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One Nation One Election: ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ अटल जी की सोच, क्यों दी गई पूर्व राष्ट्रपति कोविंद को जिम्मेदारी

सहमति-असहमति के बीच देश धीरे-धीरे एक राष्ट्र-एक चुनाव की ओर बढ़ रहा है। इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार ने पहल किया है और सभी दलों में आमराय बनाने की जिम्मेदारी पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दी गई है।

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सभी दलों में आमराय बनाने की जिम्मेदारी पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दी गई है।

One Nation One Election: इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के प्रयोग की मांग सबसे पहले लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी ने उठाया था। तब भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी नेता प्रतिपक्ष हुआ करते थे। इसी प्रकार चुनाव सुधारों से लेकर एक देश एक चुनाव की मांग भी भाजपा समय-समय पर करती रही है। दरअसल यह कोई पहली बार नहीं है, जब मोदी सरकार ने एक राष्ट्र एक चुनाव की चर्चा छेड़ी है और इसकी संभावनाओं की तलाश में समिति का निर्माण किया है। वास्तव में एक राष्ट्र-एक चुनाव की चर्चा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई पहले भी करते थे कि इसके कारण देश का अरबों रुपया बचेगा और हमारे संसाधन भी बचेंगे।

लेकिन असली सवाल है कि अर्ध संघात्मक व्यवस्था वाले देश में जहां 28 राज्य हों और 8 संघ राज्य क्षेत्र हों, इसके अलावा सैकड़ों की तादात में क्षेत्रीय दल, राष्ट्रीय दल, भाषाएं अलग, मौसम में परिवर्तन, समस्याएं और प्राथमिकताएं अलग हो वहां पर एक राष्ट्र-एक चुनाव वास्तव में चुनौतीपूर्ण कार्य है।

लेकिन इसे असंभव बिलकुल नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग ने भी कहा है कि यदि सरकार इस तरह का प्रस्ताव लाती है अथवा समय पूर्व चुनावों की घोषणा करती है तो हम पूरी तरह तैयार हैं। दूसरी तरफ विपक्ष का कहना है कि इंडिया गठबंधन की पूरी तैयारी न होने पाए इसके लिए सरकार जल्दी चुनाव करा देना चाहती है।

राष्ट्रपति रहते कोविंद ने भी की थी चर्चा
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति रहते एक कार्यक्रम के दौरान एक राष्ट्र-एक चुनाव की चर्चा की थी और कहा था इससे देश के संसाधन बचेंगे। इसके लिए उन्होंने सभी दलों के बीच आम सहमति की जोरदार वकालत भी किया था। साल 2018 में भी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा था कि बार-बार चुनाव होने से आम नागरिक परेशान है और इससे देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि राष्ट्रपति रहते रामनाथ कोविंद ने एक राष्ट्र-एक चुनाव की चर्चा को गंभीरता से आगे बढ़ाया और हर अवसर पर इसकी वकालत करते रहे हैं।

अब मोदी सरकार ने दी जिम्मेदारी
रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद छोड़े एक साल से अधिक का वक्त हो चुका है। लेकिन वह लगातार सक्रिय रहते हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता प्रभावशाली लोगों से मिलते रहना और विचार-विमर्श करते रहना है। हाल ही में वह संघ प्रमुख मोहन भागवत से भी मिले और गंभीर विषयों पर चर्चा होने की बात कही।

यूपी के कानपुर के पास परोख के रहने वाले रामनाथ कोविंद ने अपने कैरियर की शुरूआत एक वकील के रुप में किया था। वह शुरू से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे और वकील से लेकर राष्ट्रपति तक का शानदार सफर पूरा किया है। अब वह बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पर फिर से आ गए हैं और देश में एक साथ चुनाव कराने की संभावनाओं, चुनौतियों आदि का अध्ययन कर दलों में आम सहमति पर कार्य कर रहे हैं।

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