
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
AI: प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर का आकार देने के लिए प्रदेश के शहरों को अलग-अलग केंद्र के रुप में विकसित करने की योजना पर काम हो रहा है। इसके लिए राजधानी लखनऊ को देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शहर बनाया जाएगा। अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर तक कैसे ले जा सकते हैं इसके लेकर मुख्यमंत्री आवास पर बैठक हुई जिसमें अधिकारियों ने अपना प्रेजेंटेशन दिया। सितंबर में ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल टे्रड शो होने जा रहा है, जिसे यूपी ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट की तरह ही किया जाएगा।
पर्यटकों का आंकलन करेगा एआई
प्रदेश में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए जहां पर्यटन पर खास फोकस किया जा रहा है, वहीं अब उनकी संख्या के आंकलन के लिए एआई का प्रयोग किया जाएगा। इतना ही नहीं, प्रदेश में उर्जा, स्वास्थ्य, शहरी विकास, शिक्षा, खाद्य प्रसंस्करण और लघु उद्योगों में भी एआई का प्रयोग किया जाएगा। प्रदेश भर में बंजर और अनुपजाउ भूमि पर निर्माण कार्य की अनुमति दी जाएगी और जन्म मृत्यु पंजीकरण की तरह ही निर्माण कार्यो का डाटा तैयार किया जाएगा। जिसकी निगरानी एआई के माध्यम से किया जाएगा।
क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
दरअसल हम सभी इसके उपयोग के दायरे में जाने-अनजाने पहले से ही हैं। इंटरनेट की दुनिया में खासकर गूगल में यह पहले ही प्रयोग किया जा रहा है। जिसके कारण गूगल आपकी सर्च हिस्ट्री को सेव करता जाता है। इसे आप कृत्रित बुद्धि कह सकते हैं या मशीनी इंटेलिजेंस जिसे इंटरनेट की दुनिया में प्रयोग किया जाता है। हाल ही में लखनऊ में छात्रों ने ऐसी छड़ी विकसित किया जो अंधे लोगों को रास्ता बताता जाता है। एआई पर इन दिनों व्यापक कार्य किया जा रहा है, यहां तक कि समाज वैज्ञानिक भी इसके समाज पर होने वाले प्रभाव और परिवर्तनों पर शोध कर रहे हैं।
कब हुई शुरुआत
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शुरुआत 1950 में ही हो गया था लेकिन 1970 में इसे पहचान मिलनी शुरू हुई। जापान ने सबसे पहले इसका प्रयोग किया और इसे सुपर कंम्पयूटर में इस्तेमाल किया गया। ब्रिटेन ने इसी आधार पर एल्वी नाम का कंम्यूटर बनाया। यूरोपियन संघ के प्रयोग के बाद यह निजी संस्थाओं में भी प्रयोग किया जाने लगा है। हाल ही में भारत सरकार ने थिंक टैंक नीति आयोग और गूगल के बीच इस पर सहमति बनी है। दोनों ही एआई के इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।
कहां-कहां होता है प्रयोग
हवाई जहाजों की आवाजाही पूरी तरह एआई पर निर्भर है। इसके अलावा कंम्प्यूटर गेम, नेचुरल भाषा, बुद्धि, आवाज की पहचान, रोबोटिक्स में प्रयोग होता है। हमारे मोबाईल पर आवाज के माध्यम से मोबाईल लॉक का खुलना या नंबर डायल भी एआई के माध्यम से ही होता है। इसके अलावा जमीन या पहाड़ या समुद्र में केमिकल की तलाश, नई दवाएं तैयार करने, कलर बनाने, अंतरिक्ष, शेयर बाजार से लेकर बीमा कंपनियां भी इसका प्रयोग करने लगी है। आधुनिकतम गाडिय़ों में भी इसका प्रयोग होने लगा है। टै्रफिक सिस्टम कंट्रोल से लेकर रेलवे के नेटवर्क में भी अब इसका प्रयोग शुरू हो चुका है।
यूपी में एआई के प्रयोग से परिवर्तन
राजधानी लखनऊ को सबसे पहले एआई सिटी बनाया जा रहा है। जिसका बड़ा प्रभाव भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का होगा। इसके अलावा प्रदेश सरकार के सभी प्रोजेक्ट में पारदर्शिता के साथ समयबद्ध निपटारे में भी इससे मदद मिलेगी। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को कंट्रोल करने में नया टूल का काम करेगा एआई जो सिग्नलों से लेकर चालान में भी पुलिस की मदद करेगा। इसके अनेक लाभ है, जो कि एआई इकोसिस्टम विकसित होने के बाद प्रयोग किया जाने लगेगा और लोगों के जीवन में सहूलियत के साथ सुरक्षा से लेकर सरकारी काम काज की पारदर्शिता में बदलाव देखने को मिलेगा।
Published on:
24 Jun 2023 01:57 pm
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