
गोण्डा की राजनीति पर बात की जाए और सांसद बृजभूषण शरण सिंह का नाम ना आए। ऐसा हो नहीं सकता। बृजभूषण सिंह का रूतबा किसी राजा महाराजा से कम नहीं। उनका लाव लश्कर ऐसा है कि जब वह सड़कों पर निकलते हैं तो गाड़ियों का काफिला दूर- दूर तक दिखाई देता है।
आइए जानते हैं कौन हैं 6 बार के सासंद बृजभूषण सिंह? चलिए उनके 23 साल की राजनीति को समझते हैं………
कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह का गांव विश्नोहरपुर गोंडा जिले मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर है। विश्नोहरपुर गांव में कई एकड़ में शानदार सफेद रंग की कोठी बनी हुई है। यहां पर 1000 से ज्यादा लोगों के लिए एक साथ जनता दरबार की लगाने की व्यवस्था, आधुनिक जिम, बैडमिंटन कोर्ट, एंडिवर, फॉर्च्यूनर और महिंद्र स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियों उनके काफिले में शामिल हैं। इसके अलावा उनके पास एक हेलीकॉप्टर है।
सासंद जी कुश्ती, घोड़ें और खेल के शौकीन हैं। उनके अस्तबल में काबुल नश्ल के घोड़े हैं। जो घुड़सवारी करते हुए दिखाई देते हैं। एक गौशाला भी है। गौशाला और अस्तबल उनके आवास के सामने नहर के उस पार है। लखनऊ के लक्ष्मणपुरी में आवास साथ ही गोंडा नगर में गोनार्द होटल और गोनार्द लॉन भी है।
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह द्वारा दिए हलफनामे के मुताबिक, ग्रेजुएट बृजभूषण सिंह 9 करोड़ 89 लाख 5 हजार 402 रुपये के मालिक हैं। सांसद के पास 2 गाड़ियां और 50 ग्राम सोने के जेवरात हैं। सांसद हथियारों के भी शौकीन हैं। उनके पास 1 पिस्टल और 1 रायफल भी है। इसके साथ ही उनके पास 25 लाख रुपए का खेत है।
इसके साथ ही उनके इंटर और डिग्री कॉलेजों की संख्या 54 है। ये स्कूल और कॉलेज देवी पाटन मंडल के चारों जिलों गोंडा, बलरामपुर ,बहराइच और श्रावस्ती जिलों में हैं। इसमे नंदिनी नगर महाविद्यालय नवाबगंज में है। यहीं पर नंदिनी नगर स्पोर्ट्स स्टेडियम भी है। यहां हर साल कुश्ती की नेशनल चैंपियनशिप का आयोजन होता रहा है।
1979 में कॉलेज से छात्र नेता के रूप में अपने करियर की शुरुआत
बृजभूषण शरण सिंह का जन्म 8 जनवरी साल 1956 को गोंडा जिले के बिसनोहरपुर गांव में हुआ था। जब वो 12 साल के थे तो 2-3 साल के अंदर उनके 5 भाइयों की मौत हो गई। घर की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उनके चचेरे बाबा विधायक थे इसलिए परिवार का राजनीतिक रसूख था। साथ ही रंजिश भी काफी थी। 16 साल की उम्र में ही बृजभूषण राजनीतिक रूप से सक्रिय होने लगे थे।
बृजभूषण शरण सिंह बचपन से ही कुश्ती और पहलवानी के शौकीन हैं। उन्होंने 1979 में कॉलेज से छात्र नेता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। यहां उन्होंने रिकॉर्ड वोटों से छात्रसंघ का चुनाव जीता था। इसके बाद 1980 के दौर युवा नेता के रूप में उन्होंने अपनी पहचान बनाई और 1988 के दौर में पहली बार भाजपा से जुड़े।
1991 में रिकॉर्ड मतों के साथ चुनाव जीता
यहां हिंदूवादी नेता रूप में उन्होंने अपनी छवि बनाई और 1991 में रिकॉर्ड मतों के साथ चुनाव जीता। हालांकि कुछ समय बाद टाडा से जुड़े मामले में वह जेल चले गए और उनकी राजनीति कमजोर पड़ी, लेकिन वापसी के बाद उन्होंने लगातार चुनाव जीते।
उन्होंने करियर की शुरुआत ही विवादों के साथ हुई। बृजभूषण शरण सिंह उन 40 आरोपियों में से एक थे, जिन्हें 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के लिए जिम्मेदार कहा गया था। हालांकि, लंबे समय तक कानूनी लड़ाई के बाद 30 सितंबर 2020 को कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।
बृजभूषण ने पहली बार 1991 में चुनाव लड़ा था
बृजभूषण ने पहली बार 1991 में चुनाव लड़ा था और आनंद सिंह को रिकॉर्ड 1.13 लाख वोट से हराया था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बलरामपुर में भाजपा को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में बृजभूषण को इस सीट से टिकट दिया गया और उन्होंने यहां कमल खिला दिया।
इसके बाद गोंडा, बलरामपुर, अयोध्या समेत कई जिलों में उनका प्रभुत्व बढ़ता गया। 1999 के बाद से वह कभी भी चुनाव नहीं हारे हैं। हालांकि, अलग-अलग चुनाव में उनकी सीट बदलती रही, लेकिन नतीजा हर बार उनके पक्ष में रहा।
मतभेद के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ दी। 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सपा के टिकट पर कैसरगंज से जीत दर्ज की। हालांकि, 2014 चुनाव से पहले फिर भाजपा में शामिल हो गए।
प्रतीक गोंडा से भाजपा विधायक हैं।
इसके बाद 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव में कैसरगंज सीट से भाजपा के टिकट से जीते। बृजभूषण के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा प्रतीक भूषण और छोटा करन भूषण सिंह। दोनों बेटे राजनीति में हैं। बड़ा बेटा प्रतीक गोंडा सदर से भाजपा विधायक हैं। छोटा बेटा करन भूषण सिंह नबाबगंज से ब्लॉक प्रमुख हैं। सांसद की पत्नी केतकी सिंह बीजेपी से सांसद और जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं।
बृजभूषण लगातार छह बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं
बृजभूषण शरण सिंह 2011 से भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष हैं। वह फरवरी 2019 में लगातार तीसरी बार डब्ल्यूएफआई के अध्यक्ष चुने गए थे। इसके अलावा वह यूपी के गोंडा जिले की कैसरगंज सीट से भाजपा सांसद भी हैं। बृजभूषण लगातार छह बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। वह अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए भी जाने जाते हैं।
Published on:
24 Jan 2023 08:30 am
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