मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी का आरम्भ मात्र 13 लोगों के साथ हुआ था पर टेरेसा की मृत्यु के समय (1997) 4 हजार से भी ज्यादा सिस्टर्स दुनियाभर में असहाय, बेसहारा, शरणार्थी, अंधे, बूढ़े, गरीब, बेघर, शराबी, एड्स के मरीज और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की सेवा कर रही हैं। मदर टेरेसा ने निर्मल हृदय और निर्मला शिशु भवन के नाम से आश्रम खोले। निर्मल हृदय का ध्येय असाध्य बीमारी से पीड़ित रोगियों व गरीबों का सेवा करना था, जिन्हें समाज ने बाहर निकाल दिया हो। निर्मला शिशु भवन की स्थापना अनाथ और बेघर बच्चों की सहायता के लिए हुई। जब वह भारत आईं तो उन्होंने यहां बेसहारा और विकलांग बच्चों और सड़क के किनारे पड़े असहाय रोगियों की दयनीय स्थिति को अपनी आँखों से देखा। इन सब बातों ने उनके ह्रदय को इतना द्रवित किया कि वे उनसे मुँह मोड़ने का साहस नहीं कर सकीं। उन्होंने जनसेवा का जो संकल्प लिया, जिसका पालन वो अपने अंतिम सांस तक करती रहीं।