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बैठक के बाद आज मायावती का एक और सबसे बड़ा ऐलान, भाई- भतीजे के बाद इनको भी किया लिस्ट में शामिल, जारी किया नई सूची

ऐसी है 2022 में भाजपा व सपा से निपटने की बसपा की तैयारी, अब इनको सौंपी बड़ी जिम्मेदारी  

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लखनऊ

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Ruchi Sharma

Jun 24, 2019

mayawati

बैठक के बाद आज मायावती का एक और सबसे बड़ा ऐलान, भाई- भतीजे केबैठक के बाद आज मायावती का एक और सबसे बड़ा ऐलान, भाई- भतीजे के बाद इनको भी किया लिस्ट में शामिल, जारी किया नया प्लान बाद इनको भी किया लिस्ट में शामिल, दिया सबसे बड़ी जिम्मेदारी

झांसी. बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने 2019 के चुनाव में गठबंधन की सीढ़ी के सहारे लोकसभा में पार्टी के सांसदों का आंकड़ा जीरो से उठकर 10 तक पहुंच जाने के बाद सपा के सहारे की सीढ़ी को झटक दिया है। बसपा सुप्रीमो ने आगे के चुनावी सफर को अकेले ही तय करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव पर फोकस करते हुए पार्टी में बड़े बदलाव किए हैं। इसके तहत बुंदेलखंड में भी संगठन में उलटफेर कर दिया गया है। इसमें पार्टी सुप्रीमो मायावती ने किसी जमाने में उनके करीबी रहे नेताओं पर एक बार फिर से भरोसा जताते हुए मिशन-2022 के तहत बड़ी जिम्मेदारी डाली है। इसके तहत बुंदेलखंड क्षेत्र के कद्दावर नेता व पूर्व एमएलसी तिलक चंद्र अहिरवार की पार्टी में वापसी कराते हुए उन्हें झांसी-चित्रकूट मंडल के साथ ही कानपुर मंडल के सेक्टर प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा वामसेफ की सरिता प्रभाकर व शशि गौरव को मंडल संयोजक और संघमित्रा बौद्ध व पुष्परजनी आर्य को जिला संयोजक बनाया गया है। इसके अलावा बृजकिशोर डेली को बहुजन वालंटियर फोर्स का मंडल संयोजक बनाया गया है।

बिहार और दिल्ली के रह चुके हैं प्रभारी

बसपा नेता व पूर्व एमएलसी तिलक चंद्र अहिरवार बसपा के बिहार व दिल्ली के प्रभारी रह चुके हैं। करीब एक साल पहले वह पार्टी नेतृत्व से असहमति होने पर सक्रिय राजनीति छोड़कर सामाजिक कार्यों में जुड़ गए। इस दौरान वह किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल नहीं हुए। इसके बाद अभी हाल में ही उन्हें पार्टी नेतृत्व ने लखनऊ बुलाकर बात की और पार्टी में वापसी करने के साथ बुंदेलखंड क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई।

पहले लड़ चुके हैं चुनाव

बसपा नेता तिलक चंद्र अहिरवार इसके पहले जालौन लोकसभा सीट व बबीना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने मऊरानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की भी तैयार कर ली थी, लेकिन नेतृत्व ने उन्हें टिकट देने के बजाए बिहार भेज दिया था। इसके बाद एक एक बार फिर उन्हें पार्टी में संगठन को 2022 के चुनाव के मद्देनजर मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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