अद्भुत है बनारस : देश को एक नहीं दिए हैं आठ भारत रत्न

-भारत रत्न से नवाजी गयीं हस्तियाेेें में कई की कमर्भूमि रही है काशी

By: Mahendra Pratap

Published: 16 Jan 2021, 07:07 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. दुनिया के सबसे प्राचीन शहर में शुमार वाराणसी अपने आप में एक अद्भुत शहर है। यह शहर रत्नों की खान है। चाहे धर्म हो संस्कृति, नृत्य हो संगीत, कला, शिक्षा और ढेर सारे क्षेत्र, सब क्षेत्रों से वाराणसी शहर से एक नहीं कई रत्न निकले हैं, जिन्होंने देश में ही नहीं विश्व में भारत का नाम रोशन किया है। इसी के साथ ही वाराणसी, देश का पहला ऐसा शहर है जहां की 8 हस्तियां देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित की जा चुकी हैं। इनमें कई लोगों का जन्म जरूर शहर से बाहर हुुुुआ पर उनकी पढ़ाई लिखाई और कमर्भूमि वाराणसी ही रही है। डा. भगवान दास, लालबहादुर शास्त्री, पंडित रविशंकर, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान तो काशी में ही जन्मे थे पर बाकी चार डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, सीएनआर राव, मदन मोहन मालवीय और भूपेन हजारिका के लिए काशी उनके लिए सबकुछ था।

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सम्मान भारत रत्न : - भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के हाथों से देश का उच्चतम नागरिक सम्मान भारत रत्न 2 जनवरी, 1954 को अस्तिव में आया। अब तक 48 महान विभूतियों को इस सम्मान से नवाजा गया है।

डा. भगवान दास: प्रमुख शिक्षाशास्त्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, दार्शनिक (थियोसोफी) एवं कई संस्थाओं के संस्थापक डा. भगवान दास को साल 1955 में भारत रत्न की उपाधि प्रदान की गई थी। भगवान दास का जन्म बनारस में 12 जनवरी, 1869 को साह परिवार में हुआ था। 18 सितंबर 1958 को निधन हुआ।

लालबहादुर शास्त्री : देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का करीब 18 माह का प्रधानमंत्री का कार्यकाल अद्वितीय रहा है। तत्कालीन मुगलसराय में 2 अक्टूबर 1904 को जन्मे शास्त्रीजी ने काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि प्राप्त की थी। जय जवान-जय किसान का लाल बहादुर का अमर नारा था। 11 जनवरी 1966 हुई। इसी साल शास्त्रीजी को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

पंडित रविशंकर: पंडित रविशंकर का जन्म 7 अप्रैल 1920 को काशी में हुआ था। सितार के जरिए रविशंकर ने पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना लिया था। उन्होंने तीन ग्रैमी पुरस्कार जीते। साल 1999 में भारत रत्न मिला। 11 दिसंबर 2012 को अमेरिका के सैन डिएगो में अंतिम सांस ली।

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां : शहनाई और उस्ताद बिस्मिल्लाह खां एक दूसरे के पूरक हैं। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री के भाषण के बाद उनकी शहनाई वादन एक परंपरा बन गई थी। वे काशी विश्वनाथ मंदिर में अधिकृत शहनाई वादक थे। 21 अगस्त 2006 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। वर्ष 2001 में भारत रत्न सम्मान मिला।

सीएनआर राव: चिंतामणि नागेश रामचंद्र राव का जन्म 30 जून, 1934 को बेंगलुरु में हुआ था। राव को भारत का मिस्टर साइंस और डॉक्टर साइंस के नाम से पुकारा जाता था। उन्होंने बीएचयू से एमएससी और आइआइटी खडग़पुर से पीएचडी की। वर्ष 2014 में भारत रत्न से सम्मानित किए गए।

महामना मदन मोहन मालवीय: महान स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, शिक्षाविद् और समाज सुधारक मदन मोहन मालवीय का जन्म प्रयागराज में 25 दिसंबर 1861 को हुआ था। अधिवक्ता के साथ-साथ पत्रकार भी रहे। उनके बारे में जितना लिखा जाए वो काम है। वर्ष 1915 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की। 12 नवंबर 1946 को उनका निधन हुआ। साल 2014 में मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा।

भूपेन हजारिका : भूपेन हजारिका सिर्फ नाम ही काफी है। असम के शदिया में 8 सितंबर 1926 को जन्मे भूपेन बहुआयामी व्यक्तिव के मालिक थे। शुरुआती पढ़ाई गुवाहाटी, तेजपुर में हुई। बीएचयू से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया। गंगा पर लिखे और गाए उनके गीत काफी प्रसिद्ध हुए। पांच नवंबर 2011 को उन्होंने दुनिया को छोड़ दिया। साल 2019 में भारत रत्न से सम्मानित किए गए।

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