24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मायावती का पीएम पद की ओर इशारा, लड़ सकती हैं इस सीट से लोकसभा चुनाव

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने अपने प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि अगर मौका मिला तो वह अम्बेडकर नगर से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी।

2 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Abhishek Gupta

May 07, 2019

Mayawati

Mayawati

लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने अपने प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि अगर मौका मिला तो वह अम्बेडकर नगर से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। अम्बेडकर नगर से बसपा प्रत्याशी रितेश पांडे के लिए आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने अपनी यह मंशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि मैं पहले भी अम्बेडकर नगर से कई बार चुनाव लड़ चुकी हैं और अगर मौका लगा तो एक बार फिर मैं अम्बेडकर नगर से लोकसभा का चुनाव लड़ूंगी। हालांकि गठबंधन के दौरान लोकसभा सीटों पर प्रत्याशियों के ऐलान के बाद बसपा सुप्रीमो ने अपने प्रधानमंत्री बनने के प्लान को यह करते हुए ठंडे बस्ते में डाल दिया था कि वह यदि लोकसभा चुनाव लड़ेंगी, तो इससे पार्टी नेता व कार्यकर्ता सिर्फ उन्हें ही जिताने में लग जाएंगे, जिससे बाकी सीटों पर लोगों का ध्यान नहीं जा पाएगा। और इससे पार्टी को नुक्सान होगा। वहीं अब उनके ताजा मंसूबे जाहिर होने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है।

ये भी पढ़ें- जुड़वा बच्चों के अपहरण-हत्या के आरोपी की जेल में मौत, पुलिस प्रशासन में मचा हड़कंप

ऐसे लड़ सकती हैं लोकसभा चुनाव-
अम्बेडकर नगर से मायावती चार बार लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं और हर बार विजयी रही हैं। इस बार पूर्व सांसद राकेश पांडे के पुत्र रितेश पांडे अम्बेडकर नगर सीट से चुनाव मैदान में हैं। उनकी जीत के बाद यदि मायावती चुनाव लड़ने की इच्छा जताती हैं, तो रितेश पांडे उनके लिए इस सीट को छोड़ सकते हैं और मायावती इस सीट पर उपचुनाव लड़ सकती हैं।

ये भी पढ़ें- राजीव गांधी पर बयान को लेकर पीएम मोदी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, प्रमोद तिवारी उठाने जा रहे बहुत बड़ा कदम

पहले भी कर चुकी हैं इशारा-

इससे पहले भी मायावती ने प्रधानमंत्री बनने की अपनी इच्छा की ओर इशारा कर चुकी हैं। उन्होंने बसपा समर्थकों से उनके चुनाव न लड़ने पर मायूस न होने के अपील की थी। उन्होंने कहा थी कि जब वह १९९५ में पहली बार यूपी की मुख्यमंत्री बनी थी, तब वह न ही विधानसभा और न ही विधान परिषद की सदस्य थीं। ऐसा ही एक प्रावधान है, जिससे प्रधानमंत्री बनने के ६ महीने के भीतर नेता सांसद का चुनाव लड़ सकता है। वहीं सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव कई दफा बोल चुके हैं कि यूपी से ही अगला प्रधानमंत्री होगा, तो दूसरी तरफ मायावती भी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में यह कहकर जोश भरती दिखती हैं कि गठबंधन की जीत के बाद ही यूपी से नया प्रधानमंत्री निकलेगा।