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Makar Sankranti 2022: आज संक्रांति,स्नान दान कल,जपे इस मंत्र को

( Makar Sankranti 2022) कई वर्षो बाद मकर संक्रांति पर एक ऐसा योग बन रहा हैं जिसमे पिता और पुत्र का मिलाप होगा ऐसा अनोखा मिलन कई वर्षो देखने को मिलता हैं। इस महायोग में जपे कुछ खास मंत्रो से हर एक व्यक्ति अपने पारिवारिक परेशानियों को और मान सम्मान को बढ़ाने का एक अच्छा मौक़ा हैं। संक्रांति पर्व।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jan 14, 2022

Makar Sankranti  2022: आज लगेगी संक्रांति, स्नान दान कल

Makar Sankranti 2022: आज लगेगी संक्रांति, स्नान दान कल

लखनऊ , ( Makar Sankranti 2022) पंडित शक्ति मिश्रा ने बतायाकि आज यानी 14 जनवरी की रात में 8:49 पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इस कारण सक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। निर्णय सिंधु ग्रंथ के अनुसार मकर संक्रांति दोपहर में होने के कारण स्नान आदि का पूर्ण काल सूर्योदय से 16 घंटे तक रहेगा।

( Makar Sankranti 2022) ओज-तेज-बल का स्त्रोत : सूर्यनमस्कार

पंडित शक्ति मिश्रा ने कहाकि सूर्यनमस्कार करने से ओज-तेज और बुद्धि की बढ़ोत्तरी होती है। ॐ सूर्याय नम: । ॐ भानवे नम: । ॐ खगाय नम: ॐ रवये नम: ॐ अर्काय नम: । आदि मंत्रो से सूर्यनमस्कार करने से आदमी ओजस्वी-तेजस्वी व बलवान बनता है। इसमें प्राणायाम भी हो जाता है, कसरत भी हो जाती है ।

( Makar Sankranti 2022) सूर्य की उपासना करने से,अर्घ्य देने से,सूर्यस्नान व सूर्य-ध्यान आदि करने से कामनापूर्ति होती है । सूर्य का ध्यान भ्रूमध्य में करने से बुद्धि बढती है और नाभि-केंद्र में करने से मन्दाग्नि दूर होती है, आरोग्य का विकास होता है |

( Makar Sankranti 2022) सूर्यनारायण उत्तर दिशा का महत्व

जिस दिन भगवान सूर्यनारायण उत्तर दिशा की तरफ प्रयाण करते हैं, उस दिन उतरायण (मकर संक्रांति) का पर्व मनाया जाता है। इस दिन से अंधकारमयी रात्रि कम होती जाती है और प्रकाशमय दिवस बढ़ता जाता है । ( Makar Sankranti 2022) उत्तरायण का वाच्यार्थ है कि सूर्य उत्तर की तरफ, लक्ष्यार्थ है आकाश के देवता की कृपा से ह्दय में भी अनासक्ति करनी है। नीचे के केन्द्रों में वासनाएँ, आकर्षण होता है व ऊपर के केन्द्रों में निष्कामता, प्रीति और आनंद होता है।

( Makar Sankranti 2022) संक्रांति रास्ता बदलने की सम्यक सुव्यवस्था है । इस दिन आप सोच व कर्म की दिशा बदलें। जैसी सोच होगी वैसा विचार होगा, जैसा विचार होगा वैसा कर्म होगा । हाड-मांस के शरीर को सुविधाएँ दे के विकार भोगकर सुखी होने की पाश्चात्य सोच है और हाड-मांस के शरीर को संयत, जितेन्द्रिय रखकर सदभाव से विकट परिस्थितियों में भी सामनेवाले का मंगल चाहते हुए उसका मंगलमय स्वभाव प्रकट करना यह भारतीय सोच है।