4 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मुस्लिम लड़की को संस्कृत में Gold मेडल, फिर सुनाई अपने दोनों भाइयों की कहानी…

देश भर में जहां मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा से बढ़कर उन्हें धार्मिक रहने पर ज़ोर दिया जा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश की एक मुस्लिम लड़की ने देव वाणी कही जाने वाले संस्कृत भाषा में गोल्ड मेडल हासिल कर लिया है। ऐसे में ये धार्मिक कट्टरपंथियों को दिया जाने वाला सबसे बेहतर जवाब साबित होता दिखाई दे रहा है।

2 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Dinesh Mishra

Feb 11, 2022

File Photo of Muslim Girl Takes Gold Medal in Sanskrit

File Photo of Muslim Girl Takes Gold Medal in Sanskrit

Muslim Girl Gold Medal In sanskrit उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ विश्वविद्यालय की एक मुस्लिम लड़की ने संस्कृत में एमए की टॉप स्टूडेंट की लिस्ट में शामिल हो गई उसने संस्कृत में 5 मेडल जीते हैं। नवंबर में आयोजित अपने दीक्षांत समारोह के दौरान एलयू द्वारा गजाला के नाम की घोषणा की गई थी, लेकिन कोरोना के कारण समारोह के दौरान कुछ छात्रों को ही पदक दिए जा सके। गुरूवार को संकाय स्तरीय पदक वितरण समारोह के दौरान कला के डीन प्रोफेसर शशि शुक्ला ने गजाला को पदक से सम्मानित किया।

गजाला ने अपनी शिक्षा बहुत ही कम उम्र में शुरू किया था। उनके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। मजदूर की बेटी गजाला पांच भाषाओं अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, अरबी और संस्कृत में पारंगत है। जब वह 10वीं कक्षा में थी तब उनके पिता का निधन हो गया और उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए संघर्ष किया।

ये गोल्ड मेडल मेरे भाइयों ने जीते हैं

गजाला कहती हैं कि, "ये पदक मैंने नहीं बल्कि मेरे भाइयों शादाब और नायब ने जीते हैं जिन्होंने स्कूल छोड़ दिया और क्रमश: 13 और 10 साल की उम्र में गैरेज में काम करना शुरू कर दिया ताकि मैं पढ़ाई जारी रख सकूं।" उनकी बड़ी बहन यासमीन भी एक बर्तन की दुकान में काम करने लगीं, जबकि उनकी मां नसरीन बानो उनके घर की देखभाल करती हैं।

संस्कृत में प्रोफेसर बनना चाहती है

गजाला अपने परिवार के साथ एक कमरे के घर में रहती है। सुबह 5 बजे उठकर 'नमाज' करती है, घर के सारे काम करती है और दिन में लगभग सात घंटे संस्कृत पढ़ती है। वह संस्कृत की प्रोफेसर बनना चाहती हैं।

गजाला परिसर में लोकप्रिय है और विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान संस्कृत के श्लोक, गायत्री मंत्र और सरस्वती वंदना का पाठ करती है। यह पूछे जाने पर कि उन्होंने संस्कृत को क्यों चुना, गजाला कहती हैं, "सभी भाषाओं में भगवान की अपनी भाषा संस्कृत है। यह दिव्य है। संस्कृत में, कविता ज्यादा मधुर है।" उनके अनुसार, संस्कृत में उनकी रुचि निशातगंज के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शुरू हुई, जहां उनके शिक्षक ने उन्हें कक्षा 5 में संस्कृत पढ़ाया।

गजाला ने कहा, "मेरे संस्कृत ज्ञान और रुचि अक्सर उन लोगों को आश्चर्यचकित करते हैं जो मुझसे पूछते हैं कि एक मुस्लिम होने के नाते मैंने भाषा के लिए प्यार कैसे विकसित किया। वे मुझसे पूछते हैं कि मैं इसके साथ क्या करूंगी, लेकिन मेरे परिवार ने हमेशा मेरा समर्थन किया।" गजाला अब वैदिक साहित्य में पीएचडी करना चाहती हैं।

Story Loader