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जानिए कब है मोहिनी एकादशी, साल में एक बार इस व्रत के हैं तमाम फायदे, बस ये न करें गलती

जान‌िए क्या है मोहिनी एकादशी का मतलब, इससे क्या है लाभ, इस दिन व्रत करने से क्या होते हैं लाभ। कब पड़ रही है मोहिनी एकादशी ...  

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लखनऊ

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Krishna Pandey

Apr 27, 2023

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इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया था। इसलिए इसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है।

Mohini Ekadashi 2023: वैशाख मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहते हैं। एकादशी तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। एकादशी तिथि का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन मोहिनी एकादशी पड़ती है। इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया था। इसलिए इसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है। आइए जानते हैं कब है वैशाख मास की मोहिनी एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा।

कब है मोहिनी एकादशी
मोहिनी एकादशी का व्रत 1 मई को रखा जाएगा। 30 अप्रैल को रात 8 बजकर 28 मिनट से एकादशी तिथि प्रारंभ होगी और 1 मई को रात 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार, 1 मई को ही मोहिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

मोहिनी एकादशी 2023 मुहूर्त (Mohini Ekadashi 2023 Muhurat)

वैशाख शुक्ल एकादशी तिथि शुरू - 30 अप्रैल 2023, रात 08 बजकर 28

वैशाख शुक्ल एकादशी तिथि समाप्त - 1 मई 2023, रात 10 बजकर 09

पूजा मुहूर्त - सुबह 09.00 - सुबह 10.39 (1 मई 2023)
मोहिनी एकादशी व्रत पारण समय - सुबह 05.40 - सुबह 08.19 (2 मई 2023)

मोहिनी एकादशी व्रत का महत्व
शास्त्रों में मोहिनी एकादशी का व्रत सबसे उत्तम बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लेकर असुरों का वध किया था। कहते हैं इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है। इतना ही नहीं एकादशी का व्रत करने से घर परिवार में सुख शांति बनी रहती है और व्यक्ति को धन बुद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

मोहिनी एकादशी पूजा विधि
एकादशी तिथि के दिन व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्य नारायण को जल अर्पित करें। सूर्य भगवान को जल अर्पित करने के बाद हाछ में थोड़ा जल लेकर एकादशी का व्रत रखने के संकल्प लें।

इसके बाद घर में लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद उन्हें पीला फूल, चंदन, पीले वस्त्र आदि अर्पित करें।

इसके बाद मोहिनी एकादशी व्रत की कथा पढ़ें। आप चाहें तो किसी से यह कथा सुन भी सकते हैं। इसके बाद अगले दिन शुभ मुहूर्त में अपना व्रत का पारण कर लें।

मोहिनी एकादशी के नियम (Mohini Ekadashi Puja niyam)
मोहिनी एकादशी पर अगर द्वार पर गाय या कोई पशु-पक्षी आए तो उसे भगाए नहीं, उसके लिए खाने और पानी का इंतजाम करें. मोहिनी एकादशी व्रत का फल तभी मिलता है जब व्रती मन में क्रोध, नकारात्मक विचार न लाए. ऐसे में इस दिन वाद-विवाद न करें। श्रीहरि के निमित्त ध्यान लगाएं। किसी को बुरा भला न बोलें, नहीं तो एक गलती से व्रत निष्फल हो जाएगा।