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यूपी को जातीय दंगों की आग में जलाने की साजिश!

-जिन्हें विकास अच्छा नहीं लग रहा है, वह दंगा भड़काना चाहते हैं : सीएम योगी-लखनऊ और हाथरस में अलग-अलग मुकदमा दर्ज, अलग-अलग ट्वीटर यूजर पर कार्रवाई

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यूपी को जातीय दंगों की आग में जलाने की साजिश!

यूपी को जातीय दंगों की आग में जलाने की साजिश!

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में हाथरस कांड अचानक बेहद गंभीर परिस्थितियों में पहुंच गया। विपक्षी पार्टियों ने तो सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल ही रखा है इसके साथ तमाम ऐसे आवंछित तत्व विरोध में सामने आ रहे हैं, जिससे सरकार अलर्ट हो गई है। कई वेबसाइटें सामने आई जिसमें सीएम योगी और उनकी सरकार के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा था। इनका योगी सरकार को बदनाम कर यूपी के माहौल को खराब करना मकसद था। उत्तरप्रदेश पुलिस की इंटेलिजेंस रिपोर्ट में बताया गया है कि हाथरस घटना के बाद 'जस्टिस फॉर हाथरस' नाम से एक वेबसाइट भी बनाई गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री योगी के गलत बयान प्रसारित किए गए। रविवार देर रात पुलिस ने वेबसाइट और इससे जुड़ी लोकेशन पर छापेमारी करने के बाद लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में एक एफआईआर दर्ज किया गया। इसके साथ हाथरस के थाना चंदपा में इससे सम्बंधित एक एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहाकि, जिसे विकास अच्छा नहीं लग रहा है वे लोग देश, प्रदेश में दंगा, जातीय दंगा भड़काना चाहते हैं। सांप्रदायिक दंगा भड़काना चाहते हैं। इस दंगे की आड़ में न विकास रुकेगा न इस दंगे की आड़ में उनको रोटियां सेंकने का अवसर मिलेगा।

जस्टिस फॉर हाथरस आई निशाने पर :- हाथरस घटना के बाद जस्टिस फॉर हाथरस नाम से एक वेबसाइट सरकार के सबसे पहले निशाने पर आई है। जब सरकार को इस बारे में भनक लगी, तो कई वेबसाइट खुद ही बंद हो गईं। सुरक्षा एजेंसियों के पास इन सभी वेबसाइट के कंटेंट उपलब्ध हैं। इस बड़ी साजिश की जानकारी उत्तर प्रदेश सरकार को होते ही वेबसाइट ने अपना संचालन बंद कर दिया है। अभी ये वेबसाइट डिलीट हो गई है, लेकिन इसका जो लैंडिंग पेज था उससे मालूम हुआ कि वो फ्री में वेबसाइट बनाने के काम आता है।

कई संगठन की माहौल बिगाड़ने की साजिश :- राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने कहा कि पॉपुलर फ्रंट फॉर इंडिया (पीएफआई) समेत कुछ अन्य संगठन माहौल बिगाड़ने की लगातार साजिश कर रहे हैं। इसके लिए वेबसाइट पर स्क्रीनशॉट में ब्रेकिंग न्यूज लिखकर मुख्यमंत्री की तस्वीर के साथ उनका फर्जी बयान जारी किया गया था।

मदद के बहाने दंगों के लिए फंडिंग : डीजीपी

सूबे के डीजीपी हितेश चन्द्र अवस्थी ने बताया कि कई वेबसाइट का पता चला जिनका संचालन देश के बाहर से हो रहा था। इसमें न सिर्फ भड़काऊ सामग्री थी बल्कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से बचाव के तरीके भी बताए गए हैं। इस वेबसाइट पर पीड़िता के परिवार को मदद के बहाने दंगों के लिए फंडिंग की जा रही थी। फंडिंग की बदौलत अफवाहें फैलाने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया के दुरूपयोग को लेकर भी जानकारी मिली है। इस मामले में हाथरस पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इतना ही नहीं वेबसाइट पर मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए फेक न्यूज, फोटोशॉप से तैयार की गई तस्वीरों, अफवाहों, एडिटेड विजुअल का किस तरह इस्तेमाल किया जाए, ये भी जानकारी दी गयी है। दावा ये भी किया जा रहा है कि नफरत फैलाने के लिए दंगों के मास्टर माइंड ने कुछ मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया के महत्वपूर्ण अकाउंटों का इस्तेमाल किया है। डीजीपी ने बताया कि इस मामले की जांच कराई जा रही है। जरूरत हुई तो ये पूरी जांच एसटीएफ या साइबर क्राइम से कराई जाएगी।