13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सुहेलदेव कौन हैं, जिनके स्मारक की पीएम मोदी ने रखी आधारशिला

- पीएम ने कहा-महापुरुषों के साथ इतिहास में हुआ अन्याय

3 min read
Google source verification
सुहेलदेव कौन हैं, जिनके स्मारक की पीएम मोदी ने रखी आधारशिला

सुहेलदेव कौन हैं, जिनके स्मारक की पीएम मोदी ने रखी आधारशिला

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

महेंद्र प्रताप सिंह

लखनऊ. उप्र के आगामी विधानसभा चुनाव में राजभर समाज का वोट किसे मिलेगा यह अभी तय नहीं। लेकिन, इस समाज के आइकॉन सुहेलदेव के आशीर्वाद को लेकर राजनीतिक जंग शुरू हो गयी है। बहराइच में लोकप्रिय सुहेलदेव की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहकर राजनीतिक एजेंडा सेट कर दिया कि उप्र में सुहेलदेव जैसे तमाम महापुरुषों के साथ इतिहास में न्याय नहीं हुआ। पीएम ने बहराइच में सुहेलदेव की 40 फीट की विशालकाय प्रतिमा लगाने की भी घोषणा की। सुहेलदेव के नाम पर मेडिकल कालेज खोलने का एलान भी किया।

अगर तुम यूं ही सोते रहे तो, ये फ़र्ज़ी राष्ट्रवादी वतन बेच देंगे : संजय सिंह

पीएम मोदी ने सुहेलदेव की जयंती पर बन रहे स्मारक का मंगलवार को शिलान्यास किया। इसके अलावा तमाम अन्य सौगातों की भाी घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने नयी बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा, सुहेलदेव के साथ इतिहासकारों ने न्याय नहीं किया। आखिर कौन थे सुहेलदेव जिन्हें सरकार राजा सुहेलदेव राजभर के तौर पर प्रचारित कर रही है। यह जानने के लिए उप्र की जातीय राजनीति को समझना होगा।

भले ही उप्र में विधानसभा चुनाव अभी दूर है। लेकिन,जातियों की गोलबंदी और उनको लेकर राजनीति शुरू हो गयी है। अभी राजनीति के केंद्र में हैं पूर्वी उप्र के राजभर वोटर। पूर्वी यूपी मेे इनकी संख्या महज 3 प्रतिशत है। लेकिन, पूर्वांचल में कऱीब 49 विधानसभा सीटों पर इनका दबदबा है। कुछ सीटें तो ऐसी है जहां इनके मत 18 प्रतिशत तक हैं। इसी तरह लोकसभा की 20 सीटें ऐसी हैं जिनमें 50 हजार से अधिक राजभर या भर समाज की आबादी है। इस समाज के नए महापुरुष के रूप में सुहेलदेव को स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।

कई समाज हैं सुहेलदेव के दावेदार

इतिहास में सुहेलदेव का कोई खास जिक्र नहीं है। न ही कोई शिलालेख मिलता है या अभिलेख है जिसमें सुहेलदेव का जिक्र हो। भले ही इतिहास के पन्नों में सुहेलदेव का जिक्र न हो लेकिन लोककथाओं में आज भी यह जिंदा हैं। यही वजह है कि कई समाज के लोग सुहेलदेव पर अपनी दावेदारी जताते रहे हैं। कुछ साल पहले भाजपा और बसपा सहित अन्य पार्टियों ने राजा सुहेलदेव पासी के तौर पर प्रचारित किया। सुहेलदेव राजभर के नाम पर पार्टी गठित कर मंत्री बनने वाले ओमप्रकाश राजभर ने सुहेलदेव को राजभर समाज का बताकर राजनीति की नयी इबारत लिखी। बाद में यह भाजपा से अलग हो गए। ऐसे लोगों की भी कमी नहीं जो सुहेलदेव को राजपूत समाज का मानते हैं। यही वजह है कि रविवार को राजपूत समुदाय के लोगों की आपत्ति पर टिविटर पर 'राजपूतविरोधीभाजपा' हैशटैग ट्रेंड करता रहा। करीब 54 हज़ार ट्वीट किए गए।

