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नए सत्र में बच्चों की पढ़ाई अ‌‌‌भिभावक पर पड़ेगी भारी, स्टेशनरी के दाम बढ़े

स्कूल में बच्चों की कॉपी, पेंसिल, रबड़ और पेन के दाम बढ़ने वाले हैं। नए सत्र से 40 से 45% तक दाम बढ़ने के उम्मीद है।  

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लखनऊ

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Upendra Singh

Jan 31, 2023

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जीएसटी की अलग-अलग स्लैब दरों से दाम बढ़े हैं। लखनऊ के अमीनाबाद की थोक मंडी में अभी से ही रौनक बढ़ने लगी है। यहां से प्रदेश भर से दुकानदार स्टेशनरी और किताबें खरीदने आते हैं ।

बड़े कारोबारियों का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई होने से व्यापार कम हो गया है, लेकिन अब उम्मीद है क‌ि इस सत्र में अच्छा खासा व्यापार होगा। अभी से ही दूसरे शहरों से दुकानदार खरीदारी के लिए अमीनाबाद पहुंचने लगे हैं।

स्टेशनरी निर्माता विक्रेता एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह चौहान ने बताया, “कागज और इंक से लेकर सभी उत्पाद 70 से 100 फीसदी तक महंगे हो गए। सीएनजी, डीजल के दाम बढ़ने से भाड़ा अधिक हो गया है। दो साल कोरोना में नुकसान के कारण पूंजी घट गई है। स्कूली बस्ता 40% तक महंगा है।”

“कच्चा माल की दर और लागत बढ़ी है। बड़े उद्योगपतियों ने अनियंत्रित तरीके से बढ़े है। उत्पादों पर कर भी अलग-अलग है। इससे भी दरों में इजाफा हुआ है। कुछ आइटम में तो रेट दोगुना हो गए। कुछ पांच या 10 के पैक में रिटेल में मिलती थी। वह बंद हो गए।”

2020 से 2023 की स्टेशनरी के सामानों की कीमतों में अंतर












































































सामग्री


पुराना रेटनया रेट
छोटी स्केल0508
बड़ी स्केल1015
छोटा कलम0508-10
ब्रांडेड पेन1015
छोटा कलर1015
बड़ा कलर2030
ज्योमेट्री बॉक्स3040-45
पेंसिल बॉक्स 12 पीस2030-35
छोटी कॉपी 120 पेज2540
बड़ी कॉपी 140 पेज3555

फाइल


4060
कवर रोल2035
टेप1525

Arbitrariness of Publishers in Schools While on the
one hand the increase in the prices of stationery is putting a heavy burden on the parents' pockets, the arbitrary attitude of the publishers in schools is no less. Books are available at arbitrary rates along with the price. The content has been changed by putting a NEP sticker on the books.