
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद
डॉ. अल्लामा इकबाल ने कहा है
हजारों साल नरगिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा।
कुछ दीदावर मुश्किल से नहीं शायद एक ही बार पैदा होते हैं। ऐसा ही नाम है मेजर ध्यानचंद। हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद की आज पुण्यतिथि है। प्रयागराज में पैदा हुए ये महान हॉकी खिलाड़ी आज ही के दिन 43 साल पहले 1979 में दुनिया को अलविदा कह गए थे।
मेजर ध्यानचंद के खेल की तारीफ करना सूरज को दीया दिखाने जैसा है। उनको लेकर तमाम किस्से-कहानियां मशहूर हैं। उनका खेल पर कंट्रोल ऐसे कमाल का था कि दूसरी टीम और आम लोगों तक को उनकी स्टिक पर ही शक हो गया था। एक बार तो ऐसा भी हुआ जब उनकी हॉकी स्टिक तोड़कर देखी गई कि आखिर गेंद इससे हटती क्यों नहीं?
ये किस्सा हॉलैंड में हुआ था
भारत की टीम हॉलैंड से खेल रही थी। ध्यानचंद ने कमाल का खेल दिखाया और भारत मैच जीत गया। लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि ध्यानचंद की हॉकी स्टिक के अंदर चुंबक या गोंद भरी है। तभी तो हॉकी स्टिक से गेंद चिपक जाती है। ध्यानचंद को लोगों ने रोक लिया और हॉकी स्टिक तोड़कर देखना चाहा। ध्यानचंद ने स्टिक थमा दी। उनकी हॉकी स्टिक तोड़ी गई। स्टिक टूटी तो सभी को शर्मिंदा होना पड़ा। स्टिक में गोंद जैसा कुछ भी नहीं था। गेंद को स्टिक से कोई गोंद नहीं मेजर ध्यानचंद की कला चिपकाए रखती थी।
मेजर ध्यानचंद ने अपने वक्त में भारतीय हॉकी को उस उरूज पर पहुंचाया, जहां कोई भी टीम जाने का सपना देखती है। जब तक वो खेले भारतीय टीम का दबदबा रहा। उनके होते कोई भी टीम भारत के सामने ज्यादा टिक नहीं सकी।
मख़मूर देहलवी कह गए हैं-
चमन तुम से इबारत है बहारें तुम से ज़िंदा हैं
तुम्हारे सामने फूलों से मुरझाया नहीं जाता।
Updated on:
03 Dec 2022 03:41 pm
Published on:
03 Dec 2022 11:37 am
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