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लखनऊ

इस तरह करें Mahamrityunjay Mantra का जाप, बुद्धि-विद्या-यश-धन की होगी बढ़ोत्तरी

भगवान शिव के ‘Mahamrityunjay Mantra’ सर्वदोष नाशक मंत्र है। 

लखनऊJul 10, 2017 / 06:20 pm

Neeraj Patel

mahamrityunjay mantra in hindi

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लखनऊ. भगवान शिव के ‘महामृत्युंजय मंत्र’ सर्वदोष नाशक मंत्र है। Shiva का यह मंत्र मानव जीवन के लिए अभेद्य कवच है। बीमारी हो या दुर्घटना आदि से मृत्यु का भय यह मंत्र सब दूर करता है। इसका जाप शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा को भी दूर करता है। इस शिव मंत्र जाप से शरीर रक्षा के साथ बुद्धि, विद्या, यश और लक्ष्मी भी बढ़ती है।
 
महामृत्युंजय मंत्र के जप का समय
वैसे तो Mahamrityunjay Mantra का जाप कभी भी कर सकते है, परन्तु सोमवार भगवान शिव का दिन होता है और यह अत्यंत शुभ होता है। इसके अलावा Sawan में महामृत्युंजय मंत्र का जाप बहुत ही फलदाई होता है क्योकि Sawan मास भगवान शिव का दिन माना है और पूरे श्रावण मास में इसका Jaap कभी भी कर सकते है। ज्योतिषी असाध्य रोगों, मृत्युपरक कष्टों और अचानक आने वाली विपदाओं से बचने के लिए Mahamrityunjay Mantra का जप करना ही सर्वश्रेष्ठ बताते हैं। प्रियजनों के वियोग, भाई बंधुओ से विद्रोह, कलंक, धनाभाव, कोर्ट-कचहरी के मुक़दमे आदि कष्टों में यह मंत्र बहुत ही कारगर है। विवाह मेल में लड़के और लड़की के नाडी दोष, भकूट दोष और मांगलिक दोष निवारण में भी यह उपयोगी है।
 
महामृत्युञ्जय मंत्र जाप कि विधि
हम आप को यहाँ महामृत्युञ्जय मंत्र के जाप की विधि बता रहे है कि Sawan में जाप कैसे करना चाहिए। प्रातः बेला में स्नान करके Subh Muhurat में आचरण और आत्मशुद्धि के साथ पूजा स्थान पर शिव प्रतिमा के समक्ष आसन ग्रहण करेें। घी का दीपक और धूप-दीप प्रज्वलित करें। यंत्र को पंचामृत – घी, दूध, दही, शहद, शक्कर से स्नान कराएं। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान करवाकर पूजा स्थल पर रखें। यंत्र पर चंदन लगाएं, साबुत चावल, सुपारी, सफेद पुष्प अर्पित करें। इसके साथ आचमन के समय मंत्रो का प्रयोग करे।
 
Mahamrityunjay Mantra जपविधि – आचमन मंत्र
कृतनित्यक्रियो जपकर्ता स्वासने पांगमुख उदहमुखो वा उपविश्य धृतरुद्राक्षभस्मत्रिपुण्ड्रः । आचम्य । प्राणानायाम्य। देशकालौ संकीर्त्य मम वा यज्ञमानस्य अमुक कामनासिद्धयर्थ श्रीमहामृत्युंजय मंत्रस्य अमुक कामनासिद्धयर्थ
 
महामृत्युंजय संकल्प मंत्र
श्रीमहामृत्युंजय मंत्रस्य अमुक संख्यापरिमितं जपमहंकरिष्ये वा कारयिष्ये।
 
महामृत्युंजय प्राण प्रतिष्ठा मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॐ गुरवे नमः।
ॐ गणपतये नमः। ॐ इष्टदेवतायै नमः।
इति नत्वा यथोक्तविधिना भूतशुद्धिं प्राण प्रतिष्ठां च कुर्यात्‌।
संस्कृत में महामृत्युंजय उस व्यक्ति को कहते हैं जो मृत्यु को जीतने वाला हो। ऋग्वेद से लेकर यजुर्वेद में भी इस मंत्र का उल्लेख मिलता हैं। इसके अलावा शिव पुराण में इस मंत्र व इसके आशय को विस्तार से बताया गया हैं।
 
क्या है Mahamrityunjay Mantra
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ
महा मृत्युंजय मंत्र का अर्थ
त्रयंबकम- त्रि.नेत्रों वाला ;कर्मकारक।
यजामहे- हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं। हमारे श्रद्देय।
सुगंधिम- मीठी महक वाला, सुगंधित।
पुष्टि- एक सुपोषित स्थिति, फलने वाला व्यक्ति। जीवन की परिपूर्णता
वर्धनम- वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है।
उर्वारुक- ककड़ी।
इवत्र- जैसे, इस तरह।
बंधनात्र- वास्तव में समाप्ति से अधिक लंबी है।
मृत्यु- मृत्यु से
र्मुक्षीय, हमें स्वतंत्र करें, मुक्ति दें।
मा अमृतात- अमरता, मोक्ष।
सरल अनुवाद
हम त्रि-नेत्रीय वास्तविकता का चिंतन करते हैं। जो जीवन की मधुर परिपूर्णता को पोषित करता है और वृद्धि करता है। ककड़ी की तरह हम इसके तने से अलग हम जीवन व मृत्यु के बंधन से मुक्त हो।
 
मंत्र में 32 शब्दों का प्रयोग
इस मंत्र में 32 शब्दों का प्रयोग हुआ है और इसी मंत्र में ॐ’ लगा देने से 33 शब्द हो जाते हैं। इसे ‘त्रयस्त्रिशाक्षरी या तैंतीस अक्षरी मंत्र कहते हैं। श्री वशिष्ठजी ने इन 33 शब्दों के 33 देवता अर्थात्‌ शक्तियाँ निश्चित की हैं जो कि निम्नलिखित हैं।
 
परम फलकारक Mahamrityunjay Mantra
श्रावण मास में Mahamrityunjay Mantra का जप करना परम फलदायक है। महामृत्युंजय मंत्र के जप व उपासना के तरीके आवश्यकता के अनुरूप होते हैं। अधिकतर लोग इसे आपदा, बीमारी में रक्षा और मरणासन्न व्यक्ति की जान बचाने के लिए प्रयोग में लाता है। लेकिन सावन मास में हर तरह की उपासना के लिए इस मंत्र का जप किया जाता है।
 

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