
मायावती
लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि दिल्ली में आयोजित आरएसएस का कार्यक्रम कार्यक्रम राजनीति से ज्यादा प्रेरित था। ऐसा इसलिए था ताकि बीजेपी की केन्द्र व राज्य सरकारों की कमियों व विफलताओं से जनता का ध्यान हटाया जा सके। इसीलिए आरएसएस के इस तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम में देश के करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ी ज्वलन्त समस्याओं जैसे भयावह गरीबी, जानलेवा महंगाई, बेरोजगारी व भ्रष्टाचार आदि के बजाए दूसरे मामलों पर चर्चा की गई।
भाजपा की कथनी और करनी में अंतर
मायावती ने जारी एक बयाान में कहा है कि बीजेपी के केन्द्र व राज्य सरकारों की ग़रीब, मज़दूर, किसान-विरोधी तथा बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठ समर्थक नीतियों से स्वभाविक तौर पर इनकी विफलताओं के कारण देश भर में छाये व्यापक जन आक्रोश से आरएसएस भी चिन्तित क्योंकि धन्नासेठों की तरह इन्होंने भी बीजेपी की जीत के लिये अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया था। लेकिन ’’कथनी’’ से ज्यादा ’’कर्म’’ मायने रखता है। इसलिये लोग अब इनके बहकावे में आने वाले नहीं हैं।
इस तरह से हिन्दू मुसलमानों के रिष्ते कैसे होंगे मधुर
आरएसएस प्रमुख के इस कथन पर कि ’जन्मभूमि पर अगर मुसलमान खुद मन्दिर बनवाते हैं तो बरसों से उन पर उठ रही अंगुलियाँ झुक जायेंगी। मायावती ने कहा कि बसपा इससे कतई भी सहमत नहीं है। एक नहीं बल्कि अनेकों मन्दिर बन जायें तब भी संकीर्ण संघी हिन्दुओं व मुसलमानों के बीच रिश्ते सुधरने वाले नहीं हैं।
आरएसएस की बुनियादी सोच दलित पिछड़ा व मुस्लिम विरोधी
उन्होंने कहा क्योंकि इनकी बुनियादी सोच व मानसिकता दलित, पिछड़ा, मुस्लिम व अन्य अल्पसंख्यक विरोधी है और इस प्रकार संविधान की मंशा के विरूद्व है जिस कारण ही इन वर्गों के लोग हर प्रकार की जुल्म-ज्यादती से त्रस्त हैं तथा सर्वसमाज के लोगों का जान-माल, मज़हब व स्वतंत्रता के साथ जीने की इच्छा सब ख़तरे में है। a
Updated on:
20 Sep 2018, 4:15 PM IST
Published on:
20 Sep 2018, 4:15 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.