
जीएसटी की अलग-अलग स्लैब दरों से दाम बढ़े हैं। लखनऊ के अमीनाबाद की थोक मंडी में अभी से ही रौनक बढ़ने लगी है। यहां से प्रदेश भर से दुकानदार स्टेशनरी और किताबें खरीदने आते हैं ।
बड़े कारोबारियों का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई होने से व्यापार कम हो गया है, लेकिन अब उम्मीद है कि इस सत्र में अच्छा खासा व्यापार होगा। अभी से ही दूसरे शहरों से दुकानदार खरीदारी के लिए अमीनाबाद पहुंचने लगे हैं।
स्टेशनरी निर्माता विक्रेता एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह चौहान ने बताया, “कागज और इंक से लेकर सभी उत्पाद 70 से 100 फीसदी तक महंगे हो गए। सीएनजी, डीजल के दाम बढ़ने से भाड़ा अधिक हो गया है। दो साल कोरोना में नुकसान के कारण पूंजी घट गई है। स्कूली बस्ता 40% तक महंगा है।”
“कच्चा माल की दर और लागत बढ़ी है। बड़े उद्योगपतियों ने अनियंत्रित तरीके से बढ़े है। उत्पादों पर कर भी अलग-अलग है। इससे भी दरों में इजाफा हुआ है। कुछ आइटम में तो रेट दोगुना हो गए। कुछ पांच या 10 के पैक में रिटेल में मिलती थी। वह बंद हो गए।”
2020 से 2023 की स्टेशनरी के सामानों की कीमतों में अंतर
सामग्री | पुराना रेट | नया रेट |
| छोटी स्केल | 05 | 08 |
| बड़ी स्केल | 10 | 15 |
| छोटा कलम | 05 | 08-10 |
| ब्रांडेड पेन | 10 | 15 |
| छोटा कलर | 10 | 15 |
| बड़ा कलर | 20 | 30 |
| ज्योमेट्री बॉक्स | 30 | 40-45 |
| पेंसिल बॉक्स 12 पीस | 20 | 30-35 |
| छोटी कॉपी 120 पेज | 25 | 40 |
| बड़ी कॉपी 140 पेज | 35 | 55 |
फाइल | 40 | 60 |
| कवर रोल | 20 | 35 |
| टेप | 15 | 25 |
Arbitrariness of Publishers in Schools While on the
one hand the increase in the prices of stationery is putting a heavy burden on the parents' pockets, the arbitrary attitude of the publishers in schools is no less. Books are available at arbitrary rates along with the price. The content has been changed by putting a NEP sticker on the books.
Updated on:
31 Jan 2023 07:16 pm
Published on:
31 Jan 2023 07:15 pm
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