
Mayawati
लखनऊ. मेरठ नगर निगम के शपथ ग्रहण के दौरान वन्दे मातरम के गायन को लेकर हुए विवाद के बाद बसपा सुप्रीमो के बयान से कई राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। विवाद के बाद बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बयान जारी कर कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय प्रतीक, राष्ट्रगान और वन्दे मातरम का सम्मान करती है। दरअसल मेरठ में शपथ ग्रहण के दौरान मेयर सुनीता वर्मा और अन्य पार्षदों के खड़े न होने पर विवाद खड़ा हो गया था। बताया जा रहा है कि बसपा मेयर को पार्टी ने इस आचरण के लिए फटकार भी लगाई है।
2019 के लिए नए वोटरों पर नजर
दरअसल वन्दे मातरम के बहाने जिस तरह भारतीय जनता पार्टी हिन्दू वोटरों को ध्रुवीकृत करने की कोशिश करती रही है, उसके बाद बसपा को भी इस बात का अहसास हो गया है कि बड़े वोटर वर्ग की उपेक्षा कर उसकी 2019 की राह आसान नहीं रहेगी। इस तरह वन्दे मातरम पर अपना रुख स्पष्ट कर बसपा ने जहां नए संभावित वोटरों को लुभाने की कोशिश की है तो साथ ही यह संकेत भी दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह भारतीय जनता पार्टी से चुनावी गठबंधन भी कर सकती हैं। बसपा खुले तौर पर भले ही भाजपा को सबसे बड़ा विरोधी मानती हो लेकिन जानकार दावा करते हैं कि वन्दे मातरम का समर्थन कर मायावती दलित राजनीति के साथ ही अन्य जातियों को अपने पाले में करने के लिए 'देशभक्ति' की राजनीति पर भाजपा का अनुसरण करने की तैयारी में हैं।
मेरठ की मेयर को फटकार
मायावती ने मेरठ में जहां शपथ ग्रहण के दौरान हंगामे को लेकर भाजपा को जिम्मेदार बताया तो दूसरी ओर यह भी बताया जा रहा है कि मेयर सुनीता वर्मा को वन्दे मातरम के दौरान खड़े न होने के लिए फटकार लगाई गई है। बसपा सुप्रीमो की नाराजगी के बाद मेरठ की महापौर सुनीता वर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि बवाल के कारण शोरशराबा हो रहा था और उन्हें वन्दे मातरम गायन की आवाज नहीं सुनाई दी। मेयर ने यह भी कहा है कि उनकी पार्टी के सभी नेताओं के लिए बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष का निर्देश सबसे ऊपर है। मेयर के तेवर अब बदले दिखाई दे रहे हैं। माना जा रहा है कि वन्दे मातरम और देशभक्ति की पिच पर अब बसपा भाजपा को चुनौती देने के साथ ही भविष्य में उसके साथ किसी तरह के समझौते का भी राह खुला रखना चाहती हैं।
Published on:
14 Dec 2017 05:10 pm

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