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मुलायम सिंह ने नवरात्रि के बहाने अखिलेश यादव और शिवपाल को घर बुलाया

साल 2017 में समाजवादी पार्टी और परिवार में सत्ता संघर्ष के बाद अलग हुए अखिलेश और शिवपाल के रिश्तों में कई महीनों से नरमी देखी जा रही है, ऐसे में मुलायम सिंह को लगता है कि उनकी इस पहल से परिवार फिर एकजुट हो सकता है।

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लखनऊ

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Dinesh Mishra

Oct 07, 2021

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File Photo of SP Chief Akhilesh Yadav talking with his Father Mulayam Singh Yadav in side of Shivpal yadav

पत्रिका एक्सक्लूसिव

लखनऊ. देश के सबसे बड़े राजनीतिक कुनबे में एक बार फिर से एका की पहल होती दिख रही है। यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश यादव और छोटे भाई शिवपाल यादव के बीच 2017 से उपजे मनमुटाव को दूर करने के लिए नवरात्रि पर एक और कोशिश करेंगे। इसके लिए उन्होंने दोनों को अपने घर पर बुलाया है। मुलायम को लगता है उनकी इस पहल से परिवार एकबार फिर एकजुट हो सकता है। मुलायम की कोशिशें कामयाब नहीं होती हैं तो उनके आंगन यानी सैफई से 12 अक्टूबर को चुनावी महाभारत में परिवार के दो रथ आमने-सामने होंगे।

अखिलेश पर भारी न पड़े शिवपाल का रथ

इटावा में मुलायम के गांव सैफई से 12 अक्टूबर को एक साथ दो चुनावी रथ निकलने की घोषणाएं हो चुकी हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस दिन से चुनावी रथ यात्रा निकालने की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। उधर, अखिलेश के चाचा और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी यानी प्रसपा के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने अखिलेश को अल्टीमेटम दिया है कि 11 अक्टूबर तक यदि अखिलेश यादव प्रसपा के साथ चुनावी गठबंधन कर लेते हैं तो ठीक अन्यथा वह अलग राह चलेंगे और उनकी चुनावी रथ यात्रा भी 12 अक्टूबर से शुरू होगी। एक तरह से चाचा शिवपाल यादव ने अब गेंद अखिलेश यादव के पाले डाल दिया है। उन्होंने कहा है कि, प्रदेश में विधानसभा की सीटों का सम्मान पूर्वक समझौता होने पर ही बात होगी, हमारे रास्ते खुले हुए हैं। अखिलेश यादव को 11 अक्तूबर की रात्रि अंतिम फैसला ले लेना होगा।

यह है मुलायम की चिंता

अखिलेश यादव 12 अक्टूबर से चुनावी रथयात्रा पर निकलने की घोषणा कर चुके हैं। ऐसे में मुलायम सिंह यादव की चिंता यही है कि, सपा-प्रसपा कैसे एक हों? सपा के वोटों का बिखराव हुआ तो नुकसान सपा को ज्यादा प्रसपा को कम होगा। पार्टी बचाने की चिंता में नवरात्रि में पूजा के दौरान अखिलेश और शिवपाल के साथ बैठकर वह परिवार को एक करने की कोशिश करेंगे। मुलायम चाहते हैं कि सपा और प्रसपा दोनों मिलकर चुनावों में जनता के बीच जाएं, ताकि वोटों का बंटवारा न हो।

अखिलेश-शिवपाल के लिए अग्नि परीक्षा

विधानसभा चुनाव 2022 अखिलेश और शिवपाल दोनों के ही लिए अग्निपरीक्षा साबित होगा। बसपा के साथ चुनावी गठबंधन के बाद भी लोकसभा चुनाव में सपा सिर्फ पांच सीटों पर ही सिमट गयी थी वहीं प्रसपा उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गयी थी। ऐसे में शिवपाल को जहां अपनी सियासी जमीन बचाने की चिंता है वही अखिलेश को विधानसभा की 47 सीटों से बढ़ाकर 200 के पार ले जाने की चुनौती है।

शिवपाल ने किया कौरवों पांडवों का जिक्र

शिवपाल यादव ने चुनावी महाभारत में कौरव और पांडवों का जिक्र करते हुए कहा है कि पांडवों ने कौरव से सिर्फ पांच गांव मांगे थे। इसी तरह हम भी अखिलेश से सिर्फ अपने कार्यकर्ताओं का सम्मान मांग रहे हैं। यदि सम्मान मिल गया तो ठीक अन्यथ महाभारत होने से कोई रोक नहीं सकता। भाजपा को हराना है तो सपा-प्रसपा को एक होना होगा।

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव का कहना है कि 11 अक्तूबर तक उन्हें समाजवादी पार्टी के जवाब का इंतजार रहेगा। इसके बाद 12 अक्टूबर से सामाजिक परिवर्तन रथ यात्रा 7 चरणों में निकलना शुरू हो जाएगी। यह 75 जिलों में भ्रमण करेगी।

विलय नहीं चाचा शिवपाल की पार्टी से होगा गठबंधन

इसके पहले अखिलेश यादव कह चुके हैं कि उनकी पार्टी शिवपाल की सीट जसवंतनगर पर चुनाव नहीं लड़ेगी। विधानसभा चुनाव में प्रसपा से गठबंधन होगा।

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