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मिशन 2019- गठबंधन की आस लगाए बैठे सपा को मायावती ने दिया बड़ा झटका

यूपी में मिलकर चुनाव लडऩे की संभावना न के बराबर।  

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mayawati

मिशन 2019- गठबंधन की आस लगाए बैठे सपा को मायावती ने दिया बड़ा झटका

लखनऊ. मायावती के मध्य प्रदेश में एकला चलो की नीति से यूपी में संभावित सपा-बसपा और कांग्रेस गठबंधन पर संशय छा गया है। अब यूपी में महागठबंधन मुश्किल ही नजर आ रहा है। मायावती ने पिछले दिनों लखनऊ में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के साथ गठबंधन का एलान किया था। अब मायावती द्वारा मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी करने के बाद सपा और कांग्रेस खासे नाराज दिख रहे हैं। मध्य प्रदेश में भी बहुजन समाज पार्टी ने अकेले चुनाव लडऩे की घोषणा करते हुए 22 उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। ऐसे में अब कांग्रेस पर लोकसभा और राज्यों में सीटों को बंटवारे को लेकर बीएसपी की शर्तें मानने का दबाव बढ़ गया है।
सपा और कांग्रेस बसपा से गठबंधन कर लोकसभा आगे का चुनाव लडऩे वाले थे, लेकिन मायावती ने इन दोनों को झटका देते हुए मध्य प्रदेश में एकला चलो की नीति अपनाई है। मायावती ने एक सप्ताह के अंदर राजनीति के धुरंधरों को दूसरा झटका दे दिया है।

उम्मीदों पर फिरा पानी
बतादें कि कांग्रेस बसपा सुप्रीमो मायावती से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में विधानसभा और उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव २०१९ के लिए गठबंधन की उम्मीद लगाए बैठी थी, लेकिन मायावती ने कांग्रेस के विरोधी अजित जोगी से छत्तीसगढ़ में गठबंधन कर वहां अपने उम्मीदवारों का एलान कर दिया और अब मध्य प्रदेश भी प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है।

ऐसे में अब कांग्रेस की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फिर गया है। वहीं सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव यूपी में भाजपा को हराने के लिए बसपा से गठबंधन की आस लगाए बैठे हैं, लेकिन मायावती ने जिस तरह से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में सपा और कांग्रेस को दर किनार किया है उससे तो यही लगता है कि मायावती यूपी में अकेले ही चुनाव लडऩे के मूड में हैं।
सूत्रों की मानें तो मायावती के इस रुख से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव नाराज हैं, लेकिन उनकी भी कुछ मजबूरियां हैं। सूत्रों की मानें तो मायावती छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में सपा और कांग्रेस से गठबंधन न कर सपा और कांग्रेस पर दबाव बनाया है ताकि यूपी में लोकसभा चुनाव में गठबंधन होने पर उन्हें सीटें सम्मानजनक मिल सकें। बतादें कि मायावती ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि यूपी में गठबंधन तभी होगा जब उन्हें सम्मानजनक सीटें मिलेंगे।

सपा और कांग्रेस ने बदली अपनी रणनीति
सूत्रों की मानें तो मायावती के इस रूख के बाद सपा और कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति बदल दी है। सपा अब जिले-जिले में रैलियां करने जा रही है तो वहीं कांग्रेस भी अपनी खोई हुई सियासी जमीन को तलाशना शुरू कर दिया है। इसी के मद्देनजर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेठी का दौरा किया और लोगों से मिले। उधर चित्रकूट में भी राहुल गांधी ने जनसभा को संबोधित किया और कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाया। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस यूपी में गठबंधन होने पर भी कम से कम २२ सीटों पर चुनाव लड़ेगी। यह वह सीटें हैं जहां पर कांग्रेस ने 2009 में लोकसभा का चुनाव जीता था। वहीं अगर गठबंधन नहीं होता है तो वह यूपी में 80 लोकसभा सीटों में से 35 पर चुनाव लड़ेगी।

सपा और कांगे्रस की रणनीति को माया का लगा झटका
सपा और कांग्रेस भाजपा को रोकने के लिए 2019 का लोकसभा चुनाव बसपा से गठबंधन कर लडऩा चाहती हैं। लेकिन मायावती ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में जिस तरह से झटका दिया है उससे तो यही लगता है कि यूपी में भी बसपा गठबंधन के मूड में नहीं है अगर बसपा यहां गठबंधन भी करती है तो वही अपनी शर्तों पर ही करेगी। मतलब साफ है वह अस्सी में से कम से कम 35 से 40 सीटें अपने हिस्से में चाहेगी।

भाजपा को होगा फायदा
जानकारों की मानें तो मायावती के इस रूख से भाजपा को फायदा होगा। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश दोनों जगहों पर बीजेपी को लाभ मिलेगा। भाजपा मायावती के इस कदम से कांग्रेस के साथ करीबी लड़ाई में आगे बढ़ती दिखेगी।