18 मई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पश्चिम बंगाल हिंसा पर मायावती ने दी केंद्र और राज्य सरकार को नसीहत, देशहित में कोई समझौता नहीं

Mayawati On Bengal Violence : पश्चिम बंगाल हिंसा को लेकर बसपा प्रमुख मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों को दी बड़ी नसीहत। कहा- 'संविधान और धर्मनिरपेक्षता देश का सुरक्षा कवच है, संकीर्ण राजनीति और भेदभाव से बचें सरकारें।'

2 min read
Google source verification
Mayawati

मायावती ने बंगाल हिंसा पर सरकार को दी नसीहत, PC- ANI

लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश की धर्मनिरपेक्ष पहचान, संविधान की मर्यादा और पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा को लेकर केंद्र व राज्य सरकारों को नसीहत दी है। मायावती ने कहा कि भारत की वैश्विक पहचान बाबा साहब के संविधान और सेक्युलर मूल्यों के कारण है, इसलिए सभी सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे किसी भी प्रकार के धार्मिक, जातीय या राजनीतिक भेदभाव से बचें तथा सभी नागरिकों की जान-माल और मजहबी आजादी की समान रूप से रक्षा सुनिश्चित करें।

मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि जैसा कि सर्वविदित है कि अपने भारत देश की दुनिया भर में अच्छी एवं अनोखी मानवतावादी पहचान ख़ासकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अनुपम संविधान को लेकर ज़्यादा है, जो पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलरिज़्म) के सिद्धान्त पर आधारित है अर्थात् यहां रहने वाले विभिन्न धर्मों के मानने वाले सभी लोगों को एक-समान आदर-सम्मान देना है।

उन्होंने कहा कि देश का मिज़ाज भी अधिकतर ऐसे ही उच्च मानवीय गुणों पर आधारित सभी धर्मों के मानने वालों को उनके जान, माल व मज़हब की आज़ादी एवं सुरक्षा आदि सुनिश्चित करता है। इसके निर्धारित व बताये हुये रास्तों पर चलना सभी सरकारों की ही नहीं बल्कि सभी नागरिकों की भी परम व प्रमुख ज़िम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं बल्कि यह भी सर्वविदित ही है कि यही वह सुरक्षा कवच है जिसके सहारे विदेशों में भारत-विरोधी प्रोपागेंडा आदि का देश हमेशा बख़ूबी सामना करता है, किन्तु केन्द्र व सभी राज्य सरकारों का यह दायित्व/ज़िम्मेदारी बनती है कि वे ऐसा कुछ भी ना करें और ना ही वैसे कुछ होने दें जिससे देश व ख़ासकर भारत सरकार से इसके बारे अप्रिय सवाल-जवाब हो।

अराजकता के खिलाफ सरकार ले सख्त एक्शन

उन्होंने कहा कि ख़ासकर पश्चिम बंगाल में चुनाव उपरान्त जारी हिंसा की सर्वत्र हो रही चर्चाओं में भी विशेषकर हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सरकारों को इसके प्रति सतर्क व अराजकता के विरुद्ध सख़्त हो जाना चाहिये, ताकि किसी भी सरकार के ऊपर संकीर्ण राजनीति, धार्मिक भेदभाव, जातीय द्वेष व पक्षपात आदि का दोष लगे, यह अति-चिन्ता की बात ज़रूर होनी चाहिये।

सभी धर्मों को मिले समान अधिकार

मायावती ने कहा कि इसके साथ ही, व्यापक जनहित व जनसुरक्षा के मद्देनज़र स्थापित नियम-क़ानूनों के अनुपालन या तत्सम्बंधी नये क़ानून आदि बनता है तो उसका अनुपालन सभी धर्मों के लोगों पर एक समान रूप में होना चाहिये अर्थात् संविधान व क़ाूनन की मान-मर्यादाओं को बरकरार रखने के लिये ज़रूरी है कि क़ानूनों का इस्तेमाल धार्मिक व जातीय भेदभाव/पक्षपात व द्वेष के बिना हो, ताकि सरकारें सर्वसमाज व सर्वधर्म हितैषी हों और लोगों को लगे भी तथा जिससे सरकारों की संवैधानिक गुडविल प्रभावित ना हो तो यह उचित होगा।

सरकार को ऐसे मुद्दों का रखना चाहिए ध्यान

बसपा मुखिया ने कहा कि वैसे भी देश के ख़ासकर सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक हालात इतने कठिन व ज्वलंत समस्याएं इतने अधिक दुखद/कष्टदायी हो गये हैं कि सभी सरकारों को उन विशेष मुद्दों पर अपना ध्यान पूरी तरह से केन्द्रित करना चाहिये, न कि विध्वंसकारी इमेज आदि के माध्यम से लोगों का ध्यान उस पर से बांटने का प्रयास करना चाहिये, क्योंकि इससे देश की राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान नहीं होगा बल्कि क्राइसिस के हालात को और बढ़ाएगा। जो देश व जनहितैषी कतई भी नहीं होगा। यही अपील है।