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नगर निकाय चुनाव खत्म, नतीजों का इन्तजार शुरू

उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के साथ ही प्रत्याशियों के भाग्य के फैसले का इन्तजार शुरू हो गया है।

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लखनऊ

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Laxmi Narayan

Nov 29, 2017

nikay chunav

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के साथ ही प्रत्याशियों के भाग्य के फैसले का इन्तजार शुरू हो गया है। तीसरे और अंतिम चरण में रायबरेली, बाराबंकी, झांसी सहित 26 जिलों के नगर निकायों के लिए लोगों ने वोट डाले। तीसरे चरण में बरेली, सहारनपुर, झांसी, मुरादाबाद और फिरोजाबाद नगर निगमों के साथ 76 नगर पालिका परिषदों और 152 नगर पंचायतों के लिए वोट डाले गए। तीसरे चरण के तहत हुए मतदान में कुल 28,135 प्रत्याशियों के भाग्य पर जनता ने मुहर लगा दी। वोटों की गिनती एक दिसंबर को होनी है।

कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर

बुधवार को सहारनपुर, बागपत, बुलंदशहर, मुरादाबाद, संभल, बरेली, एटा , फिरोजाबाद, कन्नौज, औरैया, कानपुर देहात, झांसी, महोबा, फतेहपुर, रायबरेली, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, बलरामपुर, सिद्धार्थ नगर, महराजगंज, कुशीनगर, मऊ, चंदौली, जौनपुर और मीरजापुर जिलों में मतदान हुए। इन जनपदों में नगर निगमों और नगर निकायों पर कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। तीसरे चरण में कुल 233 निकायों के 4299 वार्डों पर लोगों ने मतदान कर अपने प्रतिनिधियों का चुनाव किया। तीसरे चरण के लिए महापौर के सबसे अधिक 22 प्रत्याशी बरेली में हैं। तीसरे चरण में सुरक्षा के लिहाज से पुलिस, पीएसी, होमगार्ड के साथ ही पैरामिलिट्री फ़ोर्स की भी तैनाती रही।

निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे नतीजे

राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान पूरा होने के साथ ही मतगणना की तैयारियों को भी अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं। सभी जनपदों में प्रेक्षकों की तैनाती पूर्व में ही की जा चुकी है जो मतगणना तक अपनी तैनाती के जनपदों में रहेंगे। एक दिसंबर को होने वाली मतगणना और नतीजों को देखते हुए सभी मतगणना केंद्रों की सुरक्षा और चुनावी नतीजों को त्वरित घोषित किये जाने की व्यवस्था की है। चुनाव नतीजों को राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर भी देखा जा सकेगा।

भाजपा के लिए सबसे अधिक प्रतिष्ठा का सवाल

तीसरे चरण का मतदान खत्म होने के साथी ही सभी राजनीतिक दल अब नतीजों पर नजर गड़ाए हैं। चुनाव में सबसे अधिक प्रतिष्ठा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की लगी है। पार्टी के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित पूरे कैबिनेट और प्रदेश संगठन ने ताकत झोंक दी थी। दूसरी ओर कांग्रेस ने जहाँ परम्परागत तरीके से प्रत्याशी उतारकर चुनाव मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई तो सपा और बसपा के बड़े नेताओं ने चुनाव प्रचार के मैदान में उतरने से परहेज किया। इन सबके बीच नगर निकाय चुनाव के नतीजे कुछ दलों के लिए संजीवनी साबित होंगे तो कुछ को अपनी आने वाली रणनीति में बदलाव करना पड़ेगा।