
भगवान महावीर (Lord Mahavir) को जैन धर्म का भगवान माना जाता है। आज यानी 14 अप्रैल 2022, को चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को महावीर जयंती (Mahavir Jayanti 2022) के रूप में मनाया जाता है। भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। उन्होंने ही अहिंसा का सिद्धांत दिया और सत्य, अचौर्य, बह्मचर्य और अपरिग्रह के व्रतों का पालन करने की शिक्षा दी है। कहते हैं कि उनका जन्म बिहार के कुंडलपुर के राज परिवार में हुआ था। भगवान महावीर का बचपन का नाम 'वर्धमान' था। ऐसा कहा जाता है कि इन्होंने 30 साल की उम्र में घर छोड़ दिया और दीक्षा लेने के बाद 12 साल तपस्या की थी।
बिहार के कुंडलपुर के राज परिवार में हुआ था जन्म
भगवान महावीर ने जैन धैर्म को अपनाकर उसका प्रसार-प्रचार के साथ अपने उपदेशों के माध्यम से जियो और जीने दो का संदेश दिया था।उनकी शिक्षाओं में मुख्य बातें थी कि सत्य का पालन करो, प्राणियों पर दया करो और अहिंसा को अपनाओ। भगवान महावीर का जीवन काल 511-527 ईस्वी ईसा पूर्व तक माना जाता है। इनका जन्म एक क्षत्रिय राजकुमार के रूप में चैत्र शुक्लपक्ष त्रयोदशी को बसोकुंड में हुआ था। इनके बचपन का नाम वर्धमान था ये लिच्छवी कुल के राजा सिद्दार्थ और रानी त्रिशला के पुत्र थे। हिन्दु पंचांग की मानें तो चैत्र मास के 13वें दिन भगवान महावीर ने जन्म लिया था। ऐसा कहा जाता है कि जैन मान्यताओं के अनुसार उनका जन्म बिहार के कुंडलपुर के राज परिवार में हुआ था।
भगवान महावीर के हैं कई नाम
महावीर स्वामी जी ने श्रद्धा और विश्वास द्वारा जैन धर्म की पुन: प्रतिष्ठा स्थापित की और आधुनिक काल में जैन धर्म की व्यापकता और उसके दर्शन का श्रेय महावीर स्वामी को जाता है। इन्हें अनेक नामों से पुकारा जाता हैं-अर्हत, जिन, निर्ग्रथ, महावीर, अतिवीर इत्यादि । जैन श्रद्धालु इस पावन दिवस को महावीर जयंती के रूप में परंपरागत तरीके से हर्षोल्लास और श्रद्धाभक्ति पूर्वक मनाते आ रहे हैं। जैन धर्म के धर्मावलंबियों का मानना है कि महावीरजी ने घोर तपस्या द्वारा अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर ली थी जिस कारण वह विजेता और उनको महावीर कहा गया और उनके अनुयायी जैन कहलाए।
महावीर जयंती का शुभ मुहूर्त
14 अप्रैल, गुरुवार त्रयोदशी तिथि आरंभ: 14 अप्रैल 2022, सुबह 04.49 बजे से त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 अप्रैल 2022, सुबह 03.55 बजे तक कैसे मनाते हैं महावीर जयंती तप से जीवन पर विजय प्राप्त करने का पर्व महावीर जयंती के रूप में मनाया जाता है। श्रद्धालु मंदिरों में भगवान महावीर की मूर्ति को विशेष स्नान कराते हैं, जो कि अभिषेक कहलाता है। तदुपरांत भगवान की मूर्ति को सिंहासन और रथ पर बिठा कर उत्साह और हर्षोउल्लास पूर्वक जुलूस निकालते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में जैन धर्मावलम्बी शामिल होते हैं। इस सुअवसर पर जैन श्रद्धालु भगवान को फल, चावल, जल, सुगन्धित द्रव्य आदि वस्तुएं अर्पित करते।
ये थे भगवान महावीर के विचार
भगवान महावीर के ये पंच सिद्धांत हैं- अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, सत्य और अपरिग्रह। इस दिन भगवान महावीर की पूजा-अर्चना की जाती है और उनके दिए गए उपदेशों को स्मरण करके उनके बताए गए सिद्धांतों पर चलने का प्रयास किया जाता है। इस अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। भगवान महावीर की जयंती पर लोग भगवान महावीर की पूजा करते हैं और गरीबों को दान देते हैं। मनुष्य के दुखी होने की वजह खुद की गलतियां ही हैं जो मनुष्य अपनी गलतियों पर काबू पा सकता है वही मनुष्य सच्चे सुख की प्राप्ति भी कर सकता है। आपात स्थिति में मन को डगमगाना नहीं चाहिए। आत्मा अकेले आती है, अकेले चली जाती है, न कोई उसका साथ देता है न कोई उसका मित्र बनता है। हर आत्मा अपने आप में आनंदमय और सर्वज्ञ है। आनंद हमारे अंदर ही है इसे बाहर ढूंढने की कोशिश न करे। हर एक जीवित प्राणी के ऊपर दया करो। घृणा से केवल विनाश होता है। सत्य के प्रकाश से प्रबुद्ध हो, बुद्धिमान व्यक्ति मृत्यु से ऊपर उठ जाता है। ईश्वर का कोई अलग अस्तित्व नहीं है। बस सही दिशा में अपना पूरा प्रयास करके देवताओं को पा सकते हैं। खुद पर विजय प्राप्त करना लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है। आपने कभी किसी का भला किया हो तो उसे भूल जाओ और कभी किसी ने आपका बुरा किया हो तो उसे भूल जाओ।
Published on:
14 Apr 2022 10:37 am
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