यूपी के जिलों में बिक रहा प्रतिबंधित चाइनीज सेब, नर्वस सिस्टम के लिए खतरनाक

- खासतौर से पूर्वांचल के कई जिलों में चाइनीज सेब के हैं लोग दीवाने
- नेपाल से आ रही खेप, यूपी के कई जिलों में पहुंच रहा है सेब
- सस्ता होने के कारण खूब हो रही चाइनीज सेब की बिक्री
- डाक्टर ने चेताया, नर्वस सिस्टम के लिए खतरा है यह सेब

By: Mahendra Pratap

Published: 15 Jun 2021, 10:47 AM IST

लखनऊ/गोरखपुर . UP many districts sold Restricted chinese apple यूपी के कई जिलों में चाइनीज सेब लोगों को लुभा रहा है। खासतौर से पूर्वांचल के कई जिलों में चाइनीज सेब के लोग दीवाने हैं। सेब की खूबसूरती और कम कीमत की वजह से लोगों में काफी लोकप्रिय है। पर चाइनीज सेब भारत में बैन है। इसके बावजूद नेपाल की राह पकड़ कर यह सेब पूर्वांचल में पहुंच रहा है। वैसे भारत ने चीन से आने वाले सेब, नाशपाती और मेरीगोल्ड फ्लॉवर सीड्स पर वर्ष 2017 से अस्थायी तौर पर बैन कर रखा है।

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चाइनीज सेब की कीमत कम :- यह मौसम सेब का नहीं है। इस वक्त बाजार में मिलने वाले सेब कोल्ड स्टोरेज के होते हैं। बाजार में भारतीय सेब 250 रुपए किलो में बिक रहा है। जहां चाइनीज सेब खूबसूरत होने के साथ—साथ करीब 120 रुपए कीमत में बाजार में उपलब्ध हैं। जिस वजह से खरीदार अधिक मोल भाव किए बिना तुरंत चाइनीज सेब खरीद लेता है। पर भारत के बाजारों में चीनी सेब प्रतिबंधित है। यह सेब सेहत को फायदा पहुंचाने की जगह नुकसान पहुंचा सकता है। यह जानकारी अधिकतर खरीदारों को नहीं है।

भारत में चीनी सेब की बिक्री बैन :- गोरखपुर में फल के थोक कारोबारी विजय कुमार ने बताते हैं कि, भारत में चीनी सेब की बिक्री बैन है, वजह यह है कि सेब में केमिकल मिलाया जाता है जाे शरीर के अंगों के लिए नुकसानदेह है। पर अधिक मुनाफा कमाने के लिए कुछ लोग चाइनीज सेब तस्करी कर खुदरा बाजार में पहुंचा रहे हैं। अगर इस पर रोक नहीं लगी तो फल विक्रेताओं के साथ खरीदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

खतरनाक चाइनीज सेब :- चाइनीज सेब को पकाने के लिए उरबासिड या टूसेट के नाम के केमिकल का प्रयोग किया जाता है। इससे त्वचा पर चकते पैदा हो जाते हैं। चीन सरकार ने भी अपने देश में बिक्री के लिए प्रतिबंधित कर रखा है।

कई बीमारियों का खतरा : डाक्टर

डॉ. वीजाहत करीन बताते हैं कि, प्रतिबंधित इंजेक्शन का इस्तेमाल कर चाइनीज सेब को तैयार किया जाता है। ये केमिकल्स नर्वस सिस्टम के साथ बॉडी के नाजुक अंगों पर सीधे अटैक करते हैं। इन हार्मफुल इंजेक्शन की वजह से सेब में मौजूद केमिकल बॉडी में जाते ही एक्टिव हो जाते हैं। जिससे कई बीमारियों का खतरा होता है। हालांकि देखने में यह सेब इतना खूबसूरत और ताजा लगेगा कि कस्टमर दुकानों पर देख सबसे पहले इसे ही खरीदना पसंद करते हैं।

नेपाल के रास्ते पूर्वांचल के जिलों में पहुंचता है चीनी सेब :- सेब विक्रेता रामआधार का कहना है कि, चाइनीज सेब नेपाल से महराजगंज, सिद्धार्थनगर होते हुए गोखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, खलीलाबाद, मऊ आता है। इसके बाद बिहार के भ्ज्ञी कई जिलों में यह सेब आसानी से पहुंच जाता है। सिवान और गोपालगंज में चाइनीज सेब खूब बिकता है। चाइनीज सेब शहर के बाहरी हिस्से में देर रात उतरता है और वहीं से ठेले वाले लेकर चले जाते हैं। एक किलो सेब बेचने में 25 से 40 रुपये तक मुनाफा होता है।

पहुंचान आसान :- चाइनीज सेब को पहचानना बहुत आसान है। सेब में काफी शाइनिंग होती है और उसका रंग पिंक हाेता है। खाने में नरम और भुरभुरा लगता है, जबकि भारतीय सेब में शाइनिंग नहीं होती और थोड़ा खट्टापन लिए होता है।

Mahendra Pratap
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