाय के आखिरी नामित सदस्य होंगे डेंजिल जे गोडिन,तो क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा के एंग्लो इंडियन समुदाय के आखिरी नामित सदस्य होंगे डेंजिल जे गोडिन,तो क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा के एंग्लो इंडियन समुदाय के आखिरी नामित सदस्य होंगे डेंजिल जे गोडिन,तो क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा के एंग्लो इंडियन समुदाय के आखिरी नामित सदस्य होंगे डेंजिल जे गोडिन
लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा में डेंजिल जे गोडिन एंग्लो इंडियन समुदाय के आखिरी नामित सदस्य हो सकते हैं। संसद में भारतीय संविधान का 126वां संशोधन बिल बहुमत से पास हो गया। जिस वजह अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सीटों के लिए आरक्षण सीमा दस वर्ष और बढ़ा दी गई है। पर इसमें एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए कोई जिक्र नहीं किया गया। और ऐसा ही उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी हुआ। यहां भी एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं की गई। इस आधार पर उत्तर प्रदेश विधानसभा से एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित एक सीट स्वत: समाप्त हो जाएगी।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधान सभा में 404 सदस्य होते है जिसमें एक सदस्य एंग्लो इंडियन समुदाय से नामित होता है। एंग्लो इंडियन समुदाय के नामांकन एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के आरक्षण की समय सीमा 70 वर्ष के उपरान्त 25 जनवरी 2020 को समाप्त हो रही थी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की पांच दिसम्बर की बैठक में एंग्लो इंडियन समुदाय के लोगों का लोकसभा और विधानसभाओं में नामांकन बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। केंद्र सरकार एंग्लो-इंडियन समुदाय के 2 लोगों को लोकसभा के लिए नामित करती है, जिससे पूरे 545 सदस्यों का हाउस बनाती है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में, एंग्लो-इंडियन समुदाय के दो सदस्यों को नामित किया गया था। लेकिन दूसरे कार्यकाल में अभी तक कोई नामांकन नहीं किया गया है। स्पीकर समेत वर्तमान लोकसभा में 5 जनवरी तक 543 सदस्य हैं।
शीतकालीन सत्र में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने कहा कि लोकसभा की 543 सीटों में से 84 सीटें अनुसूचित जाति और 47 अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित है जबकि देशभर के सभी राज्य विधानसभाओं में 614 सीट अनुसूचित जाति और 554 सीट अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए आरक्षित है। लोकसभा में इस वक्त जॉर्ज बेकर और रिचर्ड हे एंग्लो इंडियन समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। 25 जनवरी 2020 को इनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। अगर आरक्षण ख़त्म हुआ तो ये दोनों आख़िरी सांसद होंगे।
16 दिसम्बर 2019 को केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि कि भारत में अब 296 एंग्लो-इंडियन ही बचे हुए हैं। इसका विरोध करते हुए कांग्रेस के सांसद हिबी एडेन ने कहाकि केंद्रीय मंत्री का आंकड़ा ग़लत है, इस समय देश में 3,47,000 एंग्लो-इंडियन हैं।
संविधान के अनुच्छेद 331 के तहत लोकसभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय के दो लोगों को संसद के लिए नामित किया जाता है वहीं, अनुच्छेद 333 के तहत इस समुदाय के सदस्यों को विधानसभा में जगह दी जाती है। इस समय 14 राज्यों की विधानसभाओं में एक-एक एंग्लो-इंडियन सदस्य है। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश,आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल है।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा में डेंजिल जे गोडिन नामित सदस्य है। राज्य विधान सभा में जब इस विधेयक कि पुष्टि हुई तब डेंजिल ने अपना मत रखते हुए कहाकि संभवतः इसमें कुछ आंकड़ों की गलती हो गई है। डेंजिल कहते हैं, "कानून मंत्री के बताए एंग्लो इंडियन समुदाय के मात्र 296 लोग है। ऐसा संभव नहीं है। हमारे लखनऊ में ही 500 लोग है। पूरे देश में लगभग 3.5 से 6.5 लाख लोग है।"
डेंजिल कहते हैं, "पूरे देश में हमारा समुदाय स्कूल, अस्पताल स्थापित करता है. इससे सरकार की समस्त योजनाओं का लाभ जन मानस तक पहुचाया जाता है।”
गोडिन इस संदर्भ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिल चुके हैं और आशावान्वित है कि उनके समुदाय के बारे में अवश्य सोचा जायेगा। एंग्लो इंडियन समुदाय पूरे भारत में फैला हुआ है। उनका अगर विधान सभा में प्रतिनिधित्व रहेगा तो वो अपनी आवाज रख सकते हैं। पिछले 15 साल से पीटर फैंथम नामित होते आ रहे थे, पर योगी सरकार के संस्तुति पर पहली बार एंग्लो इंडियन कोटे से नया व्यक्ति डॉ. डेनजिल जे गोडिन नामित किया गया। डेंजिल जे गोडिन का कार्यकाल वर्ष 2022 में समाप्त हो रहा है।
Published on:
06 Jan 2020 06:02 pm
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