क्या है सुहेलदेव की कहानी

जनश्रुति है सुहेलदेव 11वीं सदी में श्रावस्ती के राजा थे। जब महमूद गजनवी ने हिन्दुस्तान पर आक्रमण किया और गजनवी के भांजे सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी के नेतृत्व में गजनवी की सेना बहराइच पहुंची तब सुहेलदेव के साथ गाजी की जंग हुई। जिसमें मसूद ग़ाज़ी की सेना का खात्मा हो गया। 17वीं सदी में फारसी भाषा में लिखी गयी मिरात-ए-मसूदी में इसका जिक्र है। लेकिन, महमूद गजनवी के समकालीन इतिहासकारों उतबी और अलबरूनी ने इस युद्ध का कोई जिक्र नहीं किया है। मिरात-ए-मसूदी के बाद के लेखकों ने सुहेलदेव को भर, राजभर, बैस राजपूत, भारशिव या फिर नागवंशी क्षत्रिय तक बताया है। जो भी हो बहराइच में प्रसिद्ध गाजी मियां के साथ इनका नाम जुड़ा हुआ है। लेकिन, यह किस जाति या समाज से थे। इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

क्यों अहम हैं सुहेलदेव
-पूर्वी यूपी में 18 फीसद राजभर
-बहराइच से लेकर वाराणसी तक के 15 जिलो में प्रभाव
-प्रदेश की 60 विधानसभा सीटों पर राजभर का असर
-अति पिछड़ी जाति राजभर के लोग अजा में शामिल होने की कर रहे मांग

कब क्या हुआ

-60 के दशक में सुहेलदेव का जिक्र राजनीतिक दलों ने अपने भाषणों में किया
-बहराइच और आसपास के जिलों में पासी समाज की बहुलता के कारण बसपा ने पासी समाज के महापुरुष के रूप में प्रचारित किया
-2002 में बसपा से अलग होने के बाद ओमप्रकाश राजभर ने सुहेलदेव का राजभर समाज का आइकान बताते हुए पार्टी बनायी
-सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने भाजपा से समझौता कर विधानसभा में चार सीटें जीतीं।
-फरवरी 2016 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रतिमा का अनावरण किया और पुस्तक का विमोचन किया
-सुहेलदेव के नाम पर ट्रेन का संचालन शुरु किया गया
-29 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजा सुहेलदेव की याद में डाक टिकट जारी किया था।
- 16 फरवरी 2021 पीएम मोदी ने कहा-सुहेलदेव के साथ इतिहास ने न्याय नही किया

किसने क्या कहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी :- महाराजा सुहेलदेव को उचित सम्मान नहीं मिला जिसके वो हकदार थे। इतिहास लिखने वालों ने हमेशा उनकी उपेक्षा की। देश का इतिहास वो नहीं है जो भारत को गुलाम बनाने वाले और गुलामी की मानसिकता रखने वाले लोगों ने लिखा है।

राकेश सिंह रघुवंशी, प्रदेश अध्यक्ष राजपूत करणी सेना :- सुहेलदेव बैस के इतिहास से छेड़छाड़ राजपूत समाज बर्दाश्त नहीं करेगा। राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें राजपूत समाज से अलग करने की साजिश की जा रही है जिसका हम विरोध करेंगे।

ओम प्रकाश राजभर, अध्यक्ष, सुभासपा :- भाजपा सरकार पूरी ताकत से महाराजा सुहेलदेव राजभर को क्षत्रिय बनाने में लगी है। सुहेलदेव समाज पार्टी भाजपा के लोगों से इतिहास पढऩे की अपील करती है।

कमलेश पासवान, सांसदा भाजपा :- सुहेलदेव पासी समाज के महापुरुष थे। राजभर शब्द जोड़कर कोई छेड़छाड़ न की जाए। हम इसका विरोध करते हैं।